पूर्व में सेवानिवृत कर्मचारियों के साथ 12 हो चुके हैं गिरफ्तार

अंबिकापुर। जिला केंद्रीय सहकारी बैंक, सरगुजा के ब्रांचों में करोड़ों के घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुरू कर दी है। ईडी ने बैंक घोटाले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को रायपुर मंगाया था, इसके बाद अंबिकापुर से फाइल रायपुर भेज दी गई है। मामले में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के शंकरगढ़ और कुसमी ब्रांचों से 28 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफास हुआ था, और 12 आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था, इनमें सेवानिवृत हो चुके तीन कर्मचारी भी शामिल हैं।

बता दें कि जिला केंद्रीय सहकारी बैंक में हुए बड़े घोटाले में बैंक के तत्कालीन प्राधिकृत अधिकारी व सरगुजा कलेक्टर विलास भोस्कर ने सहकारी बैंक कुसमी एवं शंकरगढ़ के बैंक ब्रांचों के खातों के लेन-देन की जांच कराई तो 28 करोड़ रुपये की गड़बड़ी पाई गई। मामले में बैंक मैनेजर सहित 12 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी, और इनकी गिरफ्तारी भी की गई थी। तत्कालीन सरगुजा कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के घोटालों की जांच ईडी या सीबीआई से कराने की अनुशंसा करते हुए प्रमुख सचिव को पत्र भेजा था। इसके बाद राज्य शासन ने जांच के लिए ईडी को पत्र भेजा, जिस पर ईडी ने जांच के लिए मंजूरी दे दी है। सहकारी बैंक के सीईओ श्रीकांत चंद्राकर ने बताया कि ईडी की टीम सरगुजा नहीं आई है। उनका पत्र आया था और घोटाले की जांच से संबंधित सभी रिपोर्ट मांगी गई थी। सरगुजा से जांच रिपोर्ट ईडी को शनिवार को ही भेज दी गई है। ईडी मामले में जो अन्य जानकारी मांगेगी, भेजा जाएगा।

ऑडिट में 28 करोड़ का घोटाला आया सामने

सहकारी बैंक के कुसमी एवं शंकरगढ़ ब्रांच के बैंक के खातों का वर्ष 2012 से 2024 तक के ऑडिट में 28 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया था। घोटाले के मुख्य आरोपी शंकरगढ़ के शाखा प्रबंधक अशोक कुमार सोनी, इन शाखाओं में 10 साल तक पदस्थ रहे। उन्होंने बैंक में फर्जी खाते खोले। समितियों के खातों और फर्जी खातों के साथ ही बैंक के खाते से बड़ी रकम का नकद आहरण किया गया, ऑनलाइन रकम ट्रांसफर किया गया।

बिना किसी दस्तावेज के खुला बैंक खाता

आदिम जाति सहकारी समिति जमड़ी का बैंक अकाउंट बिना किसी दस्तावेज के खोला गया, इसमें 19 करोड़ 24 लाख रुपये जमा किए गए और इस खाते से 19 करोड़ 22 लाख 73 हजार रुपये का आहरण किया गया। यह राशि किसानों के खाते, पंचायतों के खातों से ट्रांसफर कर जमा की गई थी। जमुना अलंकार मंदिर अंबिकापुर के नाम पर आरटीजीएस के माध्यम से एक करोड़ 82 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। यह राशि 52 ट्रांजेक्शन में भेजी गई है, जिनमें से 44 का बैंक व्हाउचर नहीं मिला। शाखा कुसमी में नरेगा धनेशपुर का बोगस अकाउंट खोला गया और इसमें 3 करोड़ 19 लाख रुपये का ट्रांजेक्शन किया गया। सीईओ जनपद पंचायत शंकरगढ़ का बोगस अकाउंट खोला गया। इसमें 91 लाख 57 हजार रुपये की राशि जमा कर इसे निकाल लिया गया। जनपद सीईओ ने प्रतिवेदन में बताया कि यह खाता जनपद पंचायत का नहीं है। इसमें किसानों के खातों से राशि जमा की गई। जांच में पता चला है कि, अशोक कुमार सोनी के खाते में 1 करोड़ 36 लाख रुपये, कंप्यूटर ऑपरेटर प्रकाश कुमार सिंह के खाते में 4 लाख 64 हजार रुपये, महामाया कंस्ट्रक्शन कंपनी के खाते में 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

बड़े स्तर पर बैंक में गड़बड़ी की होगी जांच

मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। घोटाले में शामिल ब्रांच मैनेजर सहित 4 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। तीन कर्मचारी घोटाला उजागर होने के पूर्व ही सेवानिवृत हो चुके थे। जांच में ईडी के शािमल होने के बाद घोटाले से जुड़े अन्य तथ्य भी सामने आएंगे। बताया गया है कि यह जांच सिर्फ दो बैंकों में हुए घोटालों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े स्तर पर बैंक में गड़बड़ी की जांच होगी।

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