निवेश के नाम पर सूरजपुर जिले के प्रशिक्षण अधिकारी सहित अन्य हुये ठगी का शिकार

अंबिकापुर। व्यवसायिक निवेश के नाम पर खण्ड विस्तार प्रशिक्षण अधिकारी व एक अन्य से 17 लाख 99 हजार 227 रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सूरजपुर थाना पुलिस ने मामले में अंबिकापुर के एक व्यवसायी के विरूद्ध केस दर्ज कर लिया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, सूरजपुर जिला के ग्राम पचिरा निवासी रॉबर्ट लकड़ा पिता स्व. आलेन लकड़ा 60 वर्ष, खण्ड विस्तार प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ हैं। इनके यहां सूरजपुर के परिचित कैलाश नारायण मिश्रा का आना-जाना था। कैलाश नारायण मिश्रा को रॉबर्ट के पुत्र के किडनी ट्रांसप्लाट ऑपरेशन के बारे में जानकारी थी। रॉबर्ट ने बीमारी के ईलाज के लिये रुपये की समस्या से भी उन्हें अवगत कराया था। इस पर कैलाश नारायण ने बताया था कि विनोद सारथी किसी कम्पनी में पैसा निवेश किया है, जिसमें उसे अच्छा मुनाफा हुआ है। आप भी स्कीम को समझकर पैसा इन्वेस्ट कर दीजिये। उन्होंने स्वयं व्यवसायिक निवेश के नाम पर 4 लाख रुपये इन्वेस्ट करने की जानकारी दी। इसके बाद जब वे विनोद सारथी से मिले तो उसने ए.एस.ए ट्रेडर्स कंपनी अंबिकापुर में रुपये निवेश करना बताया। विनोद सारथी के साथ जाकर वे गिरीश उपाध्याय से मिले तो उसने कई प्रकार की स्कीमों की जानकारी पैसा इन्वेस्ट करने के लिये दी। गिरीश की बातों में आकर रॉबर्ट ने 14.12.2023 को तीन बैंक से ली गई लोन राशि 32 लाख 10 हजार रुपये में से 19 लाख रुपये, गिरीश उपाध्याय के ए.एस.ए ट्रेडर्स अंबिकापुर के बैंक खाता में तीन बार में ट्रांसफर कर दिया था।

36 मासिक किस्तों की भुगतान करने का दिया झांसा

गिरीश उपाध्याय ने स्वयं के फर्म के खाते में रुपये ट्रांसफर होने के बाद कहा कि, 36 माह तक प्रत्येक माह, मासिक लोन राशि 100039 रुपये के हिसाब से ए.एस.ए ट्रेडर्स उनके खाते में समायोजित कर देगा, उन्हें बैंक में लोन का कोई भुगतान नहीं करना है, इससे पुत्र के ऑपरेशन के लिए भी रुपये की मदद मिल जायेगी, उनका वेतन भी सुरक्षित रहेगा। इसके लिये 50 रुपये के स्टाम्प पेपर पर अनुबंध भी तैयार किया गया था, जिसमें 1,00039 रुपये की 36 मासिक किस्तों का भुगतान वापस करने का उल्लेख है। रॉबर्ट का कहना है कि, लिखापढ़ी के अनुरूप गिरीश उपाध्याय ने बैंक खाता में 7 माह तक लोन का किस्त दिया और अगस्त 2024 से एकाएक लोन के किस्त का भुगतान करना बंद कर दिया। बढ़ते लोन के भार को देखते हुये जब उन्होंने गिरीश उपाध्याय से संपर्क किया तो झूठा आश्वासन मिलते रहा। इससे व्यथित होकर उन्होंने ठगी रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई है, और ठगी के कारोबार में अन्य लोगों के भी शामिल होने का संदेह व्यक्त किया है। बताया गया है कि गिरीश उपाध्याय के द्वारा कैलाश नारायण मिश्रा से भी 4 लाख रुपये की छलपूर्वक ठगी की गई है। रिपोर्ट के बाद ठगी का शिकार हुये लोगों की संख्या बढ़ सकती है। पुलिस मामले में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

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