बिलासपुर। छत्तीसगढ़ एनआईए कोर्ट ने पिछले हफ्ते मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में गिरफ्तार केरल की दो कैथोलिक ननों को जमानत दे दी। कैथोलिक नन प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस, केरल के अलप्पुझा जिले में सिरो-मालाबार चर्च के अंतर्गत आने वाली असीसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इमैक्युलेट से जुड़ी हैं।

सशर्त मिली जमानत
एनआईए कोर्ट ने दोनों को 50-50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, उन्हें अपने पासपोर्ट जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे पहले, छत्तीसगढ़ की एक सेशन कोर्ट ने दो ननों की जमानत याचिका को यह कहते खारिज कर दिया था कि उसके पास मामले में सुनवाई का अधिकार नहीं है। सेशन कोर्ट ने टिप्पणी में कहा, “चूंकि यह प्रकरण मानव तस्करी से जुड़ा हुआ है, इसलिए मामले में सुनवाई का अधिकार एनआईए कोर्ट का है।”

एनआईए कोर्ट में लगाई थी याचिका
सेशन कोर्ट के बाद बिलासपुर स्थित एनआईए कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर आज फैसला आया। फिलहाल, एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद दोनों ननों की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। बचाव पक्ष के वकील अमृतो दास ने बताया कि पुलिस के पास ननों के खिलाफ मानव तस्करी और धर्मांतरण को लेकर कोई सबूत नहीं मिला जिस कारण से कोर्ट ने जमानत दी।

25 जुलाई को हुई गिरफ्तारी
दोनों नन आगरा के एक अस्पताल में कार्यरत थीं और छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से तीन महिलाओं को आगरा ले जा रही थीं। इसी दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर उन्हें पकड़ा था। कार्यकर्ताओं की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दोनों ननों और एक आदिवासी व्यक्ति को मानव तस्करी और धर्म परिवर्तन की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया।

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