बिलासपुर। दुर्ग से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जंहा पिता की फटकार से नाराज होकर तीन नाबालिग बच्चियां घर से निकल गईं और ट्रेन पकड़कर दूर निकल पड़ीं। गनीमत रही कि रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता से तीनों सुरक्षित मिल गईं और समय रहते उन्हें परिवार से मिला दिया गया।

डांट से टुटा बच्चीयों का मन
दुर्ग के अर्जुन नगर कैम्प-1 में रहने वाली 11 साल की एक बच्ची, उसकी 7 साल की छोटी बहन और पास में रहने वाली 10 साल की एक सहेली 6 फरवरी की शाम करीब 4 बजे घर से बाहर निकलीं। तीनों ने किसी को नहीं बताया कि वे कहां जा रही हैं। घूमते हुए तीनों बच्चियां एक दुकान पर रुकीं। वहीं 11 साल की बच्ची ने बिना बताए एक चॉकलेट उठा ली। दुकानदार ने यह देख लिया और तुरंत बच्ची के पिता को फोन कर दिया। फोन पर बात होते ही पिता ने गुस्से में बच्ची को डांट लगा दी। यह डांट बच्ची को इतनी बुरी लगी कि उसका मन पूरी तरह टूट गया। डांट सुनकर बच्ची को लगा कि घर जाकर और ज्यादा डांट पड़ेगी। इसी डर और नाराजगी में तीनों ने घर वापस न जाने का फैसला कर लिया। जब पिता दुकान पर पहुंचे, तब तक बच्चियां वहां से जा चुकी थीं। परिवार और मोहल्ले वालों ने रात भर तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चला।

दुर्ग डीआईजी ने लिया मामले को गंभीरता से
अगले दिन शनिवार को बच्चियों के माता-पिता थाने पहुंचे और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। सूचना मिलते ही दुर्ग के डीआईजी विजय अग्रवाल ने मामले को गंभीरता से लिया और चार विशेष टीमें बनाकर तलाश शुरू करवाई। पुलिस ने इलाके के कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में तीनों बच्चियां अलग-अलग चौराहों और सड़कों पर चलते हुए दिखीं। वे लगातार आगे बढ़ती जा रही थीं और कहीं रुकती नजर नहीं आ रही थीं। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि उसी शाम तीनों पावरहाउस रेलवे स्टेशन पहुंची थीं।

आरपीएफ ने बच्चियों से की पूछताछ
जानकारी सामने आई कि तीनों बच्चियां ट्रेन नंबर 12853 दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस में सवार हो गई थीं। ट्रेन जब बिलासपुर के उसलापुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर रुकी, तभी आरपीएफ के हेड कांस्टेबल एसके साहू की नजर इन बच्चियों पर पड़ी। आरपीएफ ने जब बच्चियों से पूछताछ की तो उन्होंने अपना पता और घर से भागने की वजह बता दी। तुरंत ही उन्हें चाइल्डलाइन बिलासपुर की टीम को सौंप दिया गया। बाल कल्याण समिति के निर्देश पर रात में तीनों को बालिका नूतन गृह में अस्थायी संरक्षण दिया गया।

सुरक्षित घर लौटी बच्चियां
अगले दिन पुलिस के सर्कुलेशन के आधार पर बिलासपुर से दुर्ग पुलिस को सूचना मिली। जल्द ही तीनों बच्चियों को सुरक्षित दुर्ग लाया गया और उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया। परिवार ने राहत की सांस ली। सोमवार को दुर्ग डीआईजी विजय अग्रवाल खुद बच्चियों के घर पहुंचे। उन्होंने बच्चों से प्यार से बात की, चॉकलेट दी और उनका मन हल्का किया। माता-पिता से भी बातचीत कर उन्हें बच्चों के साथ धैर्य और समझदारी से पेश आने की सलाह दी। काउंसलिंग के दौरान बच्चियों ने वादा किया कि वे अब कभी बिना बताए घर से नहीं जाएंगी।

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