अर्चिशा को श्रद्धांजलि देने उमड़े लोग, सहेलियों सहित सभी की आंखें हुई नम, बच्ची को ले जाते देख मां हुई बेहोश

GIRIJA THAKUR

अंबिकापुर। शहर के कार्मेल स्कूल में शिक्षिका की प्रताड़ना से व्यथित होकर घर में खुदकुशी की सिन्हा परिवार की लाड़ली अर्चिशा सिन्हा को श्रद्धासुमन अर्पित करने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। गुरूवार की सुबह से ही इनके दर्रीपारा स्थित निवास में नगर के लोग काफी संख्या में पहुंचने लगे थे। परिचित-अपरिचित सभी की सहानुभूति इस परिवार के प्रति थी। प्यारी सहेली को अंतिम विदाई देने के लिए कार्मेल स्कूल में पढ़ने वाली सखी-सहेलियां भी काफी संख्या में पहुंची थीं। लाड़ली बेटी अर्चिशा के पंचतत्व में विलीन होने के पहले तक वहां मौजूद हर किसी के आंखों से अश्रुधारा बह रही थी। इधर स्वजन दु:ख का बोझ सीने में दफन किए मासूम के अंतिम यात्रा की तैयारी में लगे थे। बच्ची के शव को देखकर उसकी मां बार-बार बेहोश हो जा रही थी। परिवार के सदस्यों को ढाढस बंधाने में लोग लगे थे। बेटी के शव को घर से बाहर निकालते देख चित्कार मारकर बेहोश हो रही मां को धरती माता के गोद में समाहित होने जा रही बच्ची की सहेलियां संभाल रही थीं। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शोकाकुल थे। कार्मेल स्कूल में अर्चिशा के साथ पढ़ने वाली छात्राएं साथ छोड़कर जा रही सहेली के चिरनिद्रा में लीन चेहरे को अपलक निहार रही थीं। ऐसे दृश्यों को देखने के बाद यहां मौजूद हर शख्स यही सवाल कर रहा था कि आखिर मासूम बच्ची का दोष क्या था, जो वह स्वयं को इतनी बड़ी सजा दे डाली? दिन में 10.45 बजे जैसे ही बच्ची के शव को घर से बाहर अंतिम यात्रा के लिए निकाला जाने लगा, तो उसकी मां व्याकुल हो उठी। वह शून्य आंखों से बेटी के शव को न सिर्फ देख रही थी, बल्कि सीने से लगाने आतुर थी, लेकिन रोते-रोते पस्त हो चुकी मां ममता सिन्हा के हाथ कांप रहे थे। बच्ची को ले जाने की बारी आई तो वह बेहोश हो गई। बेटी के शव को कंधा देते पिता आलोक सिन्हा व दादा फफककर रो पड़े। बच्ची के अंतिम यात्रा में शहर के सभी वर्ग के लोग शामिल हुए। शंकरघाट में बच्चों का शव दफन किए जाने वाले स्थल पर धरती माता के आगोश में अर्चिशा समा गई। पिता आलोक सिन्हा ने अपनी लाड़ली बिटिया को रोते-बिलखते हुए पहली मिट्टी दी। इसके बाद बारी-बारी से लोगों ने मासूम को मिट्टी देकर नमन किया। इसके पहले उपस्थित जनों ने मौके पर दो मिनट मौन रखकर अर्चिशा को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान बार रूम के जिला अध्यक्ष हेमन्त तिवारी, राकेश सिन्हा, पवन पांडेय, डीपी यादव, कुंजबिहारी पैकरा, अनिल सिंह, कायस्थ सभा के अध्यक्ष हेमंत सिन्हा, अनिल सिन्हा, किरनेश, विकास वर्मा, स्वर्ण कुमार मेहता सहित सैकड़ों की संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।


बच्ची का शब्दबाण हर किसी को द्रवित कर रहा

शहर के नामचीन स्कूल में पढ़ने वाली छात्रा किन परिस्थितियों में मौत को गले लगाई, यह उसके द्वारा इंग्लिश में लिखे गए सुसाइड नोट से सामने आ चुका है। एकलौती बेटी के सुनहरे भविष्य का सपना संजोए पीएमजीएसवाई में सब इंजीनियर आलोक सिन्हा व उनकी पत्नी ममता सिन्हा की तमन्ना बच्ची को अच्छी शिक्षा व उसके उज्जवल भविष्य की थी। बच्ची को पढ़ाई बोझ न लगे, इसका हर पल उन्होंने ख्याल रखा। रायपुर से अंबिकापुर आते समय बेटी से वीडियो कॉलिंग में हंसते-मुस्कुराते हुई बात का क्षण बेवश पिता के लिए भूल पाना संभव नहीं है। लाड़ली बेटी अपने माता-पिता, सखियों को प्यार भरी शब्दों की झप्पी देने के बाद जिस प्रकार के शब्दबाण की बौछार सुसाइड नोट में की, इसका एक-एक शब्द हृदय को द्रवित करने वाला है।
गुरूवार को भी स्कूल रहा बंद, बाहर पुलिस का पहरा
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छात्रा के द्वारा की गई खुदकुशी की घटना के दूसरे दिन भी लोगों का आक्रोश ठंडा नहीं हुआ था। हर कोई स्कूल प्रबंधन को कोस रहा था। जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने में लोग लगे थे। कार्मेल स्कूल का संचालन गुरूवार को भी बंद रहा। किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बनने पाए, इसे देखते हुए पुलिस का पहरा लगा हुआ था। बताया जा रहा है कि इस बीच बजरंग दल के कार्यकर्ता स्कूल तक पहुंचे थे, इन्होंने स्कूल के बाहर हनुमान चालिसा का पाठ किया।

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