उच्च न्यायालय में दायर रिट पिटीसन में पारित आदेशानुसार पशु पालकों को कड़ी हिदायत
अंबिकापुर। उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने दायर रिट पिटीसन में पारित आदेश दिनांक 08.07.24 के परिपालन में पशुओं को सड़क पर आने से रोकने के संबंध में कड़ी हिदायत दी है। इसके तहत जिले के सभी पशु मालिक अपने पशुओं को बांधकर रखेंगे, जिससे पशुओं के सड़क पर आवाजाही पर नियंत्रण लग सके। पशुओं को मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्वतंत्र रूप से न ही छोड़ेगें न ही एकत्रित होने देंगे, अन्यथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा-285, 291 के अंतर्गत सजा एवं जुर्माना से पशु पालकों को दण्डित किया जाएगा। साथ ही पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के अध्याय 3 धारा-11 (1) तथा अन्य सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि पालतू पशुओं को सड़क पर छोड़ने से आम जनों को होने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा प्राप्त निर्देशों के तहत समय-समय पर निर्देश जारी किए गए हैं, साथ ही इस हेतु मानक संचाल प्रक्रिया जारी किया गया है। किन्तु जिले के पशु पालकों द्वारा अपने पाल्य पशुओं का ठीक से पालन एवं देख-रेख न करते हुए आवारा छोड़ दिया जा रहा है। हाल में लगभग 8 की संख्या में गाय एनएच क्रमांक 130 पर आवारा छोड़ दिए गए थे, जिनकी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई, यह स्थिति चिंतनीय है। बरसात के दिनों में चारों तरफ किसान फसल उगाते हैं। फलस्वरूप पाल्य पशु चारागाह की कमी के कारण मुख्य सड़कों पर आ जाते हैं, और सड़क किनारे उगे चारा को चरने के लिए बाध्य होते हैं। सड़कों पर आवारा मवेशियों के चलते-फिरते रहने से दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है, और जनधन की हानि होती है। पूर्व प्रसारित निर्देशानुसार जिला स्तर और ग्राम स्तर पर पशुओं के नियंत्रण हेतु समिति का गठन करके आवारा पशुओं की सड़क पर आवाजाही रोकने एवं नियंत्रण लगाने हेतु लेख किया गया था, इसके पश्चात भी दुर्घटना घटित हो रही है। इसका मुख्य कारण पशु पालकों द्वारा लापरवाही और गैर जिम्मेदारी पूर्वक पशुओं को सड़क एवं सार्वजनिक स्थल पर स्वतंत्र रूप से छोड़ देना है। पशु मालिकों का इस प्रकार गैर जिम्मेदारना एवं लापरवाही पूर्वक आचरण भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा-291 के अंतर्गत तथा पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के अध्याय-3, धारा-11 (1) के अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
पशुओं को स्वतंत्र रूप से छोड़ने से रोकना आवश्यक-एसपी
फोटो-राजेश अग्रवाल एसपी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल से प्राप्त प्रस्ताव अनुसार उपरोक्त वर्णित तथ्यों के प्रकाश में सभी तथ्यों पर विचार करने के उपरांत इस क्षेत्र में मानव/पशु जीवन, लोकहित, लोक सुरक्षा, कानून एवं लोक शांति वयवस्था बनाए रखने के लिए पशु मालिकों द्वारा अपने पालतू पशुओं को स्वतंत्र रूप से छोड़ने से रोका जाना आवश्यक हो गया है। पुलिस अधीक्षक ने कहा है कि पशु पालकों के द्वारा छोड़े गए पशुओं से मार्ग अवरूद्ध न हो एवं जन सामान्य, पशुओं की सुरक्षा तथा सुविधा के साथ-साथ आपातकालीन एवं अत्यावश्यक सेवा निर्बाध व शांतिपूर्ण ढंग से संचालन हो, इसे देखते हुए कानून व्यवस्था की दृष्टि से प्रत्येक अनुभाग स्तर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 के अंतर्गत प्रतिबंधित किए जाने हेतु सभी अनुविभाग में तत्संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं।
पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई
जिले के सभी पशु मालिक अपने पशुओं को बांधकर रखेंगें। पशुओं को मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्वतंत्र रूप से नहीं छोड़ेंगे और न ही एकत्रित होने देंगें, अन्यथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा-285, 291 के अंतर्गत सजा एवं जुर्माना से दण्डित किया जाएगा, साथ ही पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के अध्याय 3 धारा-11 (1) तथा अन्य सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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