रेवटी स्वास्थ्य केंद्र में लटका था ताला, मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार दौरान मौत

गिरिजा ठाकुर

अंबिकापुर। सर्पदंश की स्थिति में पीड़ित को त्वरित चिकित्सा सुविधा सुलभ कराने की सलाह दी जाती है। ओझा, गुनिया के संपर्क में आकर झाड़फूंक से दूर रहने की सलाह दी जाती है। जनप्रतिनिधियों को भी ग्रामीणों को जागरूक करने कहा जाता है, ताकि झाड़फूंक के चक्कर में पड़कर किसी के जान को जोखिम में न डालें। इसके बाद भी देखने को यह मिल रहा है कि जनप्रतिनिधि ही स्वयं झाड़फूंक को प्रोत्साहित करने में न सिर्फ लगे हैं, बल्कि स्वयं झाड़फूंक कर रहे हैं। वैसे भी सरगुजांचल में लचर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ या तो मौकापरस्त उठाते हैं, या फिर ग्रामीण बैगा, गुनिया के भंवरजाल में पड़कर घंटों समय बिता देते हैं, जिससे पीड़ित को त्वरित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती है।
मामला सूरजपुर जिले के रमकोला थाना अंतर्गत ग्राम बोंगा का है। यहां राजकुमार पण्डो पिता बुधराम पण्डो 22 वर्ष को बीते तीन-चार अप्रैल की दरम्यानी रात उस समय डंडा करैत सांप काट लिया था, जब वह 16 वर्षीय रिश्ते में भाई दिलेश्वर के साथ जमीन पर बिस्तर बिछाकर सोया था। चार अप्रैल को सुबह करीब साढ़े पांच बजे दाहिने हाथ के अंगूठा में युवक को डंडा करैत सांप डसा, जिससे उसकी नींद खुल गई थी। बिस्तर के पास भागते जहरीले सांप को राजकुमार देखा, जो उसे काटने के बाद घर में रखे लकड़ी, पटरा में विलुप्त हो गया था। इसकी जानकारी परिवार के सदस्यों को व दिया, इसके बाद वे उसका गांव के ही सरपंच से झाड़फूंक कराए। दो घंटे तक झाड़फूंक कराने के बाद भी युवक के हालत में सुधार नहीं आया तो उसे बोलेरो वाहन से रेवटी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, यहां अस्पताल में ताला बंद मिलने पर मौके पर मौजूद एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वाड्रफनगर ले गए। प्राथमिक चिकित्सा के बाद बेहतर उपचार के लिए पीड़ित युवक को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर रेफर कर दिया गया, यहां उपचार के दौरान गुरूवार को वह दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया है।

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