कहा-ये अब समाज की मुख्य धारा से जुड़ेंगे, इन्हे सभी संवैधानिक अधिकार प्राप्त होगा

अंबिकापुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के 12 जनजाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का निर्णय ऐतिहासिक है। ये 12 जनजाति समाज के मुख्य धारा में जुड़ जाएंगे, इन्हें पूरी तरह से संवैधानिक अधिकार प्राप्त होगा। पूर्व राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने अंबिकापुर के भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उक्त बातें कही। उन्होंने कहा अनुसूचित जनजाति में जुड़े लोग काफी दबे, साधारण व गरीब परिवार के लोग हैं। किसी भी क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षा से चयनित होने पर उन्हें इसका लाभ मिलेगा।


पूर्व राज्यसभा सांसद ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक गोड़ जाति के निवासी हैं, इसके अलावा
नगेसिया, सौरा, बिंझिया, कोरवा, कोडाकू व अन्य समाज के लाखों लोग हैं। 12 जातियों का वृहद समुदाय मात्रात्मक त्रुटि के कारण अनुसूचित जनजाति में नहीं आ पा रहा था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में भारत सरकार ने इन जातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का  ऐतिहासिक निर्णय लिया है। देश के इतिहास में पहली बार दबे व साधारण गरीब परिवार के जाति को न्याय मिला है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, सरगुजा के पूर्व सांसद कमलभान सिंह मरावी, पूर्व संसदीय सचिव सिद्धनाथ पैकरा, पूर्व पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सोनी सहित अन्य मौजूद थे।


कांग्रेस की अड़ंगेबाजी से अटका रहा बिल
पत्रकारों के एक सवाल पर पूर्व राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन 12 जनजातियों को शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को चि_ी लिखे थे और मांग पूरा होने पर उन्होंने खुशी जाहिर की है व इसका श्रेय भी लिया है। नेताम ने चुटकी लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का बयान हास्यास्पद है। अगर मुख्यमंत्री के एक चि_ी लिखने पर संवैधानिक अधिकार की प्राप्ति हो जाती, तो 75 साल तक ऐसा क्यों नहीं हुआ। नेताम ने कहा हम लोगों ने छत्तीसगढ़ से यह बिल पास करके आरक्षण देना शुरू किया। शैक्षणिक सुविधा, स्थानीय निकाय के निर्वाचन के लिए अधिकृत रमन सरकार ने किया था। बिल को पास करने के लिए भाजपा सरकार कई बार प्रयास की, इस बीच कांग्रेस ने बिल में अड़ंगा लगाया था। उन्होंने कहा आजादी के 75 साल बाद भी प्रदेश के आदिवासी संघर्ष कर रहे थे। आदिवासी होने के बावजूद उन्हें संवैधानिक अधिकार से वंचित होना पड़ रहा था। केंद्र में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी कोई प्रयास नहीं किया गया। श्री नेताम ने कहा चि_ी लिखने में इतना पावर है तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल चि_ी लिखकर प्रदेश के सड़कों का मरम्मत कराएं, अपराध पर नियंत्रण करें, शराब माफियाओं पर नियंत्रण करें और विकास का काम करें।
सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति थी प्रभावित
राज्यसभा सांसद ने कहा छत्तीसगढ़ की 12 जनजातियों में सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति संवैधानिक अधिकारों से वंचित थी। सरगुजा संभाग के बलरामपुर, जशपुर जिले में रहने वाले नगेशिया किसान, पंडो, गोंड जाति को मात्रात्मक त्रुटि का खामियाजा भुगतना पड़ रहा था। इनकी बोली, भाषा, खान-पान, रहन-सहन, रिश्तेदार, देवी-देवता सब एक थे। मात्रात्मक त्रुटि आड़े आने के कारण इन्हें अनुसूचित जनजाति में शामिल नहीं किया गया था। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सरकार के माध्यम से लोकसभा और राज्यसभा में हम लोगों के द्वारा सामूहिक प्रयास किया गया। अनुसूचित जनजाति आयोग व मंत्रालय में प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। कई जांच व बिल प्रस्तुत करने के बाद भी सफलता नहीं मिली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे संवेदनशील मानते हुए कैबिनेट में छत्तीसगढ़ की इन 12 जनजातियों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की स्वीकृति दी है। उन्होंने इसके लिए अनुसूचित जनजाति आयोग व प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया।

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