नई दिल्ली: बिहार के नालंदा जिले में एक खूबसूरत गांव है गोपालबाद। इसी गांव के रहने वाले और किसान परिवार में जन्मे एक नौजवान ने जब 12वीं की परीक्षा पास की, तो डिजाइनिंग के क्षेत्र में जाने का मन बनाया। उसने एक जाने-माने संस्थान से टेक्सटाइल डिजाइनिंग की डिग्री हासिल की। लेकिन, इसके बाद उसने अपने कदम यूपीएससी परीक्षा की तरफ बढ़ा दिए। लक्ष्य कठिन था, पर उसे जिद थी प्रशासनिक अफसर बनने की। नतीजा ये हुआ कि उसे एक नहीं, बल्कि तीन-तीन बार असफलता का सामना करना पड़ा।

फिर भी उसने हार नहीं मानी और दो साल के भीतर बैक-टू-बैक दो बार अफसर बन गया। इस नौजवान का नाम है अभिषेक कुमार, जो इस समय भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में अधिकारी हैं। अभिषेक एक ऐसे अफसर हैं, जो डिजाइनिंग के क्षेत्र से सिविल सेवा में आए और इसके लिए उन्हें कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, उनका सफर काबिले तारीफ है।

अफगानिस्तान में नौकरी करने जा रहे मुमताज अंसारी 11 रुपये गुरु दक्षिणा देकर कैसे बने पुलिस इंस्पेक्टर?

एक सामान्य किसान परिवार से आने वाले अभिषेक के परिवार में माता-पिता के अलावा तीन भाई-बहन हैं। गांव के ही प्राइमरी स्कूल से शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद अभिषेक ने नवोदय विद्यालय से 12वीं की और इसके बाद गुजरात के अहमदाबाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) से टेक्सटाइल डिजाइनिंग में डिग्री हासिल की। यहां उनके सामने प्लेसमेंट के जरिए प्राइवेट नौकरी के काफी मौके थे, लेकिन अभिषेक ने सिविल सर्विस में जाने का मन बनाया।

दो असफलताओं के बाद लिया ब्रेक
टेक्सटाइल डिजाइनिंग के तुरंत बाद अभिषेक ने तैयारी शुरू कर दी थी। इंडियन मास्टरमाइंड्स के मुताबिक, उन्होंने 2019 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन वह प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सके। 2020 में अपने दूसरे प्रयास में, वह इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे, लेकिन इस बार फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सके। लगातार दो असफलताओं को झेलने के बाद अभिषेक ने रणनीति बदलने पर विचार किया और 2021 में एक साल का ब्रेक ले लिया।

बीडीओ बने, लेकिन दे दिया इस्तीफा
इस बीच, साल 2022 में उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा भी दी और इसमें उन्हें 369वीं रैंक हासिल हुई। अभिषेक ने ब्लॉक डेवलेपमेंट अधिकारी (बीडीओ) के पद पर जॉइन कर लिया, लेकिन कुछ वक्त बाद इस्तीफा देकर सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए। अब उन्होंने अपना पूरा फोकस पढ़ाई के तरीकों को बदलने और आंसर लिखने की प्रैक्टिस पर लगाया।

1 नंबर की चूक और 620वीं रैंक
2022 में अभिषेक ने अपना तीसरा प्रयास किया, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। इस बार वह केवल एक नंबर से चूक गए। हालांकि, उन्हें अपनी तैयारी पर भरोसा था। नए सिरे से पूरी शिद्दत के साथ उन्होंने 2023 में अपना चौथा प्रयास किया और आखिरकार उन्हें सफलता मिल ही गई। अभिषेक ने अपने चौथे प्रयास में 620वीं रैंक हासिल की और उन्हें भारतीय राजस्व सेवा के लिए चुना गया। इसी साल दिसंबर के महीने में उनकी ट्रेनिंग शुरू होने जा रही है।

मंजिल पर पहुंचने के वो चार साल
अभिषेक बताते हैं कि उनकी यात्रा लंबी थी और मंजिल को पाने में चार प्रयास लगे। इस बीच कई उतार-चढ़ाव भी आए। अपने अलग बैकग्राउंड के कारण उन्हें कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। आमतौर पर, लोग इंजीनियरिंग या आर्ट्स में पढ़ाई करने के बाद सिविल सेवा में आते हैं, लेकिन अभिषेक डिजाइनिंग के क्षेत्र से थे, जो अपने आप में दुर्लभ था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और मजबूत इच्छा शक्ति के जरिए कामयाबी हासिल की।

Categorized in: