0 प्रचार अभियान में मुद्दे कम चेहरे है ज्यादा हावी
सूरजपुर। विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे जैसे करीब आ रही वैसे वैसे प्रचार की धार भी तेज हो रही है।आज प्रचार अभियान को और धार देने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दतिमा आ रहे है।कांग्रेस भी अपने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारने की तैयारी में है।लेकिन इन सब के बीच चुनाव में स्थानीय मुद्दों को लेकर हो रही सियासत और वोट न करने धमकी से किसका भला होने वाला है यह समझ से परे है। गांव गांव में वोट बहिष्कार की बयार चल रही है, कतिपय नेता किस्म के लोग लोगो को बरगला कर सीधे चुनाव बहिष्कार का फंडा अपना रहे है।जबकि, इस तरह के निर्णय से जाहिर है किसी का भला होने वाला नही है और न ही उन समस्याओं का समाधान होने वाला है, जिसके लिए वे बहिष्कार की बात कर रहे है।अपने मतों का सदुपयोग कर बेहतर प्रत्याशी चुने जो गांव के विकास पर ध्यान दे।वोट बहिष्कार की सियासत से उन लोगो का भला होता दिख रहा है जो गांव से वोट की ठेकेदारी करने लगे है..!और इस बहाने खुद को स्थापित कर पार्टियों से अपना उल्लू सीधा करने की फिराक में है।ऐसे लोगो से सावधान रहने की जरूरत है।
0 मुद्दे कम चेहरा ज्यादा कारगर……
विधानसभा चुनाव की जो तासीर सामने दिख रही है उसमें विकास के मुद्दे कम चेहरे ज्यादा प्रभावी दिख रहे है। जिले का प्रेमनगर हो या भटगांव दोनो विधानसभा में एक ओर नया चेहरा है तो दूसरी ओर पुराने चेहरों पर दांव है।अब ऐसे में यहां चुनावी प्रचार का एक हिस्सा यह भी बन रहा है कि कोई कर बनाइस नही तो बिगाडिस भी नही…तो वहीं ए दारी नवा ला देख ले ल जाये जैसे मुद्दों की चर्चा है। भटगांव में कांग्रेस कर्जमाफी, धान व किसान को मुद्दा को लेकर गांव गली में माहौल बना रही है तो दूसरी ओर भाजपा गिरदावरी के नाम रकबा कम करने,केसीसी गोलमाल,कर्ज माफी से बचे किसानों मतलब केवल किसान और किसान को ही मुद्दा बना कर वैतरणी पार लगाने की जुगत में है।इन सब के बीच जो बुनियादी समस्याएं है, उसकी चर्चा कम हो रही है। इधर, प्रेमनगर का हाल इससे जुदा नही है यहां भी मुद्दों से ज्यादा चेहरा  प्रभावी है पर इस बार दोनो दलों के प्रत्याशियों के चेहरे की सहजता राह कठिन कर रही है।यही वजह है कि दोनों दलों की ओर से झोला व जेब के प्रत्याशी होने के आरोप सामने आ रहे है। कौन कितना ओर किसकी जेब मे रहेगा इसकी खुलेआम चर्चा चल रही है।यहां कर्ज माफी,किसान का धान आदि को मुद्दा बनाने की कोशिश है लेकिन स्थानीय मुद्दे चर्चा से गायब है।
आज प्रधानमंत्री की चुनावी आम सभा है यह आम सभा क्या रंग लाती है और इसका जिले के मतदाताओं पर कितना प्रभाव पड़ता है यह तो सभा के बाद ही आम लोगो की प्रतिक्रिया पर निर्भर है। इधर कांग्रेस भी अपने स्टार प्रचारकों के साथ चुनावी माहौल में सरगर्मी पैदा करने को तैयार हैं।

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