बिश्रामपुर। एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र के आमंगाव खदान में करीब आठ महीने के भीतर दो दो खदान हादसों में दो ठेका मजदूरों की मौत के मामले में क्षेत्रीय प्रबंधन की लीपापोती से घटना में दोषी अधिकारियों पर अब तक किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होने से प्रबंधन की भूमिका पर लोग सवाल उठा रहे हैं। ज्ञात हो कि एसईसीएल बिश्रामपुर की आमंगाव खुली खदान परियोजना में वर्ष 2023 से अब तक दो खदान हादसे हो चुके हैं, जिसमें दो ठेका कर्मियों की खदान के भीतर मौत हो गई थी। पहला मामला 18 मार्च 2023 का है, जहां कोल स्टॉक यार्ड से रोड सेल का कोयला लोड करा रहे ठेका मजदूर बबल कुमार राजवाडे की मौत हो गई थी। घटना के बाद अच्छा खासा हंगामा हुआ था। खदान के भीतर हुई मौत को खदान के बाहर की घटना बताने मृत हालत में मजदूर को अम्बिकापुर अस्पताल भेज दिया गया था।आश्चर्य की बात यह है कि प्रबंधन ने घटना की भनक डीजीएमएस तक को नहीं लगने दिया और स्थानीय पुलिस व परिजन का मुंह बंद कराकर मामले को दबा दिया। इसी प्रकार गतदिनों 25 जून को भी इसी खदान में ही प्रबंधन की लापरवाही से दूसरी बार खदान के मजदूर कुमदा बलरामपुर निवासी गुलाल साय की मौत खदान परिसर में भोजन करते समय वाहन की चपेट में आकर उसकी भी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस हादसे को भी खदान के तत्कालीन प्रबंधन ने आनन फानन में पुलिस व परिजन को विश्वास में लेकर मामले को दबा दिया। इस मामले की भी खदान प्रबंधन ने पहले मामले की तरह ही डीजीएमएस को इस बार भी भनक नहीं लगने दिया। खदान के भीतर हुई दो दो हादसों में दो लोगो की मौत के बाद क्षेत्रीय प्रबंधन व कंपनी प्रबंधन ने मैनेजर को अब तक नहीं हटाया है और ना ही दोषी अधिकारियों पर अब तक किसी प्रकार की कार्यवाही हुई है, जिससे प्रबंधन पर दोषी अधिकारियों को बचाने के आरोप लग रहे हैं। इस संबंध में एसईसीएल बिश्रामपुर के आमगांव ओसीएम के सब एरिया मैनेजर अवधेश झा ने बताया कि उनकी पदस्थापना को महज ढाई माह हुए हैं। उन्होंने बताया कि उक्त दोनों घटना मेरे कार्यकाल के नहीं हैं, इसलिए मैं इस विषय में कुछ बता नहीं सकता। आपके माध्यम से दोनों घटना की जानकारी मिली है, मैं पता करता हूं।
प्रबंधन ने सब एरिया मैनेजर को हटाया
बताया जा रहा है कि घटना के कुछ दिनों बाद प्रबंधन ने तत्कालीन सब एरिया मैनेजर महेश कुमार चौधरी को हटाकर यहां नए सब एरिया मैनेजर की नियुक्ति कर दी है। हालांकि महेश कुमार चौधरी को हटाने की वजह कुछ और ही थी लेकिन खदान के मैनेजर केके भोई को न तो अब तक हटाया गया और न ही किसी प्रकार की कार्यवाही की गई है। सूत्रों ने बताया कि मैनेजर केके भोई का आगामी  दिनों में पदोन्नति होने वाला है, इसलिए मैनेजर पर दोनो मामलों को कथित रूप से लेन देन कराकर मैनेज करा लिए जाने का आरोप लग रहा है। मानव अधिकार संगठन से जुड़े एक सामाजिक कार्यकर्ता ने पूरे मामले  की शिकायत डीजीएमएस धनबाद, डीडीएमएस रायगढ़ रीजन सहित कोयला मंत्री, कोल इंडिया चेयरमैन से करके आरोपित मैनेजर के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।
हादसे के बाद डीजीएमएस को देनी होती है सूचना
नियमानुसार खदान क्षेत्र में किसी भी प्रकार के हादसा होने के बाद क्षेत्रीय प्रबंधन को खान सुरक्षा महानिदेशक को मामले की सूचना घटना के तत्काल बाद देनी होती है।सूचना के बाद खदान में यथास्थिति होनी चाहिए। डीजीएमएस अपने अधीनस्थ संबंधित रीजन में पदस्थ डीडीएम्एस को निरीक्षण के लिए मौके पर भेजते हैं, जहां घटनास्थल की विडियो व फोटो ग्राफी के बाद खदान के मैनेजर सहित सुरक्षा अधिकारी, सब एरिया मैनेजर सहित मौके पर कार्यरत कर्मियो के बयान दर्ज करने की कार्यवाही होती है। खान सुरक्षा निदेशक को लापरवाही मिलती है तो वह खदान को जांच तक बंद रखने का निर्देश देते हैं और जांच के बाद गुण दोष के आधार पर दोषी अधिकारी पर एफआईआर सहित विभागीय कार्यवाही भी होती है, जिसमें डिमोशन से लेकर इंक्रीमेंट काटने सीआर खराब करने, जेल भेजने तक डीजीएमएस को कानूनन शक्ति प्राप्त होती है।

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