सीपेज से मरीजों और उपकरणों को बचाने तिरपाल का सहारा लेना पड़ा

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के मेडिकल आईसीयू की छत में पानी के ठहराव की स्थिति बनने के बाद मरीजों और उपकरणों को बचाने के लिए तिरपाल का सहारा लिया गया है। पानी से आईसीयू में नमी और सीलन जैसी स्थिति बन गई है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। इस संवेदनशील जगह को पानी से बचाने की पहल की जानी थी, लेकिन सीजीएमएससी की हीलाहवाली से हालात में समय रहते सुधार नहीं हो पाया है, और हाल में टेंडर की बात सामने आ रही है।  

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, पिछले दिनों हुई लगातार रही बारिश के बाद मेडिकल आईसीयू की छत में जगह-जगह पानी भर गया था। छत से सीपेज होकर पानी बेड और वेंटिलेटर के पास तक न पहुंचे, इससे बचाव के लिए यह पहल की गई है। स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में आईसीयू के ऊपर तिरपाल लगवा दिया, ताकि पानी के सीपेज का प्रभाव अंदर तक न आने पाए, और मरीजों को सुरक्षित रखा जा सके।

बता दें कि, मेडिकल आईसीयू में गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं। यहां वेंटिलेटर, मॉनिटर और अन्य महंगे उपकरण लगे हुए हैं। छत से पानी टपकने से उपकरण खराब होने और शॉर्ट-सर्किट का डर भी बना रहता है। अस्पताल की सबसे संवेदनशील यूनिट की यह हालत चिंता का विषय है। करीब 3 वर्ष पूर्व यहां छत में लगे फाल्स सीलिंग भी पानी की नमी में गिर गया था, इसके बाद तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक ने भी ऊपर से शेड लगाने की जरूरत महसूस की थी।

अस्पताल के चिकित्सक भी दबे जुबां स्वीकार कर रहे हैं कि, आईसीयू जैसे वार्ड में नमी और सीलन से संक्रमण का खतरा संभावित है। ऐसे में आईसीयू वार्डों में बारिश के समय ऐसे हालात न बनें, इसके लिए स्थायी समाधान की जरूरत है। हालांकि जर्जर हो चुके पुराने अस्पताल भवन में तमाम कोशिशों के बाद भी हालिया बारिश में जगह-जगह पानी टपकने और बिजली के बोर्ड तक तर रहना सामने आ चुका है। देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या का स्थायी निदान कब तक करता है।

सीजीएमएससी ने किया है टेंडर  

आईसीयू के प्रभारी डॉ. अर्पण सिंह ने बताया कि, मेडिकल आईसीयू के छत में पानी का जमाव हो रहा था, इसे देखते हुए तिरपाल लगाया गया है। वर्तमान कलेक्टर के संज्ञान में भी इसे लाया गया है। कलेक्टर ने सीजीएमएससी को आवश्यक कार्रवाई करने कहा गया है। सीजीएमएससी के द्वारा भरी बरसात में 15 दिन पहले टेंडर की बात सामने आई है।

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