लुण्ड्रा/अंबिकापुर। लुण्ड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत सेमरीडीह कोरवापारा के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम रहते हुए नारकीय जीवन जीने के लिए विवश हैं। एक ओर शासन-प्रशासन लाखों, करोड़ों रुपये खर्च करके विशेष संरक्षित जनजातियों के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं सेमरडीह के कोरवापारा बस्ती के लोगों की व्यथा धरातल पर इनके लिए बनी योजनाओं की पोल खोल रही है। बरसात के दिनों में सड़क व नाला नहीं रहने की वजह से इन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पुलिया नहीं होने तथा बस्ती के चारों ओर पानी से घिर जाने के कारण ये जान जोखिम में डालकर ये आवागमन करते हैं।
प्रभावित ग्राम सेमरडीह के कोरवा बस्ती के ग्रामीण रमेश कोरवा, नंदलाल कोरवा, नानू घसिया, नामसाय, करमी बाई, नहरी बाई, भईरी, फागु मंडल, बीनु कोरवा ने बताया कि पुलिया नहीं बनने के कारण बस्ती पूरे बरसात भर टापू में तब्दील हो जाता है। चारों ओर पानी से घिरे रहने के कारण बस्ती से मरीजों व गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानियों के बीच वे खाट या कंधे पर ढोकर जोखिम भरा पैदल सफर करते हैं। पुलिया का निर्माण हो जाए तो उन्हें पंगडंडी नुमा सड़क और नाला से निजात मिल जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि जनहित की मांग को शासन-प्रशासन अनसुना करेगा तो आंदोलन की राह पर जाने के लिए वे विवश होंगे। बता दें कि सरकार विशेष सुरक्षित जनजातियों के उत्थान व सुविधाओं को लेकर लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन सेमरडीह के ग्राम नवापारा बेवरा की कोरवा बस्ती में जाकर इनकी परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कार्ययोजना में शामिल, जल्द मिलेगी स्वीकृति
जनपद अध्यक्ष कृष्णा पावले ने तत्संबंध में कहा कि इस मांग को कार्ययोजना में शामिल करके जनपद से मांग पत्र भी भेज दिया गया है। निर्माण कार्य की जल्द से जल्द स्वीकृत मिलने की उम्मीद है, इसके बाद निर्माण कार्य आरंभ हो जाएगा और कोरवाओं को आवागमन में हो रही असुविधा से मुक्ति मिल जाएगी।

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