संदिग्धों की पहचान के लिये पार्षद आलोक दुबे ने आईजी को लिखा पत्र  

अंबिकापुर। शहर में बाहरी प्रांतों से आकर किराए पर रह रहे संदिग्ध लोगों की पहचान और सत्यापन को लेकर वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने पुलिस महानिरीक्षक दीपक झा को पत्र लिखा है। उन्होंने थाना गांधीनगर, कोतवाली और मणिपुर थाना क्षेत्रों में किराएदारों के फिजिकल वेरिफिकेशन की मांग की है।

आईजी के नाम पत्र में उन्होंने उल्लेखित किया है कि, गांधीनगर थाना क्षेत्र के सुभाषनगर, डिगमा और भगवानपुर में कुछ लोग छोटे-छोटे मकान बनाकर बाहरी प्रांतों से आए लोगों को बिना जांच-पड़ताल के कम किराए के मकानों में रखे हैं। मकान मालिकों को यह पता नहीं है कि किराएदार क्या काम करते हैं, वे सिर्फ हर महीने किराया लेते हैं। आलोक दुबे ने कहा है कि, कोतवाली क्षेत्र के मोमिनपुरा, नवापारा, श्रीगढ़, बरेजपारा, रसूलपुर में भी बाहर से आए मुसलमान किराये पर रह रहे हैं। इनमें से कुछ लोग ब्राउन शुगर, कोरेक्स, देह व्यापार जैसा अवैध धंधे में लिप्त हो सकते हैं। पत्र में उल्लेख है कि धनबाद, झारखंड का साबिर दो लोगों की हत्या का सजायाफ्ता मुजरिम होने के बाद भी अंबिकापुर में 13 वर्षों से रहकर अपना व्यवसाय कर रहा था। इसी तरह उन्होंने आशंका जताई कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद कई संदिग्ध, जो बांग्लादेशी मुसलमान भी हो सकते हैं, गांधीनगर थाना क्षेत्र में ठिकाना बनाए हैं। पत्र में लिखा गया है कि, ये लोग कुछ जगहों पर बाल खरीदने और उसके बदले में छोटे-छोटे बर्तन बेचने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगर समय रहते इन बाहरी लोगों की जांच नहीं हुई तो सरगुजा में अपराध और फिरौती जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।

पुलिस से की ये मांग

आलोक दुबे ने आईजी से मांग की है कि, सभी थानों की टीम बनाकर बाहरी किराएदारों की फिजिकल जांच की जाए। ये कहां से आए, कितना किराया दे रहे हैं, क्या काम करते हैं और उनके खिलाफ गृहक्षेत्र के थाने में रिकॉर्ड है या नहीं, इसकी पड़ताल हो। खासकर कोतवाली और गांधी नगर क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे किराएदारों पर कड़ी नजर रखी जाए। पत्र की प्रतिलिपि डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल और नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल को भी भेजी गई है।

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