स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा असर, कर्तव्य पथ पर प्राण गंवाए साथियों को दी भावभीनी श्रद्धांजलि फोटो-
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के बैनर तले स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इसके पहले इन्होंने जिला व प्रदेश स्तरीय धरना-प्रदर्शन करके अपनी मांगों की ओर शासन का ध्यानाकर्षण कराया था, लेकिन किसी प्रकार का सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला। इसके बाद सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल का आगाज करते हुए एनएचएम के कर्मचारी शहर के एसबीआई कलेक्टोरेट ब्रांच के सामने हड़ताल पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से की गई, इसमें बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारियों की उपस्थिति रही। हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, मरीजों को इलाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं जिम्मेदार स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन का दावा कर रहे हैं।
एनएचएम कर्मचारी संघ की अध्यक्ष शिल्पी राय, एनएचएम कर्मचारी संघ के कोषाध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने कहा कि वे हड़ताल के पक्षधर नहीं हैं। इसके पहले उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित कराने के लिए दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया था। रायपुर में विधानसभा घेराव करके अपनी मांगों के प्रति सरकार को आगाह कराया, और 15 अगस्त तक मांग पूर्ति का अल्टीमेटम दिया था। इसके बाद उम्मीद थी कि सरकार उनकी परेशानियों को समझते हुए ठोस निर्णय लेगी, लेकिन अभी तक उनकी मांगों के प्रति सरकार की संवेदना जागृत नहीं हुई है, जिस कारण स्वास्थ्य कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल की ओर अग्रसर हो गए हैं। एनएचएम के कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं, और सरकार सिर्फ आश्वासन देने की खानापूर्ति कर रही है। एनएचएम के कर्मचारी संजय श्रीवास्तव, मनीष तिवारी, प्रवीण राय, शंखा राम, यशवंत खूंटे ने कहा स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हो और कर्मचारी अपने काम पर वापस लौट जाएं, इसे देखते हुए सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कोरोनाकाल में सरकार ने कहा कोरोना योद्धा
एनएचएम कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि सरगुजा जिले में एनएचएम के 630 कर्मचारी सेवा दे रहे हैं, वहीं प्रदेशभर में इन कर्मचारियों की संख्या 16 हजार है। कोरानाकाल की विभाषिका से निपटने में भी उनका योगदान रहा है। इसके बाद भी उनकी मांगों के प्रति उपेक्षा बरकरार है। कोरोनाकाल के समय जब वे जान पर खेलकर अपनी सेवा दे रहे थे, तो सरकार ने उन्हें कोरोना योद्धा कहा। कई साथी सेवा देते दिवंगत हो गए, विडम्बना यह है कि अनुकम्पा नीति के अभाव में इनके परिवार की सुध लेने की जरूरत सरकार ने महसूस नहीं की। इनकी मांगों में संविलियन एवं स्थायीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, ग्रेड पे का निर्धारण, कार्य मूल्यांकन व्यवस्था में पारदर्शिता, 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि, नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण, अनुकम्पा नियुक्ति, मेडिकल एवं अन्य अवकाश सुविधा, स्थानांतरण नीति व न्यूनतम 10 लाख कैसलेश चिकित्सा बीमा शामिल हैं।
चुनावी घोषणा, मोदी का गारंटी कहां गई
एनएचएम अंतर्गत कार्यरत चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, एमपीडब्ल्यू, लैब टेक्निशियन सहित अन्य संवर्ग के कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांग 20 वर्ष पुरानी है। चुनावी घोषणा और मोदी की गारंटी में उनकी समस्याओं के समाधान का किया गया वायदा पूरा नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, वित्त मंत्री सहित अन्य मंत्रियों, सांसदों, विधायकों व उच्चाधिकारियों के पास 150 बार से अधिक आवेदन दिया गया, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और वार्ता की गई, आश्वासन के बाद भी ठोस सुनवाई नहीं हुई। मणिपुर राज्य में एनएचएम के कर्मचारी नियमित हो गए, बिहार राज्य पब्लिक हेल्थ कैडर को स्वीकार किया गया, मध्य प्रदेश में समान काम-समान वेतन, पे स्कूल, अनुकम्पा नियुक्ति, नई पेंशन स्कीम, जॉब सुरक्षा, नियमित पदों पर 50 प्रतिशत आरक्षण जैसी सुविधा दी जा रही हैं, परंतु छत्तीसगढ़ में एनएचएम के कर्मचारियों की सामाजिक, आर्थिक सुरक्षा अधर में है।
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा बड़ा असर
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के बैनर तले सोमवार से जिले के 600 से अधिक स्वास्थ्य कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल के पहले ही दिन जिला मुख्यालय के साप्ताहिक बाजार में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
संघ के अध्यक्ष गुलाब डहरिया ने बताया कि कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर पूर्व में भी आंदोलन किया था। उस समय सरकार ने उन्हें 15 अगस्त तक मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन वादा को पूरा नहीं किए जाने के कारण कर्मचारियों ने मजबूर होकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल पर जाने से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। एसएनसीयू, वार्ड, ब्लड बैंक, पैथोलॉजी लैब जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं बाधित हो रही हैं। आंदोलनकारी स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन के दौरान एनएचएम कर्मचारियों ने कोविड-19 महामारी के दौरान कर्तव्य पथ पर प्राण गंवाए स्वास्थ्य कर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कर्मचारियों ने कहा कि जिन साथियों ने अपनी जान गंवाई, उनकी स्मृति और बलिदान ही उनके आंदोलन की सबसे बड़ी प्रेरणा है।

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