सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले जमकर चल रहा प्रदर्शन
अंबिकापुर। सर्व आदिवासी समाज के बैनर तले पहुंचे पूर्व सांसद साेहन पोटाई ने परसा पहुंच आंदोलनकारियों के समर्थन में हसदेव अन्य के जल-जंगल-जमीन को बचाने हुंकार भरी है। विरोध प्रदर्शन में महिलाएं आगे हैं। पूर्व सांसद के पहुंचने के बाद आंदोलन की गति बढ़ गई है। कोयला उत्खनन के विराेध में एनएच 130 पर चक्काजाम किया गया है, वहीं परसा ईस्ट, केते खदान से कोयला ले जाने वाले रेल्वे ट्रेक को भी ग्रामीणों ने बाधित कर दिया है। ग्रामीणों की एकजुटता और काफी संख्या में इनकी मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने एनएच से गुजरने वाले वाहनों का मार्ग बदल दिया गया है। हजारों की संख्या में प्रदेश भर से पहुंचे आदिवासी ग्रामीण सड़क पर डटे हुए हैं। चेतावनी दी गई है कि कोयला उत्खनन नहीं रोका गया तो प्रदेश भर में आदिवासी सड़कों पर उतरेंगे। विदित हो कि परसा में कोल उत्खनन की खिलाफत एक दशक से हो रही है। हसदेव अरण्य को बचाने के लिए चल रहे आंदोलन को पूर्व में राहुल गांधी भी मदनपुर पहुंचकर समर्थन दे चुके हैं। यह वह दौर था जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नही थी। इस दौरान राहुल गांधी ने आश्वस्त किया था यदि कांग्रेस की सरकार बनी तो आपको जंगल, जमीन से नहीं हटाया जाएगा। इधर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के भूपेश बघेल के नेतृत्व में चल रही सरकार के द्वारा परसा कोल ब्लॉक उत्खनन और परसा ईस्ट बासेन में कोयला खनन के एक्सटेंशन को अनुमति दे दी है। ऐसे में हसदेव अरण्य को लेकर आंदोलन व्यापक होने लगा है। हसदेव बचाओ अभियान के समर्थन को ना केवल देश बल्कि विदेशाें से भी समर्थन मिल रहा है। इन सबके बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं कि देश को कोयले की जरूरत है लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नियम-कानून को ताक पर ना रखा जाए। इधर हसदेव अरण्य आंदोलनकारी और पर्यावरण के लिए संघर्षरत लोग यह दावा करते हैं कि प्रदेश के 180 कोल ब्लॉक में कोयला भंडारण 58 हजार मिलियन टन है, इनमें से 130 कोल ब्लॉक जंगलों से बाहर हैं। जिस हसदेव अरण्य में खनन को लेकर विरोध में आदिवासी वहीं दूसरी तरफ सरकार है वहां केवल पांच हजार टन कोयले का भंडार है। यह भी सवाल उठ रहा है कि हाथियाें के रहवास और मध्य भारत के फेफड़े के रूप में पहचाने जाने वाले हसदेव के घने जंगल, जिसे भारतीय वन्य जीव संस्थान ने जैव विविधता से परिपूर्ण वन क्षेत्र माना है, जिसमें स्पेशिज वन कैटेगरी के जानवरों की रिहाइश है, उसे लेकर ही सरकार उत्खनन की जिद पर क्याें है।
मुख्यमंत्री को लिखी यह बात-
सर्व आदिवासी समाज ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को संबोधित पत्र में लिखा है कि, खनन प्रस्ताव अनुमति में बहुत सारी वैधानिक कमियां, खामियां हैं। पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में आने वाले सरगुजा में किसी भी काम के लिए ग्राम सभा की अनुमति जरूरी है लेकिन किसी भी ग्राम सभा से अनुमति नही ली गई है बल्कि फर्जी ग्राम सभा की कवायद प्रशासन की है। सर्व आदिवासी समाज की ओर से कहा गया है कि आदिवासियाें में टोटम प्रणाली होती है, जो पौधे जीवित एवं स्थान पर आधारित होते हैं, पेन देव-देवी जो आदिवासी के पूर्वज हैं वे उस भूमि की विशिष्ट स्थानाें पर निवास करते हैं। उन्हे किसी दूसरी भूमि मेंं स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है। विस्थापन का मतलब है कि,आदिवासियाें के दृढ प्राकृतिक आस्था प्रणाली का विनाश होगा। पत्र में चेतावनी दी गई है कि परसा कोल ब्लॉक उत्खनन की अनुमति को निरस्त कर परसा ईस्ट बासेन में कोयला खनन को तत्काल बंद नही किया गया तो पूरे प्रदेश में सर्व आदिवासी समाज उग्र आंदोलन करेगा।

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