मझवार परिवार की गर्भवती महिला और बच्चे की घर में कराये गये प्रसव के बाद मौत
अंबिकापुर। लखनपुर विकासखंड के ग्राम सकरिया में जानकारी और जागरूकता के अभाव में एक विशेष संरक्षित मझवार जनजाति की 8 माह की गर्भवती महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला सामने आया है। मामला 6 जुलाई का बताया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, ग्राम सकरिया निवासी सुखनी मझवार 26 वर्ष, पति दिनेश मझवार तमिलनाडु में मजदूरी करके परिवार के साथ रहती थी। 14 जून को गर्भवती महिला का प्रसव कराने के लिए वापस गृहग्राम सरगुजा जिले के सकरिया आये थे। आठ माह की गर्भवती महिला की जांच 21 जून को स्वास्थ्य केंद्र कुन्नी में हुई। यहां डॉक्टरों ने महिला में खून की कमी होना बताया, उसका हीमोग्लोबिन 6.6 ग्राम था। वहीं जांच में ब्लड प्रेशर 154/113 पाया गया, जो बहुत ज्यादा था। पंचनामा के अनुसार, डॉक्टर ने खून की मात्रा बढ़ाने के लिए आयरन शुक्रोज लगाने के लिए उसे स्वास्थ्य केंद्र बुलाया था और तुरंत मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला अस्पताल अंबिकापुर ले जाने का उल्लेख पर्ची में किया था। मितानीन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने भी इनके घर जाकर प्रसूता को अस्पताल ले जाने के लिये स्वजन को कहा, लेकिन महिला और उसके घर वाले अस्पताल जाने के लिये तैयार नहीं हुये। इनका कहना था कि, घर में ही डिलीवरी करा लेंगे। 6 जुलाई की प्रसव पीड़ा बढ़ने पर सुबह करीब 9.30 बजे घर पर ही सुईंन दाई से इन्होंने प्रसव कराया। इस बीच भारी बारिश हो रही थी, जल्दबाजी के कारण प्रसूता को अस्पताल नहीं ले जाया जा सका। प्रसव के दौरान मां और बच्चा दोनों की मौत हो गई। इसका पंचनामा रिपोर्ट 7 जुलाई को मृतिका के पति दिनेश मझवार और परिवार के अन्य सदस्यों व ग्रामीणों की उपस्थिति में तैयार किया गया, जिसमें इसका उल्लेख किया गया है।
प्रसूता और बच्चे की मौत के बाद उठे सवाल
जच्चा-बच्चा की मौत का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है। गर्भवती महिला में ब्लडप्रेशर और खून दोनों खतरनाक स्तर पर होने की स्थिति में उन्हें तत्काल भर्ती करके रेफर नहीं किया गया, सिर्फ पर्ची लिखकर छोड़ दिया गया। रिफर करने की स्थिति में प्रसूता को एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला अस्पताल भेजा जा सकता था। पंचनामा में हितग्राही और मितानीन को समझाइश देने का लेख है, इधर घर वालों का कहना है कि उन्हें मितानीन के आने-जाने की कोई जानकारी नहीं है, फिर निगरानी किसने की? पंचनामा कार्रवाई के लिए बीएमओ और स्वास्थ्य विभाग की टीम जितनी तेजी से घर पहुंची, उतनी ही तेजी से गर्भवती को अस्पताल पहुंचाया गया होता तो सुरक्षित संस्थागत प्रसव का लाभ उसे मिल सकता था।
घर में दम तोड़ देना जांच का विषय
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के मौके पर पहुंचे अधिकारी ने पंचनामा कार्रवाई करके अपने कार्यों की इतिश्री कर ली है। सरकार सुरक्षित प्रसव के लिये करोड़ों खर्च कर रही है, मितानिनें गांव-गांव में सक्रिय रहती हैं, जो गर्भवती, शिशुवती माताओं के संपर्क में रहती हैं, और समय पर उन्हें इलाज समुचित आहार और जांच की सुविधा मिले इसका ध्यान रखती हैं। महतारी एंबुलेंस की नि:शुल्क सुविधा गर्भवती माताओं को अस्पताल तक लाने और प्रसव के बाद घर तक पहुंचाने के लिये दी गई है। इधर पीवीजीटी परिवार की गर्भवती महिला जागरूकता या जानकारी के अभाव में घर में प्रसव के दौरान दम तोड़ देना जांच का विषय है।
