वीडियो वायरल होने के बाद जिम्मेदार करेंगे कार्रवाई, पूछ रही जनता

बलरामपुर। बलरामपुर जिले में शिक्षा विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है। सरकार जहां बस्ता मुक्त स्कूल जैसी योजनाओं के जरिए बच्चों की पढ़ाई के दौरान बस्ता का बोझ कम करने की कोशिश कर रही है, वहीं स्थानीय शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी-कर्मचारी सरकार के इस उद्देश्य पर पलिता लगाते नजर आ रहे हैं।

कुसमी विकासखंड के ग्राम पंचायत करकली के प्राथमिक शाला में मासूम बच्चों से लकड़ी का वजनी बल्ली कंधों में ढुलवाने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। बड़ी और गंभीर बात यह है कि बच्चे बड़ी बलियों को कांधे पर लादकर सड़क पार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही जिला शिक्षा अधिकारी डी.एन. मिश्रा और विकासखंड शिक्षा अधिकारी रामपथ यादव की स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को दुरूष्त करने की कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो रहा है। स्कूल ड्रेस में मासूम छात्र-छात्राएं स्कूल परिसर को गोबर से लिपाई करते हुए भी दिख रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों को देखने के बाद चर्चा इस बात की हो रही है कि बच्चों को स्कूल में पढ़ाने की जगह मजदूरों की भांति काम लिया जा रहा है। शिक्षक बच्चों के जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। स्कूल में शिक्षक के मौजूदगी में चला यह कृत्य जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों की अनदेखी को सामने ला रहा है।

सूत्रों की मानें तो जब से  डी.एन. मिश्रा बलरामपुर के जिला शिक्षा अधिकारी बने हैं, तब से कुसमी विकासखंड में शिक्षा की हालत बिगड़ती जा रही है। वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी पहले भी इस विधानसभा क्षेत्र में विकासखंड शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ रह चुके हैं, जिसके कारण अधिकतर शिक्षकों से उनकी अच्छी खासी जमती है और वे किसी को कुछ बोल नहीं पाते हैं। यही वजह है कि शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही देखने को मिल रही है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी भी अपने में मस्त हैं। उच्च अधिकारियों से कथित घनिष्टता के चलते इनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने वाला नहीं है। सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जब तक ऐसे लापरवाह अधिकारी अपने पद पर बने रहेंगे, तब तक बच्चों का भविष्य अंधकारमय रहेगा।

राजनीति में ज्यादा सक्रिय हैं बीईओ
नाम नहीं छापने के शर्त पर स्थानीय लोगों ने कहा कि रामपथ यादव शिक्षा से ज्यादा राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं, इसका असर उनके कामकाज पर पड़ रहा है। स्कूलों में निरीक्षण और मॉनिटरिंग में भारी कमी देखी जा रही है, जिससे ऐसी घटना सामने आ रही हैं। देखना यह है कि शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी कब तक चुप्पी साधे रहेंगे? बच्चों से श्रम कराए जाने का जिम्मेदार कौन है? क्या दोषियों पर कोई कार्रवाई होगी, या मामला दब जाएगा?

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