होनहार एथलीट की मौत से जरही नगर में शोक का माहौल, घटना से सभी स्तब्ध

जरही। सूरजपुर जिले के नगर पंचायत जरही अंतर्गत शक्तिनगर सी-टाइप क्षेत्र में 16 वर्षीय किशोर द्वारा आत्महत्या की हृदयविदारक घटना ने पूरे नगर को गहरे शोक में डाल दिया है। यह घटना इसलिए भी अधिक पीड़ादायक है क्योंकि मृत किशोर न सिर्फ 11वीं कक्षा का छात्र था, बल्कि दौड़ में सक्रिय यह किशोर एथलीट के क्षेत्र में एक उभरता हुआ स्पोर्ट्समैन भी था, जिससे उसके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें जुड़ी हुई थी।
जानकारी के अनुसार शक्तिनगर निवासी रंजीत जायसवाल का पुत्र सोमवार को घर के भीतर फांसी पर लटका मिला। घटना के समय उसके पिता बिलासपुर गए थे, घर में मां और छोटी बहन मौजूद थीं। सुबह रिश्तेदार कार से आए थे। सामान रखने के दौरान किशोर कुछ देर के लिए कार लेकर चला गया। लौटने पर मां ने यह कहते हुए उसे फटकार लगाई कि वह अभी नाबालिग है, अकेले कार चलाना ठीक नहीं है, साथ ही पिता से शिकायत करने की बात कही। इसके बाद किशोर को नहाने भेजा और नाश्ते के लिए बुलाया। इधर मां जब नहाने के लिए गई तो किशोर अपने कमरे में कपड़ा सुखाने वाली रस्सी के सहारे फांसी पर झूल गया। छोटी बहन दरवाजा बंद देखकर शोर मचाई। दरवाजा तोड़कर स्वजन अंदर प्रवेश किए, तो वह फांसी पर झूल रहा था। स्वजन तत्काल उसे फांसी से उतारकर अस्पताल ले गए, यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। भटगांव पुलिस ने मामले में मर्ग कायम किया है और अग्रिम जांच कर रही है।
स्थानीय लोगों और परिचितों के अनुसार किशोर विभिन्न खेल गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता था। अनुशासित जीवन, फिटनेस और खेलों के प्रति उसकी रुचि के कारण उसे एक अच्छा स्पोर्ट्समैन माना जाता था। लोग मानते हैं कि यदि सही समय पर भावनात्मक सहारा और संवाद मिल पाता, तो उसका भविष्य खेल के क्षेत्र में उज्ज्वल हो सकता था। इस घटना से सामने आ रहा है कि आज के किशोर रील और रियल लाइफ के बीच अंतर नहीं समझ पा रहे हैं। सोशल मीडिया और रील संस्कृति में भावनाओं को नाटकीय रूप में दिखाया जाता है, जहां हर समस्या का त्वरित और गलत समाधान नजर आता है। वहीं वास्तविक जीवन में छोटी सी डांट या असहमति को भी किशोर अपनी अस्मिता और आत्मसम्मान से जोड़ लेते हैं।
घटना समाज के लिए चेतावनी
यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में सक्रिय, अनुशासित जीवन जीने वाले बच्चे भी मानसिक रूप से कमजोर क्षणों में टूट सकते हैं। जरूरत है कि माता-पिता, शिक्षक और समाज बच्चों से संवाद बढ़ाएं, और भावनात्मक सहारा दें। एक होनहार खिलाड़ी का यूं चले जाना पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।

 

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