अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने पत्रकारों के सवाल पर छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली मात के परिप्रेक्ष्य में कहा कि आपसी तालमेल की कमी और तेरा-मेरा का चल रहे खेल के कारण कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। यही कारण है कि जनता भी बदलाव चाहने लगी थी। पूर्व मंत्री के इस कथन से स्पष्ट है कि चुनाव पूर्व कांग्रेस के भीतरखाने में मनभेद की स्थिति बनी हुई थी। भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव, जिन्हें एक साथ देखने के बाद लोग जय-वीरू की जोड़ी इंगित करते थे, वास्तव में इनके बीच ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री का मलाल था। यह स्वाभाविक इसलिए भी था क्योंकि सिंहदेव ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनाने में जी तोड़ मेहनत की थी। सरगुजा संभाग ही नहीं प्रदेश में भी लोग सिंहदेव को मुख्यमंत्री का चेहरा मानकर चल रहे थे। इसके विपरीत मुख्यमंत्री का चेहरा सामने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कुछ अधिकारियों के द्वारा प्रोटोकॉल के विपरीत कुछ अधिकारियों के द्वारा आचरण करने की बात स्वयं सिंहदेव ने हाल में पत्रकारों से चर्चा के बीच लाई थी। इधर पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का कद मुख्यमंत्री का करीबी होने के कारण कुछ अधिक ही बढ़ गया था। एक ही पार्टी और जिले से अमरजीत व टीएस सिंहदेव के मंत्री होने के बाद भी कांग्रेस गुटों में बंट गई थी। टीएस के साथ कदम मिलाकर चलने वाले कुछ लोग अमरजीत गुट की शान बन गए थे। इसका परिणाम कांग्रेस को सरगुजा संभाग से सभी विधानसभा सीटों को गवां दिया। यही नहीं दिग्गज मंत्रियों को भी चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान सरकार व विधायकों के कामकाज को लेकर तंज कसते हुए पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि विष्णु देव सरकार मस्त और जनता त्रस्त है। सीतापुर विधानसभा क्षेत्र भ्रमण के दौरान विकास की गंगा तो नहीं गड्ढे जरूर देखने को मिल रहे हैं। गड्ढा भरने की जरूरत भी यहां महसूस नहीं की गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा सबका काम करने का अपना-अपना तरीका है, तभी तो स्वीपर और रसोइया के आवेदन पर भी विधायक हस्ताक्षर कर रहे हैं।  

बदले की भावना से की गई कार्रवाई
पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा विधानसभा चुनाव में बनी स्थिति का नतीजा सबको भुगतना पड़ा है। आने वाले समय में इसे सुधार लिया जाएगा। चुनाव में मिली हार के बाद बदले की भावना से की गई कार्रवाई किसी से छिपी नहीं है। लंबे समय तक मीडिया से बनी दूरी को पाटने के लिए उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस के पहले पत्रकारों से चर्चा के बहाने अपने दर्द को सामने लाया।

आरक्षण की मूल अवधारणा प्रभावित हुई नई व्यवस्था से-भगत
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा बीते 01 अगस्त को एसटी/एससी आरक्षण के परिप्रेक्ष्य में सुनाया गया फैसला आरक्षण के मूल अवधारणा के विपरीत है। आरक्षण की मूल अवधारणा अस्पृश्यता (छुआछूत) को लेकर समानता का अधिकार दिलाने हेतु की गई थी, इसमें कहीं भी क्रिमीलेयर जैसे शब्दों का उपयोग नहीं किया गया था। उक्त बातें छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने अपने निवास में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि सामाजिक, शैक्षणिक एवं राजनैतिक स्तर पर लोगों को ऊपर उठाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। इस अवधारणा के मूलस्वरूप के क्रियान्वयन पश्चात वर्तमान परिस्थिति में भी अस्पृश्यता समाप्त नहीं हुई है, इसका उदाहरण 24 जनवरी 2023 को हौज खास दिल्ली में हुई घटना है, यहां देश के सर्वोच्च पद पर आसीन राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को जन्मदिवस पर जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने से रोकना है, जबकी अन्य दो मंत्री अश्विनी वैष्णव और धर्मेंद्र प्रधान को गर्भगृह में जाने की अनुमति दे दी गई। उन्होंने कहा न्यायपालिका में भी एसटी व एसटसी वर्ग के लोगों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। नौकरी में भर्ती एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राज्य प्रशासनिक सेवा के विभिन्न पदों पर रिक्तियों को भरने एवं पदोन्नति के निर्देशों का पालन नहीं होना भी सरकार के एसटी/एससी ग्रुप के प्रति मानसिकता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक असमानता इसलिए भी स्पष्ट है क्योंकि कोई भी बड़े औद्योगिक क्षेत्र में इस वर्ग के प्रतिनिधित्व का अभाव है। बड़े मीडिया हाउस एवं एंकर इस वर्ग के नहीं हैं। राज्य प्रशासनिक सेवा के रिक्त पदों पर अभ्यर्थी नहीं मिलने पर उनको ओपन कटेगरी, सामान्य कर दिया जाएगा, जिससे इन वर्गों को भयंकर नुकसान होने की संभावना है। एसटी/एससी में बिना विस्तृत कार्ययोजना बनाए क्रिमीलेयर लागू करना आत्मघाती सिद्ध हो सकता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट, राज्य सरकार एवं भारत सरकार को इस पर पुर्नविचार करना चाहिए।

विश्व आदिवासी दिवस पर उठेगी आवाज
अमरजीत भगत ने कहा कि 08 अगस्त, शुक्रवार को विश्व आदिवासी दिवस है। सामाजिक तौर पर मीटिंग के बाद ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इस बात को लेकर चर्चा होगी। बिना विस्तृत कार्ययोजना के किसी निर्णय को एसटी/एससी वर्ग के लिए थोपना घातक साबित होगा। उन्होंने कहा लोकसभा में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता व सांसद राहुल गांधी ने इस पर आवाज उठाया है। जातिगत जनगणना हो तो स्पष्ट हो जाएगा, किसकी कितनी जनसंख्या है और प्रतिनिधित्व है।  

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