विवेक पांडेय बलंगी-। जिस ढंग से बलंगी व आसपास के गांव में अवैध शराब का कारोबार फल फूल रहा है। उस पर जहां पुलिस विभाग तिरछी नजर कर ले रही है तो वही इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए जिम्मेदार आबकारी विभाग की नजरें भी शराब के इस अवैध कारोबार पर इनायत क्यों रहती है- यह तो विभाग ही जाने, पर यह जरूर है की क्षेत्र में जिस तरह से अवैध शराब के कारोबार का धंधा फल फूल रहा है इससे विभाग के औचित्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री का गढ़ बन चुके बलंगी समेत आसपास के क्षेत्र शाम ढलते ही मदिरालय में तब्दील हो जाते है। जिससे आए दिन ग्रामीणों को दिक्कतों का ही नहीं बल्कि शराबियों के द्वारा बेवजह किये जाने वाले अभद्र व्यवहार का भी सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना तो इन गांवों की महिलाओं व बच्चियों को करना पड़ रहा है जिनकी शराबियों की हरकतों से परेशान हो शाम ढलते ही घरों में कैद हो कर रहना मजबूरी हो गई है। क्षेत्र के कई गांवों में देसी और अंग्रेजी शराब गांव में रहने वाले कुछ लोगो द्वारा घरों से खुलेआम बेच जा रहा हैं। ग्रामीणों के अनुसार शराब के इस व्यवसाय के कारण घरों में अशांति फैल रही है। ग्रामीणों की माने तो उन्होंने कई बार पुलिस व आबकारी विभाग के अधिकारियों को सूचना भी दिया । परन्तु जिम्मेदार अधिकारियों के कान में जूं तक नही रेंगी। यहां जिस ढंग से खूलेआम इस अवैध कारोबार का संचालन किया जा रहा है। उससे तो पुलिस व आबकारी विभाग की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता। बलंगी मझौली, हरदीबहरा, कोगवार, गुड़रू, झापर सहित दर्जनों गांवों में खुलेआम शराब बिक्री की जा रही है। वहीं बलंगी बस स्टैंड में होटल, अंडा दुकान और बस स्टेण्ड के समीप स्थित घर से भी अवैध शराब बेचे जा रहा हैं। खुलेआम क्षेत्र में हो रहे अवैध शराब के इस कारोबार से गांव के युवका नशे की लत में पड़ कर अपनी जिन्दगी तबाह कर रहे हैं। वहीं इसे रोकने के बजाए इस काम को पुलिस व आबकारी विभाग चंद रुपयों के लिए इसे बढ़ावा देने में लगी है। क्षेत्र के गांवों में अवैध शराब का कारोबार इस कदर बढ़ गया है कि खुलेआम चाय, पान, किराना दुकानों पर शराब बेची जा रही है। शराब के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने आबकारी महकमे की स्थापना की है। लेकिन यह विभाग कभी इस पर कार्रवाई करता है ऐसा तो इन गांवों के हालात देखकर अब तक प्रतीत नहीं हुआ है और ना ही बेचने वालों पर इस विभाग का खौफ है। जबकि आबकारी महकमे में जिला स्तर से लेकर मैदानी स्तर तक के कर्मचारियों की फौज है फिर भी विभाग का इस अवैध कारोबार पर ध्यान ना देना कई सवालों को जन्म देता है जिसका खामियाजा सरकार के राजस्व के साथ-साथ युवा वर्गों पर पड़ता है जो इसकी चपेट में आते हैं।

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