बैंक की नौकरी त्यागकर शिक्षक से विधायक, मंत्री, राज्यसभा सदस्य तक का मुकाम किए हासिल

गिरिजा कुमार ठाकुर

अंबिकापुर। शिक्षक से विधायक, मंत्री व राज्यसभा तक का सफर तय किए ‘रामविचार नेतामÓ किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। कठिन परिस्थितियों में तमाम बाधाओं को सहते शिक्षा हासिल करने के साथ ही बैंक की नौकरी त्यागकर उन्होंने रामचंद्रपुर ब्लॉक के बाकी गांव में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में सेवा दी। यहां बच्चों के बीच समय देते उनके मन में असहाय व पीड़ितों के सेवा का जज्बा समाया था। ऐसे हालातों के बीच पाल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर उन्होंने राजनैतिक यात्रा शुरू की और 1990 में चुनाव में जीत हासिल की। इसके बाद ‘पाल के लालÓ के रूप में उनकी ख्याति फैली।

 


रामविचार नेताम का राजनीति में वास्तविक पदार्पण राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सतत संपर्क में रहते भाजपा के वरिष्ठ नेता बजरंगलाल अग्रवाल के सान्निध्य में हुआ। कई गुरुत्तर दायित्व का निर्वहन करते कारवां बढ़ते गया और वे विधायक ही नहीं प्रदेश सरकार में मंत्री के दायित्व का बखूबी निवर्हन करते राज्यसभा सदस्य का मुकाम हासिल किए। वर्ष 1990 से लगातार पांच बार विधायक रहे। वर्ष 2023 के चुनाव में रामविचार नेताम ने पुन: अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी डॉ. अजय तिर्की को 29 हजार 740 मतों से परास्त करके संघर्ष ही सफलता के मूलमंत्र को सामने लाया है। उनके राजनैतिक सफरनामे में इनकी धर्मपत्नी पुष्पा नेताम ने भी पूरा साथ दिया। इनके हौसलों की उड़ान उन्होंने कभी कम नहीं होने दी। बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ाव होना उनके राजनैतिक सफर को बुलंदी प्रदान करते गया। विधायक बनने के बाद राजस्व विभाग को उन्होंने निशाने पर लिया और पटवारियों की कारस्तानी और वसूली से परेशान ग्रामीणों के आंदोलन का नेतृत्व करते 11 दिन की जेल यात्रा उन्होंने तय की। इनकी रिहाई के पक्ष में अविभाजित सरगुजा के दौर में पूरे जिले में स्वागत व सम्मान जैसे आयोजन हुए। इन्होंने अपने राजनैतिक सफरनामा के बीच विदेश यात्रा भी की। यूएसए अमेरिका नार्वे, जर्मनी, स्वीडन, दुबई, सिंगापुर मलेशिया, थाईलैण्ड, अफ्रीका, सियारालॉन की यात्रा के दौरान कई अनुभवों को साथ लाए।

चुनौतियों से भरा रहा कॉलेज तक का सफर
रामविचार नेताम का पाठशाला से लेकर कॉलेज तक का सफर अत्यंत चुनौतियों के साथ विषम परिस्थितियों से ओतप्रोत रहा। ईष्ट मित्रों, परिवार व समाज के प्रोत्साहन का संबल उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। स्कूल जीवन से अपनी नेतृत्व क्षमता के कारण शाला नायक की भूमिका अदा करते हुए वे एनसीसी एवं एनएसएस में अपनी सहभागिता दिए। सुदूर ग्रामीण अंचल में लालन-पालन होने के कारण जीवन के कई मोड़ पर उन्होंने बाधाएं भी झेलीं। फिर भी उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ सारी बाधाओं का सामना किया। नहीं तो समय ऐसा भी आया था कि वे अपनी पढ़ाई जारी न रख सकें, इसके लिए कई बार उन पर प्रहार हुए। आवेदन फार्म गुमा दिया गया। इनका सामना करते वे हिम्मत नहीं हारे और अपनी पढ़ाई जारी रखकर मंजिल तक पहुंचे। आर्थिक एवं पारिवारिक स्थिति को देखते हुए वे मजबूरन बीच में पढ़ाई छोड़कर सर्विस की ओर कदम बढ़ाए, लेकिन विपरीत हालातों से गुजर चुके श्री नेताम में असहाय एवं पीड़ितों के लिए कुछ करने की चाहत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

ऐसा रहा राजनैतिक सफरनामा
रामविचार नेताम 1990 से पांच बार विधायक रहने के साथ ही अपने राजनैतिक कैरियर की शुरूआत के प्रारंभिक दौर में वर्ष 2000 से 2002 तक भाजयुमो राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य रहे। वर्ष 2000 से 2003 तक भाजपा, अविभाजित जिला सरगुजा के अध्यक्ष रहे। इनके अध्यक्षीय कार्यकाल में चुनाव दौरान सरगुजा के 08 विधानसभा क्षेत्र में से 07 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कराई और प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। वर्ष 2003 से 2005 तक आदिम जाति कल्याण एवं राजस्व मंत्री छत्तीसगढ़ शासन रहे। अपने मंत्रीय काल में उन्होंने स्कूली छात्राओं के लिए नि:शुल्क साइकिल योजना का प्रारंभ किया। वर्ष 2005 से 2008 तक गृह, जेल एवं सहकारिता मंत्री छत्तीसगढ़ शासन रहते समूचे सरगुजा को नक्सली आतंक से मुक्त कराया। वर्ष 2008 से 2012 तक पंचायत एवं ग्रामीण विकास, विधि विधायी मंत्री रहे। इस दौरान गांवों के बहुमुखी विकास हेतु मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना प्रारंभ किया। वर्ष 2012 से 2013 तक जल संसाधन, उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री रहते हुए उच्च शिक्षा के गुणात्मक विकास हेतु प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में लगभग 18 वर्षों से लंबित रिक्त सहायक प्राध्यापकों के पदों में भर्ती को प्राथमिकता से पूरा किया। 2014 में इन्हें भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री, 2015 में राष्ट्रीय प्रभारी, अनुसूचित जनजाति मोर्चा भाजपा, 2015 में ही सह-प्रभारी झारखंड प्रदेश भाजपा, दिसंबर 2016 से सितंबर 2020 तक राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति मोर्चा भाजपा, जून 2016 से जून 2022 तक सांसद राज्यसभा रहे।

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