लखनपुर(दिनेश बारी)- जनपद अंतर्गत एक आश्रित ग्राम ऐसा भी है जो बरसात के मौसम में एक टापू के समान अलग-थलग नजर आता है जहाँ इस आश्रित ग्राम के निवासियों का संपर्क अपने ही संबंधित ग्राम पंचायत से पूरी तरह टूट जाता है। मामला है लखनपुर विकासखंड अंतर्गत सुदूर वनांचल क्षेत्र तिरकेला के आश्रित ग्राम ढोंगाडाँड़ का जहां इस आश्रित ग्राम के लोगो को बरसात के दिनो में मुख्य पंचायत से अलग जीवन बसर करना पड़ता है।

दरअसल हकीकत यह भी है कि तिरकेला और इस आश्रित ग्राम के मध्य से एक नदी बहती है जहां नदी पर पुल निर्माण नही होने से साधन आभाव में बरसात के दिनों में इस आश्रित ग्राम का संपर्क अपने संबंधित ग्राम से पूरी तरह टूट जाता है। इस आश्रित ग्राम में 65 घर मौजूद हैं तथा इस इन घरों में बड़ी संख्या में बूढ़े,बच्चे,महिलाएं निवास करती हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने से इस ग्राम के लोगो को अपने संबंधित ग्राम तिरकेला जाने के लिये काफी मशक्कत के सामना करना पड़ता है कभी-कभी तो नदी का जलस्तर इतना बढ़ा हुआ होता है कि नदी में बह जाने तक का खतरा मोल लेकर ये ग्रामीण नदी पार करते दिखाई देते हैं।

ग्राम पंचायत तिरकेला के इस आश्रित ग्राम में न तो विद्युत व्यवस्था सुचारू हो पाई है और न ही शुद्ध पेजजल ही सुलभ हो पाया है। यहां शुद्ध पेयजल के लिए एक हैंडपम्प है जो कि अब खराब स्थिति में है जिसके बाद ग्रामवासियो को तिरकेला नदी का पानी पीने के लिए उपयोग करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में किसी आपातकालीन स्थिति में अस्पताल तक पहुचने के लिए भी इन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है जहाँ कुन्नी का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोनों ही इस स्थान से काफी दूरी पर स्थित है। ढ़ोंगाडाँड़ के निवासियों ने बताया कि नदी पर पुल बनाये जाने कई बार जनप्रतिनिधियों सहित सरपंच सचिव से मांग की गई थी परंतु आज तक मांग पूरी नही हो पाई है।

ग्राम वासियो ने इस संबंध में शासन प्रसाशन का ध्यानाकर्षण कराते हुए नदी पर पुल बनाये जाने सहित विभिन्न व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराए जाने की मांग की है ताकि भविष्य में उन्हें इस तरह की किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

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