गिरिजा कुमार ठाकुर
सरगुजा के लिहाज से इस बार के विधानसभा चुनाव में अंबिकापुर विधानसभा को पूरे प्रदेश के हॉट सीट के रूप में देखा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। इसके पीछे कारण सिर्फ उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव व व्यवसायी के साथ जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान बनाए राजेश अग्रवाल के साथ होने वाली टक्कर मात्र नहीं बल्कि भाजपा के द्वारा लगातार तीन बार एक ही प्रत्याशी को मौका देने के बाद मिलती आई करारी हार है। इस चुनाव में भाजपा ने काफी जद्दोजहद के बीच प्रत्याशी चयन किया है। उड़ती खबरों को नजरअंदाज न किया जाए तो इस चुनाव में अंबिकापुर विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी के रूप में चर्चा राजेश अग्रवाल के साथ ही मेजर अनिल सिंह की कुछ अधिक हो रही थी। इसके बाद ही अपना पीठ खुद थपथपाने वाले नेताओं का बखान हो रहा था लेकिन मेजर साहब को टिकट नहीं मिल पाया। इधर चुनाव में टिकट नहीं मिलने से क्षणिक रूष्ट शफी अहमद स्टॉर प्रचारक के रूप में अंबिकापुर के साथ हर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने हवाई सफर कर रहे हैं। इधर भाजपा के वरिष्ठ नेता मेजर अनिल सिंह का भाजपा में रहते सक्रिय राजनीति से सन्यास मोड में आना लोगों को नहीं पच रहा है। ऐसे में लोगों की जुबां से एक ही बात निकल कर सामने आ रही है कि चुनावी द्वंद्व के बीच कभी मुस्कुराहट तो कभी मायूसी के बीच खेल कबड्डी खेल चल रहा है।
बहरहाल चुनावी परिदृश्य पर नजर डालें तो राजेश अग्रवाल ने पार्टी के विश्वास के आशातीत टक्कर देने वाली भीड़ लेकर शक्ति प्रदर्शन नामांकन के मौके पर कर दिखाया है, ऐसे में अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 10 में उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव व भाजपा के राजेश अग्रवाल के बीच कड़ा मुकाबला की चर्चा होने लगी है। इस विधानसभा सीट को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां से कद्दावर कांग्रेसी नेता और राजपरिवार के सदस्य टीएस सिंहदेव तीन बार से लगातार विधानसभा चुनाव जीतते आ रहे हैं। पहली बार वर्ष 2008 में चुनाव जीतने के बाद वे विधायक बने। वर्ष 2018 में संपन्न विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के साथ कांग्रेस की सरकार बनी। 2023 के चुनाव में प्रत्याशी चयन में टीएस सिंहदेव की भूमिका अहम रही है। विकेट गिराने में भी वे माहिर निकले या कहा जाए प्रत्याशियों का दम-खम भांपने आई टीम ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई। यह भी सत्य है कि वे अपने एक अत्यंत करीबी शफी अहमद को भटगांव विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिला पाने विफल रहे। टीएस सिंहदेव के नामांकन के समय भी शफी की मौजूदगी नजर नहीं आई। ऐसे में इनकी टीएस सिंहदेव से नाराजगी की बातें होने लगी। कोई इसे उम्मीदों पर पानी फिरने से बनने वाली परिस्थिति की उपमा दे रहा है, कोई पारिवारिक कारण इनकी गैर मौजूदगी को बता रहा है। हालांकि शफी अहमद राग-द्वेष से दूर उसी मुस्कान के साथ हाईकमान द्वारा घोषित स्टार प्रचारक की भूमिका निभा रहे हैं। बता दें कि राज्य निर्माण के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव वर्ष 2003 में हुआ। इस चुनाव में अंबिकापुर विधानसभा सीट से भाजपा के कमलभान सिंह भारी मतों से जीतकर विधायक बने थे। इनका मुकाबला कांग्रेस के हैट्रिक विधायक रहे मदन गोपाल सिंह से हुआ था और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2008, 2013 व 2018 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टीएस सिंहदेव व भाजपा के अनुराग सिंह देव के बीच हुआ। तीनों ही चुनाव में अंबिकापुर विधानसभा से भाजपा के प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा और टीएस सिंहदेव चुनाव में बढ़त बनाकर जीतते रहे। इस बार भाजपा ने प्रत्याशी में तब्दीली लाकर राजेश अग्रवाल पर दांव खेला है। अंबिकापुर विधानसभा सीट में राजेश का पहली बार टीएस सिंहदेव से मुकाबला होगा। एक तरफ लगातार तीन बार विधायक बने टीएस सिंहदेव तो दूसरी तरफ नगर पंचायत लखनपुर के राजेश अग्रवाल हैं, जो पूर्व में कांग्रेस के ही अंग रहे।
कांग्रेस का डंका बजाया था सिंहदेव ने
चुनावी समर के बीच इस बात की भी चर्चा हो रही है कि सरगुजा संभाग के लोगों की मंशा टीएस सिंहदेव को मुख्यमंत्री के रूप में देखने की थी, इसलिए पूरे संभाग की 14 सीटों को उन्होंने कांग्रेस की झोली में डाल दिया था। सिंहदेव ने जहां भी चुनावी सभाएं की वहां के प्रत्याशी को आशातीत सफलता मिली। एक ही दिन में सरगुजा के साथ बस्तर तक की दूरी हवाई सैर करते उन्होंने नापा और चुनावी सभाओं में कांग्रेस का डंका बजाया था। सवाल यह उठ रहा है कि क्या जनता पुन: इन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देख रही है? इनके करीबी तो इस बात पर मुहर लगाने में पीछे नहीं हैं। सौ फीसद उम्मीद जता रहे है कि इस बार टीएस सिंहदेव चुनाव जीते और प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो इन्हें हाईकमान प्रदेश के मुखिया की जिम्मेदारी सौंपकर रहेगा। अब जनता इसे कितना पचा पाएगी यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
एक नजर मतदाताओं पर
कुल मतदाता- 256454
पुरुष मतदाता- 126666
महिला मतदाता- 129775
थर्ड जेंडर- 13
टीएस-अनुराग को 2018 में मिले वोट
टीएस सिंहदेव-100439
अनुराग सिंहदेव-60815
जीत का अंतर-39624

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