सरगुजा जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले रामगढ़ पर्वत के अध्ययन के लिए भाजपा का अध्ययन दल गुरुवार को रामगढ़ पहुंचा। रामगढ़ पर्वत अध्ययन दल ने प्राचीनतम नाट्यशाला, रामगढ़ पर्वत के उपर बने जोगीमाड़ा पहुंचकर स्थिति देखी। दल के संयोजक पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि खदान से रामगढ़ पर्वत को कोई खतरा नहीं है। रामगढ़ पर्वत को लेकर टीएस सिंहदेव राजनीति कर रहे हैं।
भाजपा के रामगढ़ पर्वत अध्ययन समिति के संयोजक शिवरतन शर्मा, सदस्य विधायक रेणुका सिंह एवं भाजपा महामंत्री अखिलेश सोनी गुरुवार को रामगढ़ पहुंचे। उनके साथ पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल एवं रामगढ़ संरक्षण व संवर्धन समिति के सदस्य भी शामिल थे। दल ने रामगढ़ के 650 सीढ़ियों की चढ़ाई की एवं प्राचीन राम मंदिर तक पहुंचे। रामगढ़ पहाड़ में स्थानीय लोगों से समिति के सदस्यों एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बातचीत की।

भाजपा की समिति के सदस्यों ने प्राचीन नाट्यशाला (सीता बेंगरा) पहाड़ के उपर स्थिति जोगीमाड़ा एवं रास्ते का निरीक्षण किया। समिति के संयोजक पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार है और भाजपा की सरकार के रहते कोई धार्मिक स्थल, पुरातत्व महत्व का स्थल संकट में नहीं रहेगा। सरकार पूरी व्यवस्था करेगी।
शिवरतन शर्मा ने कहा कि अध्ययन दल की रिपोर्ट हम पार्टी को प्रस्तुत करेंगे। शर्मा ने कहा कि जो मुद्दा लोग उठा रहे हैं, 2020 में खदान से दूरी की रिपोर्ट कलेक्टर ने दी। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि टीएस सिंहदेव मंत्री थे। जो रिपोर्ट 2020 में दी गई, उसे 2025 में इश्यू क्यों बनाया जा रहा है।
टीएस कर रहे हैं राजनीति
समिति के संयोजक शिवरतन शर्मा ने कहा कि यह बात सिंहदेव को 2020 में उठानी चाहिए थी, अभी 2025 में उठा रहे हैं। केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के बगल में एक कोल ब्लॉक संचालित है। केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की खुदाई रामगढ़ पहाड़ या सीताबेंगरा से अधिक दूरी पर होगी। पिछले 12-13 सालों में रामगढ़ को क्या नुकसान हुआ है, आप स्वयं देख सकते हैं।शिवरतन शर्मा ने कहा कि उन्होंने पूरा स्थान देखा है। भू-क्षरण बारिश के कारण हुआ है। मुझे नहीं लगता कि दरार दिख रही है या मिट्टी बह रही है वह खनन के कारण है।

कांग्रेस का पलटवार… भाजपा बताए कि सत्ता में आते 5 दिनों के अंदर जंगल कैसे कटने लगे
पूर्व उपमुख्यमंत्री सिंह देव ने रामगढ़ पर्वत स्थल का मसला सामने आने के बाद कहा है कि जांच कमेटी जिम्मेदार लोगों की है, सबका एक लंबा राजनीतिक अनुभव है। इसमें 2 लोग सरगुजा जिले से हैं। जांच कमेटी के सभी लोगों से कल मोबाइल पर चर्चा हुई थी। मैं इस मामले को राजनैतिक रंग देने के बजाय पूरी तरह गैर राजनैतिक पहल कर रहा हूं, इसी उद्देश्य से मैंने भाजपा के द्वारा गठित जांच कमेटी के सदस्यों से उनके जांच के पहले संपर्क कर सरगुजा की जनभावनाओं का ख्याल रखने का निवेदन किया था, लेकिन जांच कमेटी के सदस्यों और भाजपा के अन्य नेताओं के इस बयान पर कि केते एक्सटेंशन खदान की कलेक्टर से अनुमति 2020 में हुई थी, उस समय कांग्रेस की सरकार थी और टीएस सिंहदेव केबिनेट मंत्री थे, ऐसा कहकर जांच कमेटी ने इस गैर राजनीतिक मुद्दे को राजनीतिक बनाने का प्रयास किया है। जांच समिति के सदस्यों को अगर मेरा नाम ही लेना है तो यह भी बताएं कि मेरे विधायक रहते और मेरे विरोध के बाद इस क्षेत्र में पेड़ की एक डंगाल तक नहीं कटा, जबकि मेरे चुनाव हारते प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आते 5 दिनों के अंदर जंगल काटने लगे, भाजपा के लोगों को यह भी बताना चाहिए कि मेरे कार्यकाल में ही इस क्षेत्र में नये खदान का प्रस्ताव निरस्त हुआ। भाजपा के लोगों को यह भी बताना चाहिए कि रामगढ पर्वत के संरक्षण और क्षेत्र के पर्यावरण को बचाने के प्रयास में मेरे ही कार्यकाल में छत्तीसगढ़ की विधानसभा ने केंते एक्सटेंशन खदान को निरस्त करने का संकल्प पारित किया गया, जिस चीज की अपेक्षा नहीं थी वो उन्होंने किया। जांच दल के सदस्य अखिलेश सोनी के बयान में रामगढ़ को बचाने की पहल करने की बात का उन्होंने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये सरगुजा की जनभावनाओं से जुड़ा गैर राजनीतिक मुद्दा है। अगर गलत सर्वे के आधार पर खदान को चालू करने का अनापत्ति पूर्व या वर्तमान के किसी अधिकारी ने दिया है तो उन सभी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए

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