मरीजों को अस्पताल लेकर आने वालों को रोजाना करना पड़ रहा परेशानियों का सामना

अंबिकापुर। राजमाता श्रीमती देवेन्द्र कुमारी सिंहदेव चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध, शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय व 100 बिस्तर मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) के सामने रोजाना जाम से लोगों को दो-चार होना पड़ता है। आधी सड़क पर निजी एम्बुलेंस माफिया, ठेले व रेहड़ी वालों का कब्जा रहता है। किसी व्हीआईपी का आगमन हो, तो पुलिस और निगम का अमला संयुक्त रूप से कुछ ऐसी सक्रियता दिखाता है कि चंद घंटे में अस्पताल परिसर के सामने की सड़क खाली हो जाती है, और मरीजों को लेकर आने वाली एम्बुलेंस की पहुंच भी आसान हो जाती है। व्हीआईपी के जाने के बाद सब कुछ पुराने ढर्रे पर चलने लगता है। निजी एम्बुलेंस के चालकों के बीच बनी रहने वाली प्रतिस्पर्धा की स्थिति में इनकी बदजुबानी से यहां का वातावरण खराब हो रहा है, मरीज के स्वजन भी इनकी हरकत से दहशत में रहते हैं। आए दिन गाली-गलौज, झूमाझटकी जैसा पीिदृश्य देखने को मिलता है।
बता दें कि मुख्य अस्पताल परिसर और एमसीएच के सामने निजी एम्बुलेंस माफियाओं व ठेला संचालकों का कब्जा रहने से शासकीय एम्बुलेंस के चालकों को काफी दिक्कत होती है। कई बार मरीजों को लेकर आने वाले एम्बुलेंस के चालक व निजी वाहन से मरीज को लेकर आने वाले जाम में फंसे नजर आते हैं। आपात परिस्थिति में तो हालात और बदतर नजर आता है। मणिपुर थाना पुलिस और अस्पताल के पुलिस सहायता केंद्र प्रभारी के द्वारा इन्हें पूर्व में नसीहत दी गई थी, कि अस्पताल परिसर के सामने एम्बुलेंस, ठेले न लगाएं, लेकिन अपनी हठधर्मिता से ये बाज नहीं आ रहे हैं। जनसामान्य की ओर से दी जाने वाली समझाइस इन्हें नागवार लगती है।

ऐसे हालात इसलिए हैं क्योंकि व्हीआईपी के आगमन दौरान यहां न तो ठेले नजर आते हैं और न ही निजी एम्बुलेंस। पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को भी ऐसे हालात का सामना नहीं करना पड़ा है। ऐसे अधिकारियों के विजिट की सूचना मिलने पर पहले से ही पुलिस दौड़ लगाने लगती है। औचक निरीक्षण में कभी वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे, तो उन्हें जनसामान्य को जाम की स्थिति में होने वाले दर्द का एहसास होगा। कई बार अस्पताल अधीक्षक की वाहन भी जाम में फंस चुकी है। मरीजों को एमएसीएच से जांच के लिए मुख्य अस्पताल परिसर में लाने के लिए सुलभ कराई गई वाहन के चालक भी ऐसे हालातों से रोजाना गुजर रहे हंै। ऐसे में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल को विशेष पहल करने की जरूरत है, ताकि लोगों को आने-जाने में आसानी हो।

नजराना के लिए मरीजों की जिंदगी डाल रहे खतरे में
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध शासकीय रघुनाथ अस्पताल व एमसीएच के गेट के सामने सड़कें चौड़ी दिखें और लोगों को जाम से मुक्ति मिले, इसके लिए निजी एम्बुलेंस नहीं लगाने व ठेला संचालकों के लिए स्थान तय कर सख्त हिदायत देने की जरूरत है। इन एम्बुलेंस के चालकों की गिद्ध नजर मरीजों पर भी रहती है, और वे मरीज के संबंधियों से सांठगांठ करके उन्हें चहेते अस्पतालों में पहुंचाने से भी नहीं चूकते हैं, इसके एवज में इन्हें मरीज के संबंधियों से मनमाफिक किराया तो मिलता ही है, मरीज को निजी अस्पताल में पहुंचाने पर नजराना भी मिलता है। शासकीय एम्बुलेंस की अनुपलब्धता की स्थिति में अगर किसी जरूरतमंद या गरीब को इनके एम्बुलेंस की जरूरत हो, तो ये नजरें फेर लेते हैं। ऐसे में शासकीय अस्पतालों के सामने निजी एम्बुलेंसों का ठहराव किसी भी परिस्थिति में न हो, इसके लिए सख्त पहल की जरूरत है।

परिवहन विभाग नहीं करता निजी एंबुलेंसों की जांच
निजी एम्बुलेंस माफिया मरीजों की जिंदगी से किस कदर खिलवाड़ कर रहे हैं, इसकी हकीकत जानने की परिवहन विभाग के द्वारा किसी प्रकार की पहल नहीं की गई है। वाहन के बाहर सिर्फ एम्बुलेंस लिख दिया गया है, अंदर कोई सुविधा नहीं रहती है। इन एम्बुलेंसों में न तो आपात परिस्थिति से निपटने के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर मिलेगा और न ही पैरामेडिकल स्टॉफ। सघन जांच हो तो कई एम्बुलेंस के चालकों के पास लाइसेंस भी नहीं मिलेगा। गहन जांच में एम्बुलेंस व मरीज माफिया का पूरा तंत्र सामने आ जाएगा, जो मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने में लगे हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को भी इसे संज्ञान में लेने की जरूरत है, ताकि शासन के द्वारा उपलब्ध कराई जा रही परिवहन व स्वास्थ्य सुविधा का सही लाभ पीड़ितों व इनके संबंधियों को मिल सके। परिवहन विभाग को भी निजी एम्बुलेंसों की जांच के लिए विशेष मुहिम चलाना चाहिए।

अस्पताल के सामने बेतरतीब तरीके से खड़ी रहने वाली एम्बुलेंसों व ठेला में संचालित होने वाली दुकानदारी से जनसामान्य और मरीजों को होने वाली असुविधा को मैंने भी भांपा है और इन पर कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा को पत्र लिखा है। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध चिकित्सालय अंबिकापुर परिसर में एक ओर एम.सी.एच. भवन एवं एक ओर पुराना चिकित्सालय भवन है, जिसके कारण मरीजों को जांच व उपचार हेतु रोड के दोनों ओर लाना एवं ले जाना पड़ता है, परिजनों की आवाजाही लगी रहती है। रोड के दोनों ओर ठेले, गुमटी एवं प्राइवेट एम्बुलेंस इत्यादि होने के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है] दुर्घटना होने की संभावनाएं बनी रहती हंै, वाद-विवाद की स्थिति भी उत्पन्न होती है। कई बार मेरी गाड़ी भी जाम में फंस चुकी है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक, नगर निगम, यातायात विभाग का पूर्व में भी ध्यानाकर्षण कराया गया था, जिस पर कार्रवाई की गई, किन्तु 3-4 दिवस बाद ही पुन: ठेले, गुमटी लगा दिए गए। इसका स्थायी समाधान निकले, इसे देखते हुए मैंने पुन: कमिश्नर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व यातायात प्रभारी को पत्र लिखा है।

डॉ. आर.सी. आर्या, अस्पताल अधीक्षक
मेडिकल कॉलेज अस्पताल, अंबिकापुर

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