श्रीमती सीमा सिंह

सरगुजा की तीनों विधानसभा सीटें चुनाव प्रचार और चुनावी ऊर्जा से सराबोर है।इन तीन सीटों में अंबिकापुरहाईप्रोफाइल सीट बन गई है,जिसकी चर्चा केंद्रीय गलियारों तक है, कांग्रेस से उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और भाजपा से राजेश अग्रवाल दावेदार हैं।राजेश मूलतः भाजपाई नहीं है, अंबिकापुर भाजपा में यह उनकी राजनैतिक कमजोरी है। लेकिन लूण्ड्रा से लेकर सीतापुर तक का कोई भाजपा प्रत्याशी मूलतः भाजपा की पृष्ठभूमि से नहीं है। यह संकेत करता है कि सरगुजा में भाजपा नेतृत्वहीनता से व्याधित है। राजेश अग्रवाल को लेकर अंबिकापुर खेमा जो जिला भाजपा का केंद्र है गतिहीन कम,सुप्त अधिक है,इस राजनीतिक सुप्तता में अनिल सिंह मेजर का सक्रिय राजनीति से दूर रहने की घोषणा,एक धुकधुकी मात्र है।

शफी अहमद की युद्ध भूमि यद्यपि भटगांव थी,पर टिकट न मिलने से भटगांव के मुस्लिम मतदाताओं ने तो विरोध नहीं किया,बल्कि इसका प्रभाव अंबिकापुर में सिंहदेव के व्यक्तिगत मुस्लिम समाज के वोट पर कैंची है।
जिसका व्यक्तिगत से अधिक लाभ सामाजिक स्तर पर लाभ राजेश अग्रवाल को मिलने की संभावना है। भाजपा के टिकट वितरण ने दोनों दलों के मतों में अंतर्विभाजित कर दिया है। लेकिन भाजपा से ठाकुर और ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट न दिया जाना, भाजपा के इन वोटों को दिशांतर कर सकती हैं। और यदि ऐसा होता है तब यह सिंहदेव लाभप्रद रहेगा।  भले ही राजेश कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए हैं, लेकिन कुछ वर्षों में लखनपुर ग्रामीण क्षेत्रों सहित उदयपुर में अपनी पहचान बनाई है,जो सिंहदेव के वोटों का खजाना है।तो क्या भाजपा  सिंहदेव के खजाने में हाथ डाल रही है?

राजेश अग्रवाल के समर्थन में पूरा मारवाड़ी समाज लामबंद है। इसलिए कभी कभी ऐसा लगता कि यह दो धनाढ्यों के मध्य का आर्थिक संघर्ष है। जनता राजनीति की चलती फिरती प्रयोगशाला है और राजनीतिक विज्ञान भी है। इसलिए यह टिप्पणी आवश्यक है कि “जब तक दशहरा में सरगुजा के विभिन्न अंचलों से लोग सरगुजा पैलेस आते रहेंगे, सिंहदेव को टक्कर दी जा सकती है हराना मुश्किल। क्योंकि यहां से भी सरगुजा की जन राजनिती और विचारों का नमूना परिलक्षित होता है।जो संभावनाओं की भविष्यवाणी भी कर सकता है।लेकिन जन, मानव का स्वभाव डेकची के एक पके चावल से पूरे चावल के पके होने का भाव तो प्रगट करता है?पर मनुष्य चावल नहीं।यद्यपि  जनता को मतदाता के रूप में भात नहीं कहा जा सकता है। लेकिन मारवाड़ी लाबी का राजेश अग्रवाल के पक्ष में होना, सिंहदेव का चिंतित होना स्वाभाविक है,क्योंकि “धर्म मूलं धनं और”धनं मूलं राज्यम् ” है।

प्रदेश के लिए एक अन्य प्रतिष्ठा पूर्ण सीट सीतापुर है, जहां से चार बार के विधायक व वर्तमान मंत्री अमरजीत भगत है। जिनके विरोध में भाजपा से पूर्व सैनिक और शांतिकाल में शौर्य प्रदर्शन “राष्ट्रपति सेना मेण्डल”में सम्मानित राजकुमार टोप्पो,है। अमरजीत अपने पिछले चार कार्यकालों में क्षेत्रवासियों को संतुष्ट नहीं कर सके हैं। अधूरी व ग्रामों की उधड़ी सड़कें, सीतापुर नगर पंचायत क्षेत्र में धूल के गुबारों से पीड़ित क्षेत्रवासी यदि धूल के गुबार से गाल फूला ले तो मंत्री जी के लिए चुनाव में नुकसान हुआ मानें। वहीं दूसरी और पूर्व फौजी के साथ अमरजीत से नाराज़ और एक उत्साही जन सैलाब है। यह भाजपा के लिए यह एक लाभदायक स्थिति है। लेकिन राजकुमार टोप्पो सहित सीतापुर भाजपा की अनुभवहीनता व नीतिज्ञ न होना एक अवगुण है। बिना अधिक परिश्रम किये राजकुमार टोप्पो अच्छी स्थिति में है।कुल मिलाकर स्थानीय नीति का पालन या अवहेलना अचानक कभी  भी जीत या हार को बदल देगी। खाद्य मंत्री के विधानसभा सीतापुर में हुए चावल घोटाले को सीतापुर भाजपा मुद्दा बनाने में असफल रही है।

लुण्ड्रा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी डा०प्रीतम राम और भाजपा से प्रबोध मिंज है। लुण्ड्रा विधानसभा के अधिकांश गांव प्रीतम राम की निष्क्रियता से असंतुष्ट दिखाई देती है।
कार्यों का पूरा न होना,अधूरे निर्माण और विधायक जी की क्षेत्र से लंबी गैरहाजिर, उनके प्रति क्षेत्र के लोगों को निराश करती है। वहीं प्रीतम राम को कांग्रेस के टिकट से वंचित चिंतामणि महाराज से भी खतरा है, खतरा तो अंबिकापुर से कांग्रेस को भी संभव है?भाजपा में शामिल होने के बाद वे एक धार्मिक गुरु के रूप में अपने अनुयायियों के द्वारा कांग्रेस की मत संख्या को प्रभावित करेंगे,तीनों विधानसभाओं सहित बगीचा क्षेत्र में । प्रबोध मिंज लूण्ड्रा में विगत 6-7वर्षो से सक्रिय हैं।डा०प्रीतम राम की उदासीनता और जन विलगाव का लाभ प्रबोध को मिल सकता है। लेकिन जैसे जैसे मतदाता की तिथि नजदीक आते जायेंगी समीकरण बनने बिगड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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