रामानुजगंज। हाथी के आतंक से शहर सहित पास के गांव के लोग डर से सहमे रहे, वही दो घरों के दीवारों को तोड़कर हाथी धान और मक्का खा गए। फार्म हाउस में रखे पाइप भी क्षतिग्रस्त कर दिए। रात भर लोग हाथी के आतंक से डरे एवं सहमे हुए थे। घनी बस्ती में हाथी ना आ जाए इसे लेकर जनहानि व कई घरों के बर्बाद होने की आशंका बनी हुई थी। किसी तरह वन विभाग के गजराज पेट्रोलिंग वाहन के विजय सिंह सहित अन्य लोगों ने हाथी को खदेड़ा। गौरतलब है कि शहर के वन वाटिका एवं इससे लगे गांव में कई दिनों से हाथी की उपस्थिति होना बताया जा रहा था, जहां इक्का-दुक्का घरों को नुकसान करते हुए उनके फसल को भी हाथी नष्ट कर रहे थे। इसी बीच गुरुवार को एक बजे रात से प्रात: 4 बजे तक एक हाथी ग्राम लुर्गी और नगर के वार्ड क्रमांक एक में विचरण किया, यहां दो घरों को नुकसान पहुंचाते हुए फार्म हाउस में रखे पाइप को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। बताया जा रहा है कि ग्राम लुर्गी के पटेल पारा का गोपाल सिंह अपने घर में 10 बोरा धान एवं 6 बोरा मक्का रखा था। हाथी घर के दीवार को तोड़ते हुए उक्त अनाज को खा गया। कुछ दूरी पर स्थित दयाशंकर सिंह का घर भी तोड़ दिया।

नगर में आने से बनी दहशत की स्थिति
हमेशा हाथियों का झुंड नगर से कुछ दूरी पर लगे गांव तक पहुंचता था और किसानों के फसल को नुकसान पहुंचाते हुए उनके घरों को भी तोड़ दिया करता था। इस बार शहर से लगे वार्ड क्रमांक एक में स्थित प्रेमनाथ केसरी के फार्म हाउस में घुसकर हाथियों ने 50 हजार रुपये का सिंचाई पाइप तोड़ डाला। फार्म हाउस के सामने सड़क पार करके शिवकुमार भुइया के खेत में चला गया, जहां पेड़ में लगे केला को खा गया। बगल में सरजू साव के यहां भी हाथी पहुंचा। इसके बाद रामचंद्रपुर जनपद पंचायत कार्यालय एवं वन विभाग के जांच बेरियर होते हुए अस्पताल भवन और देखते ही देखते अटल चौक तक पहुंच गया। इससे नगरवासी भयभीत हो गए थे। हाथी के घनी बस्ती में घुसने का ख़तरा बना हुआ था, जिससे तबाही की स्थिति बन सकती थी। किसी तरह वन अमले ने उसे खदेड़ा। अभी भी हाथी के पहाड़ी मंदिर और वन वाटिका के जंगलों में विचरण करना बताया जा रहा है। ज्ञात हो कि एक सप्ताह पूर्व भी ग्राम लुर्गी, कनकपुर और रामपुर में 16 से 20 हाथियों का झुंड रात में आ गया था और महावीरगंज के 62 वर्षीय बकरी चरवाहा परमेश्वर यादव को मार डाला था। ग्रामीणों को इसका तब पता चला जब जंगल से पूरे बकरी वापस ग्रामीणों के घर पहुंच गए थे लेकिन चरवाहा नहीं पहुंच पाया था। खोजबीन के बीच वह जंगल में मृत पड़ा हुआ मिला।

बाल-बाल बचा ग्रामीण
बताया जा रहा है कि जब ग्राम लुर्गी में हाथी आकर दो घरों को नुकसान पहुंचा रहे थे, उसी समय गांव के ही सुरेंद्र सिंह एवं वकील सिंह मिलकर हाथी को भगाने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच हाथी चिंघाड़ते हुए इन दोनों को दौड़ाने लगा, जिससे किसी तरह कुछ दूर भाग कर विशाल पेड़ के पीछे छिप कर अपना जान बचाए।

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