अपनी अव्यवस्था को लेकर इतिहास में याद किए जाएंगे प्रधानमंत्री

मनेंद्रगढ़ ! रमेश सिंह उपाध्यक्ष प्रदेश कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ एवं सदस्य पीसीसी ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री का शपथ लिया था ! भारतीय जनता पार्टी के लोग उनके कार्यकाल की बड़ाई करने में फूले नहीं समा रहे हैं ! यह बात सही है कि जो किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया वह हमारे प्रधानमंत्री ने कर दिखाया! परंतु बड़ा सोचनीय विषय है कि हमारा देश चंद पूंजीपतियों के हाथों गुलाम होने जा रहा है! प्रधानमंत्री के कार्यकाल में संविधान द्वारा रचित संघीय ढांचे को देश के लोग बिगड़ते हुए हुए देख रहे हैं किस तरह से राज्यों के ऊपर केंद्र का दबाव बढ़ता जा रहा है ! कोविड का वैक्सीन भी राज्यों तक नहीं पहुंच रहा है यह एक सोचनीय विषय है ! प्रधानमंत्री अपने कार्यकाल में लगभग 200 योजनाओं की घोषणा कर उन्होंने हर क्षेत्र में रिकॉर्ड बनाया है चाहे वह बेरोजगारी का सफर हो प्रवासी मजदूर का सफर हो मौत का सफर हो सभी क्षेत्रों में रिकॉर्ड कायम हुआ है ! कार्यकाल के 2555 दिन में प्रधानमंत्री ने 212 अंतरराष्ट्रीय 470 घरेलू यात्राएं किए हैं इतनी यात्रा आज तक किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया! उन्होंने प्रचार में 7658 करोड़ रुपए खर्च किए हैं बैंकों से 878 करोड़ रुपए प्रतिदिन बड़े लोगों को ऋण दे रहे हैं 372 करोड रुपए प्रतिदिन बड़े लोगों का ऋण माफ किया गया केंद्र शासन को रिजर्व बैंक से 7 वर्ष में 213 करोड़ रुपए प्रतिदिन की दर से डिविडेंड दिया जाता है पब्लिक सेक्टर की 19 कंपनियों को बिक्री कर दिया गया जिससे केंद्र शासन को 329917 करोड़ रुपए प्राप्त हुआ अर्थात 150 करोड़ रुपए प्रतिदिन प्राप्त हो रहा है परंतु केंद्र शासन इन रुपयों को कहां खर्च किया यह स्पष्ट नहीं है ! प्रधानमंत्री 2 करोड़ नौकरी देने का वादा किए थे परंतु अभी तक जितने भी प्रधानमंत्री हुए उनके कार्यकाल से तुलना की जाए तो सबसे कम नौकरी वर्तमान प्रधानमंत्री के कार्यकाल में बेरोजगारों को उपलब्ध हुआ है! पिछले 7 वर्षों में मात्र 88 लाख 7 हजार 335 नौकरियां 2 करोड़ की जगह दी गई है! इसी तरह राज्य सरकारों ने पिछले 7 वर्षों में 38 लाख नौकरी दी है दोनों को मिलाकर 47 लाख नौकरी दी गई नौकरी पाने वालों की संख्या देखें एक करोड़ 19 लाख है किस प्रकार बेरोजगारी समाप्त करने का दावा करने वाले प्रधानमंत्री के कार्यकाल में बेरोजगारी अपने चरम सीमा पर पहुंच गई युवाओं के तरफ प्रधानमंत्री का कोई ध्यान नहीं है नोटबंदी के पहले 32 दिन में लाइन में खड़े लोगों में से 104 की मृत्यु हुई प्रधानमंत्री मैं 50 दिन का समय मांगा की मैं काला धन वापस ला दूंगा परंतु कुछ भी नहीं हुआ ! पिछले वर्ष प्रवासी मजदूरों को 4 माह की मोहलत दी गई परंतु उन्हें कोई सुविधा प्रदान नहीं की गई उन्हें पैदल अपने परिवार के साथ अपने गृह ग्राम जाना पड़ा उस दौरान 971 लोगों की मृत्यु हुई कोविड के समय कितनी दूर व्यवस्था थी वह किसी से छिपी नहीं है ! स्वास्थ्य एवं शिक्षा पूर्ण रूप से धराशाई हो गया यदि पानी और ऑक्सीजन ना हो तो मनुष्य का सफर का अंत हो जाता है कोविड के समय आक्सीजन की कमी हॉस्पिटल में वेड की कमी से हजारों लोग की मृत्यु हुई ! उपरोक्त सभी व्यवस्थाओं के लिए प्रधानमंत्री इतिहास में याद किए जाएंगे ! जनता का धैर्य देखिए वह 7 वर्षों से 15 लाख रुपए खाते में आने का इंतजार कर रही है और दूसरी ओर प्रधानमंत्री ममता बनर्जी के लिए 30 मिनट का भी इंतजार नहीं कर सके और पूरे देश में हंगामा हो गया निश्चित रूप से प्रधानमंत्री हर क्षेत्र में रिकार्ड कायम किए हैं!

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