अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ के वन विभाग ने हसदेव वन की 1,742.60 हेक्टेयर भूमि को एक कोयला ब्लॉक के लिए हस्तांतरित करने की सिफारिश की है, जिसका कांग्रेस और पर्यावरणविदों ने विरोध किया है। राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को लाभ पहुंचाने वाली इस सिफारिश को केंद्रीय मंत्रालय की मंज़ूरी का इंतज़ार है। इस पर पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने छत्तीसगढ़ सरकार पर केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को अनुमति देने के लिए आंकड़ों में हेरफेर का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह कदम सरगुजा की सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ पर्वत और लेमरू हाथी प्रोजेक्ट के लिए खतरा बन गया है।

सरकार के इस कदम से पूंजीपतियो की स्वार्थपूर्ति
टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया कि सरकार ने कॉरपोरेट हितों और पूंजीपतियों के फायदे के लिए प्रकृति, आदिवासी जीवन और सांस्कृतिक विरासत को दांव पर लगा दिया। सिंहदेव ने बताया कि 2020-21 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वन विभाग के सर्वे के आधार पर पाया था कि रामगढ़ पर्वत केंटे एक्सटेंशन कोल माइंस के 10 किमी दायरे में आता है। इस खदान से ऐतिहासिक धरोहर को गंभीर नुकसान और लेमरू हाथी अभ्यारण्य के हाथियों को पलायन करना पड़ेगा, जिससे मानव-हाथी संघर्ष बढ़ेगा। इसके अलावा, खदान के लिए 4 लाख से अधिक पेड़ काटे जाएंगे, जिसे कांग्रेस सरकार ने एनओसी देने से इंकार कर दिया था।

प्राचीन धरोहरों को होगा नुकसान
टीएस सिंहदेव ने कहा कि वर्तमान सरकार, राजस्थान सरकार की आड़ में आंकड़ों में हेरफेर कर रामगढ़ पर्वत को खदान से 11 किमी दूर बताकर प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी। सिंहदेव ने कहा कि खदान शुरू होने से प्रभु श्रीराम और सीतामाता से जुड़ी सीता बेंगरा, जोगीमारा गुफा और प्राचीन नाट्यशाला पर खतरा मंडराएगा। पहले से मौजूद दो खदानों के कारण रामगढ़ पर्वत में दरारें पड़ चुकी हैं और नई खदान स्थिति को और गंभीर कर देगी।

तत्काल रद्द हो अनुमति
टीएस सिंहदेव ने कहा, खदान की अनुमति तत्काल रद्द हो, वरना हम रामगढ़ पर्वत की अडिग चट्टानों की तरह संघर्ष करेंगे। बहरहाल उनके इस बयान ने सरगुजा में खदान के खिलाफ आंदोलन की सुगबुगाहट तेज कर दी है।

टीएस सिंहदेव ने वीडियो जारी करते हुए कहा- हसदेव अरण्य छत्तीसगढ़ की अमूल्य संपत्ति है – रामगढ़ पहाड़ सरगुजा, छत्तीसगढ़ और भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और जनआस्था की एक अनमोल धरोहर है। पूंजीपतियों के स्वार्थ के लिए हम इन्हें किसी भी हालत में नष्ट नहीं होने देंगे। सरकार इस फैसले को तुरंत वापस ले, अन्यथा जनमानस के साथ मिलकर इसका पुरजोर विरोध करेंगे और सरकार को इसे रोकने पर मजबूर करेंगे।

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