रायपुर: छत्तीसगढ़ में कभी नक्सलवाद का गढ़ रहे बस्तर और कोंडागांव को अब लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म प्रभावित जिलों की लिस्ट से हटा दिया गया है। गृह मंत्रालय ने यह फैसला लिया है। यह बदलाव तब आया है, जब पड़ोसी जिले नारायणपुर में माओवादी जनरल सेक्रेटरी बसवाराजू समेत 27 माओवादियों का सफाया कर दिया। बस्तर पिछले 25 सालों से लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म प्रभावित जिलों की लिस्ट में था। अब बस्तर और कोंडागांव को एक खास कैटेगरी में रखा गया है। पहले की तुलना में यहां माओवादी गतिविधियां बहुत कम हो गई हैं। पर अभी यहां डेवलपमेंट और सावधानी की अभी भी जरूरत है।

डिस्ट्रिक्ट्स ऑफ लेगेसी एंड थ्रस्ट
बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने बताया कि कोंडागांव और बस्तर उन 30 जिलों में शामिल हैं, जिन्हें अब डिस्ट्रिक्ट्स ऑफ़ लेगेसी एंड थ्रस्ट कैटेगरी में रखा गया है। उन्होंने कहा कि कोंडागांव और बस्तर को वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों की लिस्ट से हटा दिया गया है। लेकिन यहां विकास और सुरक्षा पर ध्यान देना होगा।

इन जिलों को भी मिली कैटेगरी
बस्तर संभाग के दूसरे जिले जैसे सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और कांकेर अभी भी ‘मोस्ट अफेक्टेड एलडब्ल्यूई डिस्ट्रिक्ट्स कैटेगरी में हैं। वहीं दंतेवाड़ा अदर वामपंथी उग्रवाद डिस्ट्रिक्ट्स में शामिल है। धमतरी, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और राजनांदगांव को भी ‘लेगेसी एंड थ्रस्ट डिस्ट्रिक्ट्स’ कैटेगरी में रखा गया है।

चुनावों में वोटिंग प्रतिशत भी रहा अच्छा
2023 के विधानसभा चुनावों में दोनों जिलों में अच्छी वोटिंग हुई थी। बस्तर में 84.6% और कोंडागांव में 81.7% वोट पड़े थे। गृह मंत्रालय ने हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें देश के 18 जिलों को ‘वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित’, ‘अन्य वामपंथी उग्रवाद प्रभावित’ या ‘चिंता वाले जिले’ के रूप में पहचाना गया है। इनमें छत्तीसगढ़ के छह जिले शामिल हैं।

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