स्टेट बार काउंसिल ऑफ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा

अंबिकापुर। सरगुजा के किसान, आदिवासी और आम नागरिकों को राजस्व संबंधी न्याय के लिए बिलासपुर दौड़ न लगाना पड़े, इसके लिये स्टेट बार काउंसिल ऑफ छत्तीसगढ़ ने मुख्यमंत्री से अंबिकापुर में राजस्व मंडल की खंडपीठ बनाने की मांग की है, ताकि सरगुजा संभाग के लाखों लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय मिल सके।

स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता द्वारा 4 जुलाई को मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए पत्र के अनुसार, वर्तमान में सरगुजा संभाग के लगभग 5000 प्रकरण राजस्व मंडल बिलासपुर में लंबित हैं। सरगुजा संभाग में सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, कोरिया, एमसीबी और जशपुर सहित कुछ छह जिले आते हैं। संपूर्ण क्षेत्र मुख्यत: अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्र हैं, जहां बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ अंचलों में रहने वाले निवास करते हैं। ये पूरा क्षेत्र कृषि, वनोपज और मजदूरी पर निर्भर है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि जमीन, बंटवारा, नामांतरण जैसे मामलों में उलझे किसानों और ग्रामीणों को सुनवाई के लिए बिलासपुर जाना पड़ता है, इससे समय, धन और श्रम की अधिक हानि होती है, जो न्याय तक सहज पहुंच के संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत है। एक आदिवासी किसान के लिए बिलासपुर जाने में लगने वाला किराया, रुकने-खाने और वकील का खर्च मतलब महीने भर की कमाई खत्म होना है।

खंडपीठ बनने से यह होगा फायदा

बार काउंसिल अध्यक्ष का तर्क है कि अंबिकापुर में खंडपीठ बनने से गरीब वादकारियों को होने वाली परेशानी, समय की बर्बादी से मुक्ति मिलेगी और आर्थिक भार जैसी परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। त्वरित न्याय की स्थिति बनने से हजारों की संख्या में लंबित प्रकरणों का जल्दी निपटारा होगा। बुजुर्ग, महिलाएं भी बिना किसी परेशानी के कोर्ट पहुंच सकेंगे।

जनता की आवाज बनी बार काउंसिल

बता दें कि, अभी छत्तीसगढ़ में राजस्व मंडल का प्रधान पीठ बिलासपुर में है और खंडपीठ रायपुर व जगदलपुर में हैं। सरगुजा जैसे बड़े संभाग, जहां छह जिले हैं वहां अभी तक राजस्व न्यायालय का खंडपीठ नहीं है। मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में कहा गया है, इस दिशा में सकारात्मक पहल सरगुजा संभाग के समस्त नागरिकों, अधिवक्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों की लंबे समय से चली आ रही न्यायोचित मांग को पूरी करेगी।

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