अंबिकापुर। भ्रष्टाचार इस पूरे तंत्र पर इस तरह हावी हो गई है कि अब धार्मिक स्थल भी भ्रष्टाचार के दंश से बच नहीं पा रहे हैं। सरकार द्वारा प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में होने वाले भीड़ के दौरान सुविधा विस्तार को लेकर राशि उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन यथार्थ पर पहुंचते ही यह राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जा रही है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा अपने सरगुजा प्रवास के दौरान विभिन्न समाज एवं धर्मावलंबियों से मुलाकात कर उनकी मांग के अनुरूप कई तरह की घोषणा की थी, जिसके तहत ग्राम पंचायत रनपुरखुर्द में स्थित तकिया मजार शरीफ़ के लिए मुख्यमंत्री के घोषणा अनुरूप 15 लाख रुपये डीएमएफ मद से पेयजल की उपलब्धता हेतु दी गई थी। हालांकि इस राशि से पानी टंकी निर्माण हेतु पीएचई द्वारा स्टीमेट भी बनाया गया, किन्तु पानी टंकी निर्माण की दक्षता में निपूर्ण विभाग पीएचई से यह कार्य न करा कर ग्राम पंचायत के माध्यम से आरईएस द्वारा यह कार्य जनपद पंचायत अम्बिकापुर से कराया गया किन्तु अब इस कार्य की गुणवत्ता एवं निर्माण को लेकर लोगों ने सवाल खड़ा कर दिया है। पूरे मामले में ग्राम पंचायत मौन है क्योंकि पंचायत का कार्य होने के बावजूद उसे कुछ भी मालूम नहीं है। यह पूरा कार्य किसके माध्यम से हुआ और कौन कर गया है, एक अबूझ पहेली बन कर रह गई है। हालांकि पंचायत यह स्वीकार करता है कि 7.50 लाख रूपये का चेक इस निर्माण कार्य हेतु काट कर दिये गये हैं। पिछले दिनों जिले के कलेक्टर कुंदन कुमार उर्स स्थल तकिया में तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे, वहां पर इस पानी टंकी को लेकर शिकायत भी की गई। लेकिन अब तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है, प्रशासन अब तक हरकत में नहीं आई है। तकिया उर्स आयोजन समिति के संयोजक एवं छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड के उपाध्यक्ष इरफान सिद्दीकी ने कहा कि बहुत मेहनत से प्रयास कर के बड़े नेताओं से धार्मिक स्थलों के लिए पैसा लाते हैं, लेकिन यहां थूक पालिस कर राशि डकार ली जाती है। यह पुरी पानी टंकी नहीं थूक पालिस की गई है।
इस पानी टँकी की चर्चा आरईएस अथवा पंचायत से निर्माण कराने के कारण नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता एवं निर्माण के तरीके को लेकर है। तकनीकी जानकार बताते हैं कि पीएचई के स्टीमेट के अनुसार 40 हजार लीटर की क्षमता का पानी टंकी बनाया जाना था, किन्तु वर्तमान में निर्माण कराए गए पानी टंकी की क्षमता 14 से 15 हजार है, साथ ही गुणवत्ता के हिसाब से गोल सेप में निर्माण होना ज्यादा अच्छा माना जाता है, वहीं वर्तमान में निर्माण कराए गए पानी टंकी में पानी चढ़ाने की व्यवस्था तक नहीं की गई है। पानी टंकी तक ऊपर पहुंचने की व्यवस्था के साथ ही टंकी के चारों ओर रैलिंग सहित अन्य व्यवस्था पीएचई के बनाये स्टीमेट के अनुसार होनी थी। यही कारण है कि धार्मिक आस्था के इस स्थल के निर्माण में हुए भ्रष्टाचार को लेकर सभी में नाराजग़ी है। हालांकि पीएचई के तकनीकि जानकार यह भी कहते हैं कि जहां पानी टंकी का निर्माण कराना होता है वहां पर मिट्टी का परिक्षण भी होना चाहिए, ऐसा कराया गया है कि नहीं यह भी देखना चाहिए।

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