न्यायालय अंबिकापुर के सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश ने 2019 के मामले में दिया आदेश  

किसी प्रकार का अवरोध आने पर केस सीबीआई को सौंपने का विकल्प दिया गया  

अंबिकापुर। शहर के बहुचर्चित पंकज बेक की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में अंबिकापुर न्यायालय के सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश ने मामले की पुन: जांच के आदेश दे दिये हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में किया जाए। निष्पक्ष विवेचना संभव नहीं होने या जांच में किसी प्रकार की अड़चन जैसी स्थिति में मामले की संपूर्ण जांच, विवेचना का काम सीबीआई को सौंपने कहा गया है। आदेश की प्रतिलिपि पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज को भेजने के निर्देश दिये गये हैं।

बता दें कि, अंबिकापुर कोतवाली पुलिस की हिरासत में 21 जुलाई 2019 को रहे सूरजपुर जिले के भटगांव थाना अंतर्गत ग्राम सलका-अधिना निवासी पंकज बेक पिता अमीर साय 21 वर्ष की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इसे चोरी के एक मामले में पुलिस ने हिरासत में लिया था और पूछताछ के लिए पुलिस कंट्रोल रूम में रखा गया था। इसके बाद उसकी लाश कलेक्टर बंगला रोड में स्थित एक निजी अस्पताल परिसर में फांसी पर लटकी मिली थी। पुलिस का कहना था कि पंकज बेक हिरासत से भागने के बाद फांसी लगाकर खुदकुशी कर लिया था। न्यायिक जांच रिपोर्ट में भी युवक की मौत का कारण एंटी मॉर्टम हैंगिंग बताया गया था। मामले में मृतक के स्वजन शुरु से ही पुलिस पर मारपीट, प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगा रहे थे। इलाके के लोगों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन भी किया था। मामला तूल पकड़ने के बाद कोतवाली थाना के तत्कालीन प्रभारी विनीत दुबे के अलावा एसआई प्रियेश जॉन, मनीष यादव सहित पांच लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज करके सभी को निलंबित कर दिया था। इसके बाद विभागीय जांच, आपराधिक विवेचना जैसी कई कानूनी प्रक्रियाएं चली, और अग्रिम जमानत का लाभ आरोपितों को मिला था। लगभग सात वर्ष बाद आए जांच के न्यायालयीन आदेश के बाद ‘पंकज बेक की पुलिस हिरासत में मौत’ का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अदालत ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया है और पुलिस अधीक्षक के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में पुन: विवेचना कराने के निर्देश दिये गये हैं। जांच में किसी प्रकार का अवरोध आने जैसी परिस्थिति में प्रकरण को सीबीआई को सौंपने कहा गया है।

कोतवाली थाना पुलिस की हिरासत में रहे पंकज बेक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस का दावा था कि वह हिरासत से भागकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया है। न्यायिक जांच रिपोर्ट में भी मौत का कारण ‘एंटी मॉर्टम हैंगिंग’ बताया गया था। हालांकि मृतक के स्वजन शुरू से ही पुलिस पर मारपीट, प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगा रहे थे। न्यायालय के इस आदेश के बाद मृतक के परिजनों में न्याय की नई उम्मीद जगी है। न्यायालयीन आदेश के बाद पुलिस विभाग की भूमिका और पूर्व में हुई विवेचना एक बार फिर जांच के दायरे में आ सकती है।

राजर्वधन सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता, जिला न्यायालय अंबिकापुर

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