रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित त्रिकुंडा धान उपार्जन केंद्र में जिले का सबसे अधिक धान 81742 क्विंटल की खरीदी की गई वहीं अभी तक यहां मात्र 38205 क्विंटल धान का ही उठाव हो पाया है अभी भी खुले आसमान के नीचे 45536 क्विंटल धान पड़ा हुआ है परंतु इसे उठाने के लिए जिला विपणन अधिकारी के द्वारा तत्परता नहीं दिखाई जा रही है जिस कारण समिति चिंतित है वहीं कलेक्टर को भी पत्र लिखकर इस से अवगत करा धान उठाव करवाए जाने का निवेदन किया है।

गौरतलब है कि धान की खरीदी के लिए प्रशासन के द्वारा पूरी तत्परता बरती जाती है वहीं धान खरीदी के बाद जिला विपणन अधिकारी के लापरवाह रवैया के कारण उठाव में विलंब होता है। जिसका खामियाजा समितियों को उठाना पड़ता है जिले में 40 धान उपार्जन केंद्र है जहां अधिकांश समितियों में खुले आसमान के नीचे धान की खरीदी होती है ऐसे में धान को सुरक्षित रखना समितियों के लिए बड़ी चुनौती रहती है। जिले में सबसे अधिक धान की खरीदी त्रिकुंडा धान उपार्जन केंद्र में हुई परंतु धान उठाव में यहां जिला विपणन अधिकारी के लापरवाही से अब तक मात्र 38205 क्विंटल ही धान का उठाव हो पाया है वहीं अभी भी खुले आसमान के नीचे 45536 क्विंटल धान पड़ा हुआ है जिसे लेकर समिति चिंतित है एवं कलेक्टर को पत्र लिखकर तत्काल धान उठाव करने का निवेदन किया है।

बफर लिमिट से कई गुना धान है समितियों में- जिले के अधिकांश समितियों में बफर लिमिट से कई गुना धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है वहीं डीयो टीयो के नहीं कटने से धान नहीं उठ पा रहा है जबकि समितियां लगातार इसके लिए पत्राचार भी कर रही हैं।

72 घंटे में होना चाहिए उठाव- धान खरीदी होने के बाद यदि धान बफर लिमिट से अधिक है तो इसे 72 घंटा में अनुबंध के अनुसार उठ जाना चाहिए परंतु अनुबंध सिर्फ कागजों में होता है धान का उठाव के लिए जिम्मेवार लापरवाही बरतते हैं जिसका खामियाजा समिति को उठाना पड़ता है एवं समितियां घाटे में जाती हैं।

मौसम की खराबी एवं धूप में धान को हो रहे नुकसान- शासन के निर्देशानुसार धान प्रति बोरी 40kg 700 ग्राम खरीदी हुई है परंतु समय पर परिवहन नहीं होने कारण प्रति बोरी 1 किलोग्राम से डेढ़ किलोग्राम तक कम होने लगा है जिस कारण समितियों को बड़ा नुकसान हो सकता है वहीं मौसम की खराबी एवं हो रही बूंदा बांदी से भी समिति नुकसान में पड़ेंगे।

पिछले वर्ष जून तक हुआ था उठाव- पिछले वर्ष जिला विपणन अधिकारी की लापरवाही से जून तक धान का उठाव हुआ था जिस कारण बड़ी मात्रा में धान भी खराब हो गए थे जिसे जैसे तैसे समितियों के द्वारा मैनेज किया गया था। इस बार भी कहीं वैसी स्थिति निर्मित ना हो जाए।

इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी को उनका पक्ष जानने के लिए कई बार कॉल किया गया परंतु उनके द्वारा मोबाइल रिसीव नहीं किया गया।

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