डॉ.लखन सिंह ने कहा-पहले मैं चिकित्सक हूं, बाद में अधीक्षक  

गिरजा ठाकुर

अंबिकापुर। राजमाता श्रीमति देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में रोजाना की तरह राउंड में निकले अधीक्षक डॉ.लखन सिंह जब आपातकालीन चिकित्सा परिसर में पहुंचे, तो रोस्टर अनुरूप लगी ड्यूटी में जिस चिकित्सक का नाम उल्लेखित था, वे नदारद थे। चिकित्सा परिसर में कुछ मरीज भर्ती थे, तो कई उपचार के लिए लाए गए थे। उन्होंने चिकित्सक की गैर मौजूदगी को गंभीरता से लिया। उन्होंने न सिर्फ जूनियर डॉक्टर को यहां आने वाले मरीजों की जिम्मेदारी दी बल्कि वे स्वयं मरीजों को देखने लगे। अधीक्षक डॉ.लखन सिंह ने कहा कि मैं पहले चिकित्सक हूं बाद में अधीक्षक। उन्होंने भर्ती मरीजों की केस हिस्ट्री लेने के साथ उन्हें मिल रही उपचार सुविधा का भी अवलोकन किए।


शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध सरगुजा संभाग मुख्यालय के अस्पताल की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए चल रहे नित्य प्रयास के बाद भी गाहे-बगाहे चिकित्सक व स्टॉफ की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। अस्पताल खुलने के निर्धारित समय तक चिकित्सक व स्टॉफ की उपस्थिति हो, इसके लिए उठाए गए कठोर कदम का परिणाम कहा जाए, इस व्यवस्था में तब्दीली आई है। अस्पताल पहुंचने के बाद अधीक्षक डॉ.लखन सिंह की पहली प्राथमिकता पूरे अस्पताल परिसर का भ्रमण कर ओपीडी से लेकर ऑपरेशन थिएटर तक की गतिविधियों व जांच सुविधाओं की स्थिति जानने की रहती है।

अस्पताल में स्वच्छ वातावरण बना रहे, इसके लिए भी भरसक प्रयास किए गए हैं। ऐसे में स्वच्छक भी अस्पताल की जमीन से दीवारों तक की सफाई में डटे नजर आते हैं। नजर डालें अस्पताल के आपातकालीन चिकित्सा परिसर पर तो गंभीर स्थिति में लाए गए मरीजों को दिखाने ओपीडी की भीड़ में मरीज के स्वजनों का समय जाया न हो, इस लिहाज से यह परिसर काफी संवेदनशील है। यहां सिर्फ मरीजों को देखने की जिम्मेदारी चिकित्सकों व स्टॉफ पर नहीं रहती बल्कि गंभीर मरीज का इसी परिसर में चिकित्सक की निगरानी में तब तक भर्ती कर उपचार किया जाता है, जब तक स्थिति खतरे से बाहर नहीं होती है।

ऐसे संवेदनशील चिकित्सा परिसर मेें ड्यूटी चिकित्सक की अनुपस्थिति देख राउंड में निकले अधीक्षक का मरीजों के प्रति गंभीर होना लाजिमी है। ड्यूटी चिकित्सक किस कारण अपने कर्तव्यस्थल से गायब थे, इसकी पुष्ट जानकारी सामने नहीं आ पाई है। हालांकि चिकित्सालय अधीक्षक ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा किस कारण से ड्यूटी डॉक्टर अपने कर्तव्य स्थल में मौजूद नहीं थे, इसकी जानकारी ली जा रही है। उनकी प्राथमिकता पहले मरीजों को उपचार की सुविधा सुलभ कराना है।


सीटी स्कैन मशीन खराब, निजी जांच सेंटर को मिली जिम्मेदारी
अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग का सीटी स्कैन मशीन खराब होने से एक बार पुन: मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि सोमवार से ही मशीन में खराबी आने के बाद मरीजों के सीटी स्कैन में अवरोध की स्थिति बन रही थी। अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई, जिस पर उन्होंने शहर के विद्या डायग्नोसिस सेंटर में जरूरतमंद मरीजों के जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की है। यहां अस्पताल में निर्धारित किए गए दर पर मरीजों का सीटी स्कैन कराया जाएगा। मशीन के खराब होने की सूचना तकनीकि जानकार को दी गई है, जिसके रायपुर से आने के बाद ही मशीन का सुधार कार्य संभव हो पाएगा। उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी एक-दो दिन में सीटी स्कैन मशीन का संचालन शुरू हो जाएगा।
कूलर बंद करने पर टोका तो युवती ने दिखाया रौद्र रूप  

शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल में कब, कौन किस पर आफत बनकर टूट पड़ेगा, कहना मुश्किल है। सोमवार की रात एक व्यक्ति अस्पताल में कूलर चालू करके सो रहा था। ठंड लगने पर मरीज के साथ अस्पताल में ठहरी युवती ने कूलर को बंद कर दिया। इस पर उक्त व्यक्ति के द्वारा आपत्ति की गई, तो दोनों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। बताया जा रहा है कि बौखलाई युवती ने जमीन में बिस्तर बिछाकर सोए उक्त व्यक्ति की बात पर रौद्र रूप दिखाते हुए पहले तो चप्पल से पीटा, बाद में लात से मारने लगी। गुस्से में तमतमाई युवती की इस हरकत को देखने वाले तमाशबीन बने रहे। घटनाक्रम का वीडियो भी कुछ लोगों ने बना डाला पर उसे युवती के प्रकोप से बचाने कोई आगे नहीं आया। अस्पताल के पुलिस सहायता केंद्र तक बात पहुंची, तो मौके पर पुलिस पहुंची। सोए व्यक्ति से पूछताछ करने पर पता चला कि उसके कोई भी स्वजन या परिचित अस्पताल में भर्ती नहीं हैं। वह केवल कूलर की हवा में सोने के लिए आया था। पूछताछ के बाद जब पुलिस को यकीन हो गया कि उक्त व्यक्ति वाकई में कूलर की हवा में नींद लेने आया था तो उसे अस्पताल से जाने कहा गया।

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