थाना प्रभारी एसईसीएल प्रबंधन को समय-समय पर पत्र लिखकर करा रहे आगाह

भटगांव। एसईसीएल भटगांव में बंद कोयला खदान कोयला चोरी का गढ़ बन गया है। यहां से प्रतिदिन सैकड़ों मीट्रिक टन कोयले की निकासी की जाती है। जिस प्रकार कंपनी अंडरग्राउंड कोयला खदान खोलती है, ठीक उसी प्रकार चोर ओसीएम के बंद खदान में सुरंग बनाकर अंदर ही अंदर अंडग्राउंड खदान खोलकर कई पिलर के साथ सुरंग बना डाले हैं। यहां कूपनुमा गड्ढा खोदकर कोयला निकाला जाता है। चोरों के द्वारा बनाए गए सुरंग में कभी भी जान-माल की हानि हो सकती है। समय-समय पर अवैध खनन रोकने के लिए पुलिस अभियान चलाती है मगर आज तक किसी की गिरफ्तारी नहीं होने से बिना भय के यह कार्य लगातार चल रहा है। इस खदान से निकाले गए कोयले को साइकिल व मोटरसाइकिल में लादकर दूरदराज के इलाकों में बेचा जाता है। अवैध कोयले की दुलाई इस कदर बढ़ गई है कि सड़क पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इस धंधे में पुलिस से लेकर छोटी-मोटी कुछ हस्तियों के शामिल होने की बात भी सार्वजनिक हो रही है।

बता दें कि एसईसीएल की खदानों की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ और एसईसीएल के सुरक्षा गार्ड के जवानों को भी तैनात किया गया है। इसके बाद भी खदानों में चोरी की घटनाए नहीं रुक रही हंै। बंद पड़े ओसीएम कोयला खदान के चट्टानों में सुरंग बनाकर कोयले का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इस स्थान से चंद कदम पर सीआईसएफ कंैप बना हुआ है, जहां कोयला कंपनी के द्वारा करोड़ों रुपये इन जवानों पर खर्च किया जाता है। अवैध सुरंग की जानकारी इन जवानों को नहीं होगा, यह कहना बेइमानी होगी। कोयला चोरी से कंपनी को रोजाना लाखों रुपये की क्षति पहुंच रही है। बंद खदानों से कोयले का अवैध उत्खनन करने के कारण दर्जनों जान चली गई। अगर सुरंग के बीच एक भी पिलर धंसा तो चट्टान गिरने की स्थिति बन सकती है। डेढ़ साल पहले यहां कोयला चोरी के दौरान खदान धसकने से दो लोगों की मौत हो चुकी है। घटना के बाद सुरंग को बंद कराया गया था, लेकिन चोरों ने दीवार तोड़कर फिर चोरी शुरू कर दी। कई सुरंगें ऐसी है कि बाइक तक घुस जाए। पुलिस प्रशासन ऐसे कारोबार पर अंकुश लगाने लगतार रात में पेट्रोलिंग करती है। इसके लिए दिशा-निर्देश बीच-बीच में जिला प्रशासन द्वारा दिया जाता है। लगातार पुलिस पेट्रोलिंग के बाद भी ऐसे कार्यों पर रोक न लग पाना संदेहजनक है। पुलिस स्वयं कार्रवाई के बजाय एसईसीएल को चोरी रोकने पत्र लिखते आ रही है, जबकि चोर सैकड़ों बाइक से कोयला ढोकर निकल ले रहे हैं। ऐसे में चर्चा हर बाइक से दो हजार रुपये महीना वसूलने की भी हो रही है। इस कारोबार में दर्जनों गांवों के लोग शामिल हैं। कुछ लोग चोरी करते-करते चोरों के ठेकेदार बन गए और अब मजदूर लगाकर चोरी करवा रहे हैं। कोयला चुराने के एवज में चार से पांच सौ रुपये रोजाना की मजदूरी पाने वाले भी इस काम में शामिल हैं। यह कोयला ईंट भ_ों में दो रुपये किलो बिक जाता है।

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