मामला अस्पताल प्रबंधन तक पहुंचा, खाने के लिए रुपये मांगने की बात स्वीकारा पॉयलट
अंबिकापुर। बीमारों को नि:शुल्क अस्पताल लाने और रेफर मरीजों को हायर सेंटर तक पहुंचाने के लिए शासन की ओर से संजीवनी 108 एंबुलेंस की सुविधा दी गई है, इसका मकसद दूर-दराज गांव में रहने वाले लोगों को बेहतर और त्वरित उपचार सुविधा मुहैया कराना है। सरकार के ध्येय को नजरअंदाज कर अब संजीवनी 108 के कर्मयोगी सेवा का लाभ लेने वालों से रुपये की मांग करने में लगे हैं।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में ऐसा मामला सामने आया है, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद शासन की ओर से मुहैया कराई जाने वाली सुविधा का लाभ किस हद तक लोगों को मिल पा रहा होगा, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। सामने आया है कि दो मरीजों को रायपुर इंटरनेट मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद अस्पताल के जिम्मेदारों तक पहुंचा और उन्होंने मामले को संज्ञान में लेकर पायलट से पूछताछ की, तो उसने मरीज के स्वजन से रास्ते में खाना खाने के लिए रुपये मांगने की बात कही। यह भी तर्क दिया कि 10 हजार रुपये वेतन मिलता है, रायपुर आने-जाने के दौरान वे भूखे तो नहीं रह सकते, ऐसे में खाना खिलानेे के लिए उन्होंने बात की थी। हालांकि उनका यह तर्क तथ्यहीन प्रतीत हो रहा है क्योंकि संजीवनी के पॉयलट को इसके लिए अलग से एलाउंस देने की बात संजीवनी का क्षेत्र में दारोमदार संभालने वाले कहते पल्ला झाड़ रहे हैं। सच्चाई क्या है, इसका पर्दाफास जांच के बाद करने की बात कही जा रही है।
यह है मामला
रविवार की शाम को मेडिकल कॉलेज अस्पताल से दो हेड इंज्यूरी के मरीजों को गंभीर स्थिति में रायपुर रेफर किया गया था। रेफर मरीजों को रायपुर ले जाने के लिए संजीवनी 108 की सुविधा दी गई थी। दोनों मरीजों को रायपुर ले जाने की तैयारी चल रही थी। इसी बीच एंबुलेंस के दोनों पायलटों ने मरीज के स्वजन से संपर्क कर रायपुर छोडऩे के बदले रुपये की मांग में लग गए। मांग दो-दो हजार रुपये की थी। इसकी जानकारी अस्पताल प्रबंधन को हुई तो वे मरीज और पायलट के संपर्क में आए। प्रबंधन ने इसका वीडियो भी बनवाया है, जिसमें पॉयलट खाने के लिए रुपये मांगना स्वीकार किया है। प्रबंधन का कहना है कि संजीवनी के पॉयलट अक्सर मौके का फायदा उठाकर मरीजों के स्वजनों से एक से दो हजार रुपये की मांग करते हैं। ऐसा मामला लगातार सामने आ रहा था।
पॉयलटों को मिलता है भोजन भत्ता
संजीवनी 108 के कोआर्डिनेटर का कहना है कि पॉयलट अगर रेफर मरीजों को लेकर जाते हैं तो उन्हें कंपनी द्वारा खाने के लिए भत्ता दिया जाता है, यह एक आपातकालीन सेवा है। पॉयलटों द्वारा मरीज व उनके स्वजनों से रुपये की मांग करना गलत है।

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