शहर के कपड़ा कारोबारी व सप्लायर के ठिकाने पर सुबह छह बजे पहुंची थी टीम

शाम साढ़े सात बजे लैपटाप, अटैची व चार बडुे

अंबिकापुर। दिल्ली से आई ईडी की टीम ने शुक्रवार की सुबह छत्तीसगढ़ की राजधानी सहित कई शहरों में आइएएस अफसरों सहित कारोबारियों के ठिकाने पर छापामार कार्रवाई की। इसी क्रम में चार सदस्यीय ईडी की टीम अंबिकापुर के कपड़ा कारोबारी के ठिकाने पर सुबह 6 बजे दस्तक दी। लगभग तीन घंटे तो व्यवसायी के घर का दरवाजा खुला रहा, इसके बाद दरवाजा बंद कर दिया गया। मकान में देर शाम तक ईडी के अधिकारी डटे रहे। सूत्रों का कहना है व्यवसायी के द्वारा शासकीय विभागों में गणवेश के अलावा कई सामानों की सप्लाई की जाती है। कपड़ा सप्लाई में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। हालांकि व्यवसायी के घर पहुंचे अधिकारी बिना टिप्पणी किए चुपचाप शाम साढ़े साज बजे निकल लिए।

जानकारी के मुताबिक सेठ बसंतलाल गली मार्ग अंबिकापुर निवासी अशोक अग्रवाल बड़े कपड़ा कारोबारी हंै, उसकी शहर के सदर रोड स्थित कदम्मी चौक के पास कपड़े की थोक दुकान है। बताया जा रहा है कि व्यवसायी अशोक अग्रवाल के द्वारा ट्रायबल, शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों में गणवेश सहित अन्य सामानों की सप्लाई की जाती है। इसमें बड़े पैमाने पर हेराफेरी की शिकायत ईडी तक पहुंची थी। इसके बाद दिल्ली से हवाई यात्रा करते गुरुवार को ईडी की टीम रायपुर पहुंची, इसके बाद चार सदस्यीय टीम एक निजी वाहन से सड़क मार्ग से होते देर रात 12 बजे अंबिकापुर पहुंची। यह टीम शहर के वीरेंद्र प्रभा होटल में रातभर रुकी। इसके बाद सुबह छह बजे कपड़ा कारोबारी अशोक अग्रवाल के सेठ बसंतलाल गली मार्ग में स्थित मकान में दबिश दी। ईडी की कार्रवाई की भनक स्थानीय पुलिस को भी बाद में ही मिल पाई। इधर बिन बुलाए मेहमान की तरह दरवाजे में मौजूद अनजान लोगों को देख व्यवसायी परिवार के सदस्य भौचक रह गए। बाद में ईडी के अधिकारी कारोबारी के यहां साढ़े 13 घंटे पूछताछ व अन्य कार्रवाई के बाद काफी कुछ दस्तावेजी प्रमाण लेकर साथ जाने की खबर है।

कुत्ता के भौंकने की आवाज सुनकर निकले लोग
व्यवसायी परिवार के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि सुबह कुत्ता के बार-बार भौंकने की आवाज सुनकर जब वे बाहर निकले, तो इनोवा सहित अन्य वाहनों से उतरे लोगों को उन्होंने देखा। जब इनसे कुछ पूछने को हुए तो बड़ा ही रूखा जवाब सुनने को मिला। इनके बोलने के टोन को सुनकर एक पल के लिए वे चुप हो गए। एमपी व सीजी 04 जैसी गाड़ी का नंबर देखकर उन्होंने बात को पलटकर बैठने के लिए कुर्सी देने कहा तो इनमें से एक ने कहा आप लोग अपना काम करिए, कहते हुए उनकी बातों को काट दिया। ऐसे में वे अपने काम में लग गए। कुछ देर बाद वे अशोक अग्रवाल के निवास में प्रवेश कर गए।

काम करने वालों ने दी दस्तक और उल्टे पांव लौटे
व्यवसायी परिवार की बच्ची कोचिंग करने गई थी, जो शाम को छह बजे वापस लौटी। आवाज लगाने पर अंदर से ईडी के अधिकारियों ने पूछा-कौन। बच्ची ने अपना नाम बताया इसके बाद एक अधिकारी ने दरवाजा खोल दिया, बच्ची घर के अंदर गई और दरवाजा बंद हो गया। इसके पहले दोपहर लगभग दो बजे दुकान बंद देखकर यहां काम करने वाली युवतियां व्यवसायी के घर पहुंची। इन्होंने दरवाजे में दस्तक दी तो अंदर से आवाज आई कौन है। युवती ने जब अपना परिचय दिया तो दरवाजा खुला, लेकिन इन्हें अंदर प्रवेश नहीं होने दिया गया और बाहर से अभी जाओ कहते हुए उल्टे पांव वापस भेज दिया।

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