गिरजा ठाकुर / रंजीत सोनी


धंधापुर प्राथमिक शाला के बच्चों की ऐसी तस्वीर सामने आने पर हेडमास्टर ने स्वीपरों के हड़ताल में जाने की बात कह पल्ला झाड़ा

राजपुर। स्वीपरों के हड़ताल में रहने से स्कूल में पहुंचने वाले बच्चों के हाथों में स्वच्छता की कमान है। स्कूल आने के बाद पहले वे सफाई करते हैं फिर पढ़ाई। बच्चे घर से शिक्षा ग्रहण करने के लिए निकलते हैं और स्कूल में आने के बाद उन्हें पूरे स्कूल परिसर को चकाचक करना पड़ता है। बाल मन भले ही इस काम में रमा रहता हो, पर बच्चों को स्कूल आने के बाद झाड़ू लगाते देख रहे लोगों के मन में यह प्रश्न जरूर घिर जाता है कि अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल पढऩे के लिए भेजा है या सफाई के लिए।
बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत धंधापुर प्राथमिक शाला की ऐसी ही तस्वीर हाल में सामने आई है। शासकीय हिंदी माध्यम के स्कूल में बच्चे पढऩे पहुंचे हैं, लेकिन स्कूल में चपरासी और स्वीपर के नहीं होने से उन्हें पहले सफाई के लिए झाडू फिर पढ़ाई के लिए किताब उठाना पड़ रहा है। विद्यालय का नर्धारित समय सुबह 10 है लेकिन यहां बच्चों को साफ सफाई के लिए समय से पहले आना पड़ रहा है। विद्यालय में शिक्षक-शिक्षिकाएं भी नियुक्त किए गए हैं, लेकिन ये स्वच्छता के लिए बच्चों का हाथ बंटाते हों, ऐसा सामने नहीं आया है। बच्चे स्कूल में गंदे माहौल में आकर बैठें या खुद साफ सफाई करें इससे इनका कोई सरोकार नहीं है। प्राथमिक शाला धंधापुर में पदस्थ प्रभारी हेड मास्टर सरोज पैकरा का कहना है कि सभी स्वीपर हड़ताल पर हैं, जिसकी वजह से ऐसी समस्याएं सामने आ रही हैं। स्कूल में एक रसोईया है जो खाना बनाती है। ऐसे में बच्चे ही स्कूल की सफाई करते हैं।
पुराने ढर्रे पर संचालित हो रहे हिंदी मीडियम स्कूल-
छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार ने शिक्षा के स्तर को सुधारने हरसंभव प्रयास किया है। सरकार ने हर वर्ग के लोगों को ध्यान में रखते हुए पूरे प्रदेश में शासकीय अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलकर मध्यम व गरीब परिवार के बच्चों की शिक्षा के लिए कई सुनहरे अवसर दिए हैं। अभी तक 247 स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खुले हैं, इन स्कूलों में सुविधाओं के साथ ही व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी गई है। सरकार की इन स्कूलों में विशेष नजर है। वहीं हिंदी माध्यम से संचालित शासकीय स्कूल पुराने ढर्रे पर संचालित हो रहे हैं।
डीईओ का आग्रह-मामले को तूल न दें
जिला शिक्षा अधिकारी केएल महिलांगे का इस ओर ध्यान दिलाने पर उन्होंने स्वीपर नहीं होने और नियुक्ति के बाद इनके द्वारा काम छोड़ देने की बात कही। हालांकि यह बात स्वीकार करने योग्य नहीं है। अगर स्कूलों में स्वीपर और चपरासी नहीं रहते हैं तो वहां की साफ-सफाई कौन करेगा, यह अधिकारियों के लिए यक्ष प्रश्न है। इनके कथन से लगता है कि स्कूल में चपरासी, स्वीपर नहीं हैं तो सफाई की जिम्मेदारी बच्चों पर आनी है। यहां तक कि वे इस बात को तूल नहीं देने का आग्रह करते रहे।
बीईओ कार्यालय में कई स्वीपर-चपरासी अटैच
राजपुर विकासखंड के बीईओ कार्यालय में अटैच कर्मचारियों की भरमार है। कई स्कूलों के नाम पर नियुक्त स्वीपर और चपरासी इस कार्यालय में अटैच हैं। कार्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों की आवभगत में कोई कमी ना रहे इसके लिए अटैच कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सवाल उठता है कि शिक्षा विभाग के पास स्कूलों के लिए तृतीय और चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों की कमी है तो यहां अनावश्यक कर्मचारियों को अटैच क्यों रखा गया है। ऐसे में प्रतीत होता है अधिकारी अपनी सुविधाओं को दुरुस्त रखने स्कूलों में बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बना रहे हैं।

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