अंबिकापुर। फर्जी ग्रामसभा और मुआवज़ा न मिलने के विरोध में सालही के ग्रामीणों ने 8 दिसंबर 2025 को ग्रामीणों ने पीसीबी खदान में उतरकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने उनकी जमीन का कोयला खुदाई कर बड़े पैमाने में कोयला निकाला, लेकिन अब तक नुकसान और सम्पति का सही आकलन नहीं किया और न ही मुआवज़ा दिया। इसी को लेकर ग्रामीणों ने पीसीबी खदान में दो घंटे हड़ताल चक्का जाम किया, बाद में अडानी कंपनी के एचआर राम द्विवेदी, माइंस मैनेजर पुरुषोत्तम मरकाम तथा अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर ग्रामीणों से बातचीत की। अधिकारियों ने बताया कि भूमि अधिग्रहण विभाग के मुख्य अधिकारी आज अवकाश पर हैं, इसलिए मुआवज़ा एवं दस्तावेज़ों की जांच पर निर्णय के लिए एक दिन का समय माँगा गया।

सालही गांव निवासी स्थानीय युवा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता राजा जय सिंह कुसरो ने अडानी कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कंपनी ने फर्जी ग्रामसभा के आधार पर खदान संचालन की मंजूरी प्राप्त की, जिसके बाद ग्रामीणों की ज़मीन से बड़े पैमाने पर कोयला निकाला गया। अब ग्रामीणों को नुकसान एवं सम्पति का सही आंकलन किये बिना मुआवजा लेने हेतु मजबूर किया जा रहा है। कई किसानों की आधी से अधिक जमीन की खुदाई हो चुकी है, लेकिन अब तक कई प्रभावित परिवार को मुआवज़ा नहीं दिया गया है। कुसरो ने बताया कि ग्रामीण लगातार मुआवज़ा, पुनर्वास और नुकसान के सही आकलन की माँग कर रहे हैं, लेकिन कंपनी और प्रशासन दोनों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा हमारी आधी जमीन का कोयला खुदाई हो चुका है, मगर आज तक हमें एक रुपये का मुआवज़ा भी नहीं दिया गया। यह ग्रामीणों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

अडानी कंपनी के खिलाफ शिकायत लेकर प्रशासन के पास जाने पर कलेक्टर के व्यवहार पर नाराज़गी जताते हुए कुसरो ने कहा जब वे शिकायत लेकर कलेक्टर के पास जाते हैं तो साफ कहते हैं कि यह मामला अडानी कंपनी और ग्रामीणों के बीच का है, इसमें उनकी ज्यादा भूमिका नहीं है। कुसरो के अनुसार यह जवाब प्रशासन की संवेदनहीनता और जिम्मेदारी से बचने का संकेत देता है। कुसरो का कहना है कि कलेक्टर का यह रवैया प्रभावित परिवारों की पीड़ा को नजर अंदाज करने जैसा है। आनंद राम कुसरो ने बताया कि जमीन के नुकसान के साथ-साथ खदान क्षेत्र की गतिविधियों से खेती, घरों और पेयजल स्रोतों पर भी असर पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना उचित प्रक्रिया के और बिना पारदर्शिता के ज़मीन छीनी गई। कई परिवारों की आजीविका प्रभावित है, जबकि बार-बार आश्वासन देने के बावजूद मुआवज़ा प्रक्रिया में देरी किया जा रहा है। अदानी प्रबंधन ने ग्रामीणों से एक दिन का समय माँगा, फिर बाद ग्रामीणों ने वापस हड़ताल समाप्त किया, और उचित समाधान नहीं होने पर ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का चेतावनी अदानी प्रबंधन को दिया है।
इस मौके पर राजा जय सिंह कुसरो, पवन कुसरो, आलम साय कुसरो, बंधु राम कुसरो, बुधराम उइके, शुक्ला कुसरो, आनंद राम कुसरो सहित भारी संख्या अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे।

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