सरकार बदल गई, नहीं बदली अधिकारियों की भ्रष्ट प्रवृत्ति

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में सरकार बदल गई, लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों की प्रवृत्ति में बदलाव नहीं आ पाया है। सरकार से अच्छा-खासा पगार पाने वाले अधिकारी आज भी खुलेआम कमीशन के लिए मुंह खोलने में लगे हैं। ऐसे में छोट-छोटे कामों के लिए दी जाने वाली धनराशि का कितना ईमानदारी से उपयोग हो पाएगा, इसे समझा जा सकता है। आदिवासी समग्र विकास के तहत जिले के जनपद पंचायतों में चबूतरा निर्माण इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। डेढ़-डेढ़ लाख के चबूतरा निर्माण कार्य में अधिकारी के द्वारा खुलकर दो प्रतिशत राशि की मांग करना शर्मनाक है। करोड़ों के निर्माण कार्य में ऐसे भ्रष्ट अधिकारी कैसे मुंह फाड़ते होंगे इसे समझा जा सकता है।

जानकारी के मुताबिक लखनपुर विकासखंड के ग्राम कुसु व चांदो में दो चबूतरे का निर्माण कराया गया है। इसके लिए डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की स्वीकृति मिली है। इसका सत्यापन, माप करने के लिए जब ठेकेदार ने एसडीओ से संपर्क किया तो जनपद पंचायत कार्यालय लखनपुर में पदस्थ एसडीओ ने स्वीकृत राशि में से 2 प्रतिशत की व्यवस्था ठेकेदार को करके रखने के लिए कहा। एसडीओ व ठेेकेदार की बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ठेकेदार ने काम पूरा होने पर सत्यापन के लिए एसडीओ से मोबाइल पर बात की है। (वायरल ऑडियो की पुष्टि छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइन नहीं करता है, जांच में सामने आ जाएगा कि वायरल ऑडियो में दोनों की हुई बातें कितनी सच हैं)। लखनपुर विकासखंड के ग्राम कुसु व चांदो में दो चबूतरे का निर्माण मुकेश नाम के ठेकेदार ने कराया है। निर्माण लगभग पूर्णता की ओर पहुंचने पर इसके नाप, सत्यापन के लिए जब वह जनपद कार्यालय लखनपुर के एसडीओ दिलीप मिंज से मोबाइल में चर्चा किया तो कमीशन की व्यवस्था करके रखने की बात सुनकर उसके होश उड़ गए।  ठेकेदार ने घर में विवाह होने का हवाला देते हुए निर्माण कार्य का भुगतान होने के बाद दो प्रतिशत की राशि उन्हें देने कहा, लेकिन अधिकारी आधा तो लूंगा कहते हुए अपनी बात पर अड़ गया।

एसडीओ और ठेकेदार के बीच बातचीत का अंश
ठेकेदार-सर प्रणाम। वही बोल रहा था कंप्लीट हो गया है ढलाई…  
एसडीओ-वहीं मैं सोच रहा था, फोन काहे नहीं कर रहे हो…  
ठेकेदार-कल लगाया रहता सर, थोड़ा सा फंस गया था एक जगह, इसी चक्कर में नहीं लगा पाया।
एसडीओ-कहां मिलोगे फिर… चांदो और कहां बोले…  
ठेकेदार-चांदो और कुसु सर…  
एसडीओ-आज मेरे को मिलो, उसको नाप लेता हूं, मैं ही नापूंगा…  
ठेकेदार-ठीक है न सर देख लीजिए। क्या है 11 तारीख को मेरे यहां शादी भी है, इसीलिए थोड़ा दिक्कत हो रहा है सर… पेमेंट का… पेमेंट आ जाता तो काम भी चालू हो जाता सर… शादी में देना था…  
एसडीओ-कितने का है ये…  
ठेकेदार-डेढ़-डेढ़ लाख का है…  
एसीडीओ-तैयार रखना जितना होता है, दो परसेंट…  
ठेकेदार-ठीक है न सर… तो आने के बाद ही कर पाऊंगा पेमेंट, अभी तो एकदम निल बैलेंस चल रहा हूं…  
एसडीओ-कम से कम आधा तो लूंगा…
ठेकेदार-चलिए ना आइए कर तो दीजिए सर… पेमेंट मैं कर दूंगा, उसका दिक्कत नहीं है सर…  
एसडीओ-चल ठीक है मिलना ना… एकाध घंटे बाद मिलना…
ठेकेदार-ठीक है ना सर… थोड़ा सा मैं करजी आया था बैंक में, फिर मैं आपको फान करूंगा…  
एसडीओ-करजी कहां है…
ठेकेदार-ये तो दरिमा करजी सर…
एसडीओ-दरिमा… अच्छा उधर आए हो। चल फोन करना फिर मेरे को…
ठेकेदार-ठीक है..।  

”एसडीओ दिलीप कुमार मिंज से वायरल ऑडियो की सत्यता को परखने के लिए उनका पक्ष लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किया। बहरहाल वायरल ऑडियो में जिस प्रकार खुलेआम निर्माण कार्यों में लगे ठेकेदारों से छोटे-छोटे कामों में अधिकारी राशि की मांग कर रहे हैं, वह केंद्र व प्रदेश सरकार के राम राज और सुशासन की कल्पना को तार-तार करते नजर आ रहा है। समझा जा सकता है करोड़ों के काम में इनकी कैसे गिद्ध नजर लगे रहती होगी। ÓÓ

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