बिरजिया समाज के विकास के लिए कागजों में भी जगह नहीं
बलरामपुर। जिले में बिरजिया समाज के लोग जिंदगी और मौत के बीच कई पीढ़ी से जीवन-यापन कर रहे हैं। शासकीय योजनाओं के संचालन के बीच इस गांव की हकीकत कुछ और ही है। बुजुर्गों के मुरझाए चेहरे विकास को निहार रहे हैं।
जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत लक्ष्मणपुर अंतर्गत बालापानी के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि विकास क्या होता है, हमने नहीं देखा। गांव के बच्चे शिक्षा की तलाश में प्रतिदिन घने जंगलों से होकर स्कूल जाते हैं। यह रास्ता न केवल कठिन है, बल्कि जंगली जानवरों का भी खतरा हमेशा मंडराता रहता है। शाम ढलते ही बच्चों और महिलाओं के लिए यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। महिलाओं ने बताया कि गांव में मितानिन की सेवाएं कभी नहीं मिलती। अगर किसी महिला का प्रसव होना हो तो गांव में ही दाई के सहारे प्रसव कराया जाता है, क्योंकि इन्हें ले जाने के लिए गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाएगा। ज्यादा स्वास्थ्य खराब होने पर झेलगी के सहारे पक्की सड़क तक ले जाना पड़ता है। बच्चों की तबीयत खराब हो तो देखने वाला कोई नहीं है। गांव में न स्वास्थ्य सुविधा है, न ही नियमित देखरेख होता है।
ढोढ़ी का पी रहे पानी, सड़क नहीं
गांव में पानी की समस्या गंभीर है। महिलाएं जंगल किनारे बने ढोढ़ी से पानी लाती हैं। गंदा पानी मजबूरी में इन्हें छानकर पीना पड़ता है। बारिश के दिनों में पानी और ज्यादा गंदा हो जाता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को बीमारियों का सामना करना पड़ता है। गांव तक सड़क पहुंचाने का काम शुरू हुआ, लेकिन अधूरा ही रह गया। ग्रामीणों की मांग है कि सड़क को पूर्ण रूप से बनाया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और बीमारों के लिए गांव तक एम्बुलेंस पहुंच सके।
जमीन के रिकार्ड में छेड़खानी
ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव काफी पिछड़ा है। जिला मुख्यालय सहित विकासखंड कार्यालय जाने के लिए काफी दूरी तय करनी पड़ती है, जिसका फायदा उठाकर कुछ दबंग उनके जमीन के रिकॉर्ड के साथ छेड़खानी कर रहे हैं। जिम्मेदारों को इसकी जानकारी है, बावजूद इनकी आंख बंद है।
आदिवासी समाज के अध्यक्ष पहुंचे बाला पानी
छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजुर समाज के पदाधिकारियों महिमा कुजूर, तारा नाग के साथ बालापानी पहुंचे और बिरजिया समाज के लोगों से मुलाकात करके शासन व जिला प्रशासन की विकास कार्य के प्रति अनदेखी पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा प्रशासनिक रिकॉर्ड में विकास दर्ज है लेकिन धरातल में कोसों दूर है। बीहड़ जंगल में रहने वाले बिरजिया समाज के लोग सड़क बिजली पानी, स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

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