गिरिजा ठाकुर 

अंबिकापुर। माइक्रोफाइनेंस कंपनी से लोन लेने के बाद अदायगी के लिए बन रहे दबाव को वृद्ध बर्दास्त नहीं कर पाया और कीटनाशक का सेवन करके जान दे दिया। मामले में मर्ग कायम करके पुलिस अग्रिम जांच, कार्रवाई में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक गांधीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम डिगमा का बुजुर्ग घरभरन बरगाह माइक्रोफाइनेंस कंपनी से लोन लिया था। कुछ राशि की अदायगी करने के बाद आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह कुछ महीने से लोन का किस्त नहीं पटा पा रहा था। माइक्रोफाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंट आए दिन उसे लोन की राशि पटाने के लिए दबाव बना रहे थे। मृतक के पुत्र आकाश और पत्नी का कहना है कि उनके पास लोन का रकम पटाने के लिए रायपुर से नोटिस आया था, इसके बाद वे स्थानीय माइक्रोफाइनेंस कार्यालय में जाकर साहब से मिले, तो उन्होंने कहा कि लोन का राशि जमा कर दोगे तो रायपुर नहीं जाना पड़ेगा।

जब उन्होंने कहा कि कमाकर लोन पटा देंगे तो वे नहीं माने और रुपये जमा नहीं करने की स्थिति में रायपुर जाने के लिए कहा। इसके बाद वे वापस घर आ गए थे। सोमवार को हो रही बारिश के बीच वृद्ध घर से निकला और शराब पीकर घर आया था, इसके बाद साथ में लाए जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। इसकी जानकारी मिलने पर स्वजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। डिगमा के ही सुरेश कुमार गोलकर ने बताया कि वृद्ध कई बार उन्हें आकर बताता था कि वह माइक्रोफाइनेंस कंपनी से लोन लिया है, जिसे पटा नहीं पा रहा है।  फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी उस पर रुपये अदा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। अपनी परेशानी बताते हुए वह थाना ले चलने के लिए कहा था। दो दिन पहले नशे के हालत में वृद्ध मिला और कहा कि लोन के कारण वह बर्बाद हो गया। सुरेश का कहना है कि माइक्रोफाइनेंस कंपनियां मनमाने ब्याज दर पर भोले-भाले ग्रामीणों को कर्ज देने के बाद उन पर रकम अदा करने के लिए दबाव बनाती हैं, इसका परिणाम वृद्ध के द्वारा की गई खुदकुशी के रूप में सामने है। प्रशासन को ऐसी कंपनियों पर लगाम कसना चाहिए ताकि कर्ज के दलदल में फंसकर कोई आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाए। गांधीनगर थाना प्रभारी प्रदीप जायसवाल ने जांच के बाद मामले में कार्रवाई की बात कही है।

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