महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बालगृह में रहते हैं 05 से 14 वर्ष के बच्चे  

अंबिकापुर। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सन्मार्ग बालगृह राघवपुरी में रहने वाले अनाथ बच्चों के द्वारा चोरी का वाक्या सामने आया है। आए दिन छोटी दुकानदारी करने वाले दुकानों के संचालक आए दिन होने वाली चोरियों से परेशान थे। पुलिस तक मामला ले जाने के बाद भी चोरों का सुराग नहीं लग पा रहा था। दुकान संचालकों का कहना है कि जिस प्रकार चोरी की आए दिन घटनाएं हो रही थी, इसे देखते हुए उन्हें अंदेशा था कि घटना में कम उम्र के बच्चे शामिल हैं। चोरी की घटना से परेशान होकर एक दुकानदार ने सीसीटीवी कैमरा भी लगवाया था, जिससे बच्चों की करतूत का पर्दाफास हो पाया। इन बच्चों को चोरी करने के लिए कौन प्रेरित कर रहा था, दुकान में चोरी करने के लिए औजार इन्हें कौन उपलब्ध कराया, बालगृह से ये बच्चे देर रात कैसे चोरी करने के लिए निकल रहे थे, चोरी का सामान बच्चे कहां खपा रहे थे, ऐसे कई अनसुलझे सवालों का जवाब फिलहाल नहीं मिल पाया है।

जानकारी के मुताबिक महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सन्मार्ग बालगृह में पांच से 14 वर्ष के ऐसे बच्चों को रखा जाता है, जो अनाथ जीवन यापन करते हैं। इनके लिए यहां ठहरने, खाने-पीने सहित जरूरत की हर आवश्यकताओं की पूर्ति की जाती है। लंबे समय से इस बालगृह का शासन की ओर से संचालन किया जा रहा है। इसके बाद भी बालगृह के बच्चे किस दिशा में आगे कदम बढ़ा रहे हैं, इससे प्रबंधन का बेखबर रहना समझ से परे है। बालगृह के दो बच्चों के चोरी की वारदात में शामिल होने की घटना प्रकाश में आने के बाद यहां की लचर व्यवस्था सामने आई है। इसे लेकर क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है और वे बच्चों को चोरी करने के लिए प्रेरित करने जैसा आरोप लगाने से भी नहीं चूक रहे हैं। बहरहाल मामला पुलिस तक पहुंच चुका है, पुलिस इस बात की तस्दीक करने में लगी है कि बालगृह से बच्चे कैसे बाहर निकलते थे और चोरी किए गए सामानों को कहां खपाते थे। घटना के सामने आने के बाद बालगृह प्रबंधन की भूमिका पर भी उंगली उठ रही है।

वार्ड पंच के दुकान में सात बार हुई चोरी
वार्ड पंच संतोषी विश्वकर्मा ने बताया कि उनकी रोड के किनारे गुमटी में दुकान है। उनके दुकान में पहली बार तीन जनवरी को घटना हुई थी, इसके बाद सात बार चोरी की वारदात हो चुकी है। उन्होंने बताया कि बच्चों ने केंद्रीय विद्यालय के पास कृष्णा सोनी के यहां भी दो बार चोरी करना बताया। इन्हें रातभर अपनी निगरानी में रखने के बाद उन्होंने इसकी जानकारी बालगृह प्रबंधन व पुलिस को दी। पंच संतोषी का कहना था आश्रम प्रबंधन के संज्ञान में बात लाने पर उन्होंने कम्प्रोमाइज करने की बात कह डाली। सवाल यह उठ रहा है कि बच्चों को देर रात बालगृह से बाहर किसके इशारे पर भेजा जा रहा है। कम्प्रोमाइज के लिए प्रेरित करना कहीं न कहीं बालगृह प्रबंधन की भूमिका को सवालों के घेरे में ला रहा है।

सीसीटीवी में देर रात हलचल देख पहुंचे दुकान
मंगलवार की रात बालगृह के बच्चे आशीष सोनी के दुकान में चोरी करने की नीयत से पहुंचे थे। इनके दुकान में सीसीटीवी लगा हुआ है। बच्चे सीसीटीवी को घुमा रहे थे। सीसीटीवी के कारण अभी तक इनका दुकान सुरक्षित था। मंगलवार को देर रात आशीष जब सीसीटीवी कैमरा चेक किए तो उन्हें रात एक से सवा एक बजे के बीच दुकान के आसपास कुछ हलचल होने का आभास हुआ। वे अपने भाई के साथ दुकान के पास पहुंचे तो दो बच्चे पाना, पेचकस लेकर चोरी करने के लिए जुगाड़ बनाने में लगे थे। बच्चों को पकड़कर लाए, तो उन्होंने बताया कि वे आश्रम में रहते हैं। आशीष ने बताया कि लगभग डेढ़ साल से इलाके में चोरी की वारदात हो रही है। इसे देखते हुए ही उन्होंने अपने दुकान में कैमरा लगवाया था।

शिक्षा-संस्कार की जगह गलत राह में जाना चिंतनीय
अजिरमा निवासी दुकानदार शमा परवीन व उमाकांत विश्वकर्मा का कहना है कि राघवपुरी आश्रम से लगी गुमटियां लंबे समय से चोरों के निशाने पर है। बच्चों के पास ताला तोड़ने, काटने के लिए औजार के अलावा तम्बाकू का पैकेट मिलना बालगृह प्रबंधन की लापरवाही को सामने ला रहा है। यहां के बच्चों का शिक्षा और संस्कार की जगह चोरी जैसी वारदात में शामिल होना चिंतनीय है। बच्चे स्कूल जाते हैं, बालगृह वापस आते हैं, इसके बाद देर रात चोरी करने कैसे निकल जाते हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा बालगृह में छोटे बच्चों के रहने के कारण इन्हें अकेले नहीं छोड़ा जाता होगा। रात में किसी न किसी की ड्यूटी जरूर लगती होगी। शमा परवीन ने कहा बच्चे अगर चोरी की ओर अग्रसर हो रहे हैं, तो इसके पीछे किसी न किसी बड़े का डायरेक्शन होगा। ताला-कराकट को काटकर चोरी की घटना को अंजाम देना सामान्य बात नहीं है।

रोशनदान से निकलते, तड़के 4 बजे वापस आ जाते  
बच्चों की मानें तो ये बालगृह के चाभी का गुच्छा लेकर चार-पांच नंबर कक्ष का ताला खोलते थे और रोशनदान से बाहर रात 10 बजे चोरी करने के लिए निकल जाते थे। ऐसे में रात में बालगृह में बच्चों की देखरेख के लिए किसी चौकीदार के नहीं रहने जैसी बातों को बल मिल रहा है। बच्चों ने पकड़ में आने के बाद वहां मौजूद लोगों को बताया कि चोरी के बाद वे अलसुबह चार बजे बालगृह में पहुंच जाते थे। बता दें कि सन्मार्ग बालगृह की स्थिति बदहाल है, जिसके सुधार की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। रोशनदान की जालियां टूटी हैं, जिससे बच्चे आसानी से बाहर आ सकते हैं। गार्ड व चौकीदार का नहीं रहना भी प्रबंधन की कमी वहीं विभाग के जिम्मेदारों की मॉनीटरिंग का अभाव को सामने ला रहा है।

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