राजनीतिक षड्यंत्र रचने वालों और तथाकथित संरक्षकों पर कार्रवाई की मांग

अंबिकापुर। शहर के कलाकेंद्र मैदान में मीना बाजार लगाने के लिये लाखों रुपये की मांग का ऑडियो वायरल होने के बाद जहां एक और कांग्रेस हमलावर हो गई है, वहीं महापौर मंजूषा भगत ने अजाक थाना पुलिस को दिये गये एक आवेदन में इसे सुनियोजित षड्यंत्र करार दिया है, वहीं भाजपा जिला अध्यक्ष की चुप्पी बनी हुई है। इनका कहना है कि शहर वासियों के बीच उनकी छवि को धूमिल करने के लिये ऐसा कृत्य किया गया है, इसकी जांच और षड्यंत्रकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिये। इन सबके बीच वायरल ऑडियो में जिस व्यक्ति से रुपये के लेन-देन को लेकर चर्चा कथित रूप से भाजपा के जिला अध्यक्ष और महापौर के बीच हो रही है, उसकी ओर से इस मामले में किसी थाने में वैधानिक कार्रवाई के लिये प्राथमिकी दर्ज कराई गई हो, या कहीं शिकायत की गई हो, ऐसा फिलहाल सामने नहीं आया है। इधर शहर के लोग नगर निगम के संचालन को सवालों के घेेरे में ले रहे हैं। यह भी कहना है कि शहर में स्वच्छ मनोरंजन के नाम पर लगाये जाने वाले मीना-बाजार का दिनोंदिन महंगे होने का कारण लाखों रुपये अवैध वसूली है। ऐसे में वायरल वीडियो की सत्यता का सामने आना जरूरी है।

नगर पालिक निगम अंबिकापुर की महापौर एवं अनुसूचित जनजाति समाज की वरिष्ठ महिला जनप्रतिनिधि मंजूषा भगत ने सोशल मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में प्रसारित कथित ऑडियो को सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए अजाक थाना अंबिकापुर में शिकायत दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

महापौर ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि, 21 जून 2026 को अनुराग मिश्रा द्वारा सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों में एक ऑडियो क्लिप प्रसारित की गई, जिसमें कला केंद्र मैदान/मीना बाजार से संबंधित कथित अवैध लेन-देन एवं भ्रष्टाचार के निराधार, भ्रामक एवं मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा है कि, यह ऑडियो न केवल तथ्यहीन है बल्कि एक आदिवासी महिला जनप्रतिनिधि की सामाजिक, राजनीतिक एवं व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार और प्रसारित किया गया प्रतीत होता है। उन्होंने कहा है कि एक आदिवासी महिला के रूप में समाज में उनकी बढ़ती स्वीकार्यता और जनसमर्थन से घबराकर कुछ राजनीतिक तत्वों द्वारा उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करने तथा उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। यह कृत्य केवल व्यक्तिगत मानहानि का नहीं है, बल्कि अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला प्रतिनिधि के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

शिकायत में मांग की गई है कि कथित ऑडियो क्लिप की तकनीकी एवं फोरेंसिक जांच कर यह पता लगाया जाये कि इसे किसने तैयार किया, किसके निर्देश पर तैयार किया गया और किन-किन लोगों ने इसे प्रसारित करने में भूमिका निभाई। साथ ही यह भी जांच की जाए कि, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कौन-कौन लोग, संगठन अथवा राजनीतिक तत्व सक्रिय हैं। महापौर ने मांग की है कि, केवल अनुराग मिश्रा की भूमिका तक जांच सीमित नहीं रखी जाए, बल्कि उन सभी व्यक्तियों एवं समूहों की भी पहचान की जाए जिन्होंने भाजपा तथा महापौर की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से कथित फर्जी ऑडियो को तैयार करवाने, प्रसारित करने अथवा प्रचारित करने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में वैचारिक विरोध स्वीकार्य है, लेकिन किसी महिला जनप्रतिनिधि को बदनाम करने के लिए फर्जी ऑडियो तैयार करना, सोशल मीडिया का दुरुपयोग करना और झूठे प्रचार के माध्यम से जनता को भ्रमित करना गंभीर अपराध है, जिसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

महापौर मंजूषा भगत ने प्रशासन एवं पुलिस विभाग से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष, व्यापक एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, साइबर अपराध संबंधी प्रावधानों तथा अन्य लागू धाराओं के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी आदिवासी महिला जनप्रतिनिधि की गरिमा और प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करने का दुस्साहस न कर सके। इस दौरान निगम सभापति हरमिन्दर सिंह टिन्नी, जिला महामंत्री विनोद हर्ष, मधुसूदन शुक्ला, पार्षद मनीष सिंह, रुपेश दुबे, एमआईसी सदस्य जितेंद्र सोनी, पार्षद शैलू सिंह, सुशांत घोष, निरंजन रॉय, शिवमंगल सिंह, पार्षद किरण साहू, प्रियंका चौबे, मधु चौदहा, संजीव वर्मा, सरस्वती यादव, प्रिया सिंह, नीलम राजवाड़े, बबली नेताम, भूपेन्द्र सिंह, अविनाश मण्डल, शानू कश्यप सहित अन्य उपस्थित थे ।

