कहा-ओडिशा से 3 गुना कम वजीफा, समाधान नहीं होने तक करेंगे काम का बहिष्कार

अंबिकापुर। राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर’ सहित पूरे छत्तीसगढ़ के एमबीबीएस इंटर्न वजीफे में सम्मानजनक वृद्धि की मांग को लेकर 6 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इनके द्वारा काम का बहिष्कार करने की घोषणा की गई है। इसी क्रम में गुरूवार को एमबीएसएस इंटर्न कर रहे छात्र-छात्राओं ने जमकर हल्ला बोला, और अस्पताल परिसर में ही रैली निकाली।

इस संबंध में अधिष्ठाता को सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि, 24 से 36 घंटे की ड्यूटी के बावजूद उन्हें केवल 15,900 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड मिलता है, जबकि पड़ोसी राज्य ओडिशा में 44,319 रुपये और अन्य राज्यों में लगभग 30,000 रुपये दिया जाता है। इन्होंने कहा है कि पिछले कई महीनों से प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन देने, मुलाकात करने के बाद सिर्फ समाधान का आश्वासन मिला, लेकिन प्रक्रिया में अत्यधिक विलंब हो रहा है। इस बीच उन्होंने दो दिवसीय प्रतीकात्मक काला फीता लगाकर विरोध प्रदर्शन और शांतिपूर्ण मार्च भी किया, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इंटर्न्स का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो उनकी पूरी प्रशिक्षुता समाप्त हो जाएगी और उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाएगा। मजबूरन उन्हें लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण सभी साधन अपनाने के बाद यह निर्णय लेना पड़ा है।

मरीजों परेशान हों, उद्देश्य नहीं

इंटर्न्स ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है। हड़ताल के दौरान आपातकालीन और जीवनरक्षक सेवाएं जारी रहेंगी। इस दौरान मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की असुविधा होती भी है, तो इसकी जिम्मेदारी शासन की होगी। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण और रचनात्मक संवाद के लिए हमेशा तत्पर हैं। इन्होंने आग्रह किया है कि, इस अनिश्चितकालीन हड़ताल की औपचारिक सूचना के रूप में माना जाए। इससे सभी विभागाध्यक्षों को भी अवगत कराया गया है, और उम्मीद जताई है कि उनकी मांगों के प्रति सरकार गंभीर होगी। इधर अस्पताल में एमबीबीएस इंटर्न को सौंपी गई जिम्मेदारियों के प्रभावित होने की संभावना बन रही है।

इनकी मुख्य मांग

वजीफा 15,900 से बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए। 24 से 36 घंटे ड्यूटी निर्वहन के बीच उन्हें कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, और जीवन यापन में कठिनाई जैसी परिस्थितियां निर्मित होती है। उन्होंने 2 दिवसीय काला फीता लगाकर काम करने और शांतिपूर्ण मार्च करके इस ओर शासन का ध्यानाकर्षण कराया, लेकिन कोई समाधानकारक पहल नहीं होने से उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसा कदम उठाना पड़ा है। इन्होंने कहा हम मरीजों को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन इतने कम स्टाइपेंड राशि में आने वाली दिक्कतों के कारण वे मानसिक पीड़ा झेल रहे हैं। सभी विकल्प आजमाने के बाद ही उन्होंने यह कदम उठाया है। इस दौरान काफी संख्या में एमबीबीएस इंटर्न कर रहे विद्यार्थी मौजूद थे।

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