संभाग के समिति प्रबंधकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर  विपणन अधिकारी को सौंपा ज्ञापन  
अंबिकापुर. सरगुजा संभाग में 15 करोड़ 20 लाख का धान सूखत में चले जाने का मामला प्रकाश में आया है इस मामले में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के सीईओ द्वारा पत्र जारी कर संभाग भर के 100 समिति प्रबंधकों व प्रभारियों पर अपराध दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है जिसके बाद से समितियों में हड़कंप मच गया है। आज पूरे संभाग भर से समिति प्रबंधक मामले में अपना पक्ष रखने के लिए बैंक के कार्यालय पहुंचे थे परन्तु यहां किसी प्रकार की बात नहीं बनने पर समिति प्रबंधक अब रायपुर कूच करने की तैयारी में हैं।
विदित हो कि धान खरीदी प्रारंभ होने के बाद से ही धान उठाव का काम काफी सुस्त था ट्रांसपोर्टरों से विभिन्न मुद्दों पर शासन.प्रशासन का विवाद होने पर कई ट्रांसपोर्टरों ने धान का उठाव करने से ही इंकार कर दिया जिसके बाद प्रशासन ने दबाव बनाने के लिए कई ट्रांसपोर्टरों पर कार्यवाही भी की थी परन्तु इसके बाद भी धान का उठाव नहीं हुआ। जिस कारण भारी मात्रा में धान समितियों में ही पड़ा रह गया। खरीफ विपणन वर्ष २०२०-२१ में सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर और कोरिया जिले में धान खरीदी कराया गया था। खरीदी पूर्ण होने के बाद समितियों से संग्रहण केन्द्र से उठाव व कस्टम मिलिंग का काम चल रहा है। उपार्जन केछा्रों द्वारा खरीदे गए धान के मिलान और भौतिक सत्यापन के बाद चारों जिले में अप्रत्याशित कमी सामने आई है। चारों जिले में पहली बार ७९ हजार ९९५ क्विंटल धान कम पाया गया है। जिसमें सूरजपुर जिले से सर्वाधिक गड़बड़ी सामने आई है। यहां ३१ केन्द्रों में खरीदे गए धान की तुलना में ४२ हजार ७७३ क्विंटल धान कम पाया गया है। बलरामपुर जिले में २३ हजार ९२५, सरगुजा में ८५५६ तथा कोरिया में ४७८१ क्विंटल धान कम पाया गया है। धान शॉर्टेज पाए जाने समिति प्रबंधकों को दो-दो बार नोटिस जारी किया गया था। जवाब नहीं दिए जाने पर  सहायक विपणन अधिकारी ने एफआईआर के निर्देश दिए हैं। इसके बाद से समिति प्रबंधकों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। वह चारों जिले के समिति प्रबंधक शुक्रवार को अंबिकापुर कलेक्टोरेट पहुंच कर विपणन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।

शासन-प्रशासन स्तर पर हुई गलती
समिति संघ ने कहा कि एफआईआर का जो नोटिस जारी किया गया है वह गलत है। विपणनन वर्ष २०२०-२१ में जो धान खरीदी हुआ था। समिति स्तर पर सुखद मान्य को लेकर  कई लेटर जारी किया था। अगर सुखत मान्य नहीं होता है तो समिति स्तर पर जो अनुबंध होता है उसे पालन किया जाए। उस अनुबंध के अनुसार ७२ घंटे के अंदर धान का उठा होना चाहिए था। बफर लिमिट दिया गया था। जितना भी धान खरीदी होता है उसके अंदर ही रखा था। इसके बावजूद भी एक भी कंडिका का पालन नहीं किया गया है।

दुर्भाग्य आज भी पड़े हैं समितियों में धान
समिति प्रबंधकों का कहना है कि आज भी समितियों में पड़ा हुआ है। जो दुर्भाग्य है। जिसके कारण सुखद व शॉर्टेज आया है। यह शासन-प्रशासन का समिति स्तर का बात को फॉलो नहीं करते हैं। समिति कर्मचारियों का किसी भी तरह की कोई गलती नहीं है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति संघ के उपाध्यक्ष सानित कुमार कुशवाहा ने कहा कि अगर किसी भी समिति के खिलाफ होता है तो सारा समिति एक लाइन से बंद कर दिया जाएगा। शासन की महत्वपूर्ण योजना किसान क्रेडिट कार्ड, नरवा घुरवा द्वारा कंपोजिस्ट खाद के कामों में भी प्रभावित होगा।

जेल में आराम से रहेंगे
समिति प्रबंधकों ने कहा कि बाहर उन्हें दोषी की तरह देखा जा रहा है। अधिकारियों द्वारा इतना प्रताड़ित किया जा रहा है कि यदि एफआईआर हो जाएगा तो वे कम से कम थाने या जेल में चैन से तो रहेंगें। वहीं इस मामले में संभाग मु यालय से कोई राहत ना मिलती देख अब समिति प्रबंधक व आदिम जाति सेवा सहकारी संघ के पदाधिकारियों ने रायपुर जाने की तैयारी कर ली है तथा वहीं जाकर अपनी समस्या से अधिकारियों व शासन को अवगत कराने की तैयारी कर रहे हैं।  

कंपोजिट बिल्डिंग में डाकघर संचालित करने की मांग
अंबिकापुर. जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता ने कलेक्टोरेट परिसर अ िबकापुर में स्थित विगत 40 वर्षों से संचालित डाकघर को क पोजिट बिल्डिंग में पुनः: स्थापित किए जाने की मांग को लेकर कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री को पत्र प्रेषित किया है। उन्होंने पत्र के माध्यम से अवगत करया है कि जिला न्यायालय परिसर एवं कलेक्ट्रेट परिसर अ िबकापुर में पूरे जिले से नागरिक एवं कर्मचारीगण आते हैं। न्यायालय से संबंधित नोटिस की तामिली एवं पत्र संव्यवहार न्यायिक प्रक्रिया अंतर्गत आता है। कलेक्ट्रेट परिसर में जिले के समस्त ऑफीस विद्यमान हैं तथा राजस्व न्यायालय का कार्य भी कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित है। जहां पूरे क्षेत्र से पक्षकार आकर अपने प्रकरण की पैरवी करते हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में ही लगभग पुरे शासकीय कार्यालय हैं, जिसमें बैंक ट्रेजरी इत्यादि स्थित हैं। डाक टिकिट, पत्र संव्यवहार एवं अनेक ऐसे फॉर्म जो डाकघर के माध्यम से ही उपलब्ध हो सकते हैं। उक्त हेतु पक्षकारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की अनुमति से कलेक्टर परिसर तथा न्यायालय परिसर में विगत 40 वर्षों से डाकघर का संचालन होता चला आ रहा था, जिसे बंद कर दिया गया है। न्यायहित में डाकघर का संचालन पुन: कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित क पोजिट बिल्डिंग में स्थापित किए जाने हेतु सक्षम आदेश दिया जाना नागरिकों, पक्षकारों एवं कर्मचारियों के हित में होगा।

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