वायरल टेलिफोनिक वार्तालाप के बाद कांग्रेस ने एसआईटी गठन करने की मांग

कलाकेन्द्र मैदान के आबंटन में भारी भ्रष्टाचार के वार्तालाप का ऑडियो वायरल होने के बाद सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी ने निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच के लिये एसआईटी गठन की मांग की है। टेलिफोनिक वार्तालाप के इस वायरल वीडियो में कलाकेन्द्र मैदान में मीना बाजार लगाने के लिये लाखों रुपये के लेन-देन की बात स्पष्ट हो रही है। यह दावा किया जा रहा है कि, वायरल वीडियो में मौजूद आवाज अंबिकापुर के महापौर और भाजपा जिलाध्यक्ष की है, जिन्होंने मैदान के अलाटमेंट के लिये एक व्यक्ति से लाखों रुपये प्राप्त किया या उसकी मांग की है, बाद में अलाटमेंट दूसरे व्यक्ति को कर दिया गया, जिसने ज्यादा रकम की रिश्वत अदा की।

शफी अहमद ने कहा है कि, इस टेलीफोनिक वार्तालाप से यह अनुमान लगता है कि, मीनाबाजार के लिये कलाकेन्द्र मैदान के आबंटन हेतु कम से कम 10 लाख रुपये की राशि विभिन्न राजनैतिक लोगों एवं निगम के कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा बतौर रिश्वत प्राप्त की है। सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी ने कलेक्टर सरगुजा को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि, इस मामले की जांच एसआईटी के माध्यम से कराई जाये। शफी अहमद ने कहा कि केवल यह मामला नहीं बल्कि भ्रष्टाचार के अन्य कई ऐसे मामले हैं, जिसके जांच की आवश्यकता है। इन सभी मामलों को जल्द की सर्वजनिक करने की बात उन्होंने कही है। प्रतिनिधि मंडल के साथ हेमंत सिन्हा, संजय विश्वकर्मा, मो. इस्लाम, इंद्रजीत सिंह धंजल, आलोक सिंह, जीवन यादव, सोहन जायसवाल, शुभम जायसवाल, प्रभात रंजन सिन्हा सहित अन्य मौजूद थे।

निगम का घेराव, आन्दोलन करने की चेतावनी

सरगुजा कलेक्टर से चर्चा में शफी अहमद ने स्पष्ट कहा है कि मामले की जांच के लिये तीन दिनों में एसआईटी का गठन कर उसे जांच सौंप देना चाहिये, कांग्रेस को इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं है। इस अवधि में एसआईटी का गठन नहीं होने पर कांग्रेस आगे निगम का घेराव एवं अन्य आन्दोलनात्मक कदम उठाने को मजबूर होगी। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री द्वितेन्द्र मिश्रा ने कहा कि सामान्य वाइस संैपल और कॉल रिकार्ड से दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा, लेकिन उन्होंने शासन-प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस प्रकार एक प्रशासनिक अधिकारी पर हमले के मामले में एक विधायक को बचा लिया गया, वैसे ही इसमें सत्ताधारी पार्टी अपने लोगों का बचाने का प्रयास करेगी।

भ्रष्टाचार के खेल ने मीनाबजार को महंगा किया

मीना बाजार का प्रवेश शुल्क हो, झूले की दर, या पार्किंग शुल्क इनमें विगत एक वर्ष में भारी इजाफा हुआ है। वायरल ऑडियो से स्पष्ट है कि मीनाबाजार के लिये करीब 10 लाख रुपये का लेनदेन हुआ है। 45 दिन चलने वाले मीनाबाजार पर निगम द्वारा लिया जाने वाला नियमानुसार निर्धारित शुल्क लगभग 12 हजार 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से करीब 5 लाख 62 हजार रुपये होता है। अर्थात विधिक शुल्क से अधिक की रिश्वत इस मामल में ली गई है, नतीजतन इस भ्रष्टाचार ने आम जनता के लिये मीनाबाजार को महंगा कर दिया है।

ऑडियो को चौक-चौराहों पर लोगों को सुनाया

युवक कांग्रेस ने इस वायरल ऑडियो को ध्वनि विस्तारक यंत्र के माध्यम से शहर के चौक-चौराहों पर लोगों को सुनाया। ऑडियो को सुनकर आम जनता में इस खुले भ्रष्टाचार को लेकर भारी आक्रोश है। युवक कांग्रेस इस मुहिम को आगे भी जारी रखेगी, साथ ही जागरुकता के लिये पम्पलेट भी बांटेगी।

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