गिरजा ठाकुर / एस रंजन सिंह


प्रतिदिन लाखों का कोयला चोरी होने के बाद भी खान प्रबंधन और पुलिस प्रशासन मौन

भटगांव। एसईसीएल भटगांव क्षेत्र का बंद पड़ा महान-2 खदान कोल तस्करों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गया है। जगन्नाथपुर खदान से कोयला चोरी जोरों पर है। प्रतिदिन लाखों रुपये का दर्जनों ट्रिप कोयला चोरी होने के बाद भी खान प्रबंधन और पुलिस प्रशासन मौन है। तस्कर लाखों का वारा-न्यारा कर रहे हैं। बारिश के मौसम में आम तौर पर कोयला चोरी की खबरें कम आती हैं, मगर महान-टू क्षेत्र में इन दिनों बारिश के मौसम में भी कोयला चोरी जोरों पर है। धड़ल्ले से अवैध कोयले का परिवहन किया जा रहा है। चर्चा इस बात की जोरों पर है कि सांठगांठ के दम पर बंद खदान पूरी तरह से तस्करों के कब्जे में है। शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने या दिखावे की कार्रवाई से जिम्मेदारों की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के बंद महान-2 खदान एवं जगरनाथपुर खदान से प्रतिदिन करीब 100 टन कोयले का कारोबार होना कोई बड़ी बात नहीं है। अवैध कारोबार से खान प्रबंधन और शासन को काफी राजस्व की क्षति पहुंच रही है।


असुरक्षित कोयला निकासी हो सकता है जानलेवा
बंद पड़े खदान से ग्रामीणों के द्वारा जिस प्रकार चंद रुपयों के लालच में असुरक्षित तरीके से कोयले की निकासी की जाती है, वह जानलेवा साबित हो सकती है। प्रतिदिन ऐसे मजदूरों का बंद खदान के इर्द-गिर्द कोयला संग्रहण के लिए जमघट लगे रहता है। रोजाना लाखों के काले हीरे की चोरी और राजस्व हानि के बाद भी जिम्मेदार मौन हैं।


पुलिस प्रशासन और खनिज विभाग मौन
महान-2 और जगन्नाथपुर खदान क्षेत्र से हर आम से लेकर खास तक को कोयले की चोरी नजर आती है लेकिन कोयला चोरी का गोरखधंधा खदान प्रबंधन, पुलिस प्रशासन व खनिज विभाग को नजर नहीं आता है। ऐसे में पुलिस प्रशासन के साथ खान प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि बड़े पैमाने पर जारी कोल तस्करी को छूट या मौन स्वीकृति के पीछे की क्या वजह है।


बिना सांठगांठ के संभव नहीं तस्करी
कोयला चोरी से त्रस्त क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बिना सांठगांठ के बड़े पैमाने पर कोयले का अवैध कारोबार संभव नहीं है। प्रतिदिन सैकड़ों टन कोयला चोरी करने पहले तस्कर ग्रामीणों के माध्यम से कोयला निकासी कराते हैं, फिर विभिन्न वाहनों से कोयले का उठाव करा लेते है। दिन-रात जारी कोयले के अवैध कारोबार को अनदेखा करना सवालों के घेरे में है।

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