अंबिकापुर। सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामकुमार टोप्पो के द्वारा प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की मौजूदगी के बीच अंबिकापुर के राजमोहिनी देवी भवन में किए जा रहे सभा और रैली के बीच आईजी सरगुजा रेंज के समक्ष गिरफ्तारी देने के लिए बढ़ाया गया कदम, और कार्यकर्ताओं को आड़े लेकर वापस होने को कांग्रेस ने सवालों के घेरे में लिया है। इनक कहना है कि कार्यकर्ताओं को आड़े लेकर गिरफ्तारी टालना सिर्फ ड्रामेबाजी है। कांग्रेस ने कहा है कि, विधायक चाहते तो सीतापुर थाना में गिरफ्तारी दे सकते थे। विधायक का हड़ताली कर्मचारियों से यह अपील करना कि मैं पुलिस जांच में पूरा साथ दूंगा, आप काम पर लौट जाएं इसे लेकर भी तीखी प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। इधर विधायक ने अपने समर्थकों का धन्यवाद भी ज्ञापित किया है, जिन्होंने उन्हें गिरफ्तारी देने से रोका, और आधे रास्ते से उन्हें वापस लेकर आ गए। विधायक ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे गिरफ्तारी कब देंगे।
बता दें कि, नायब तहसीलदार से मारपीट के विरोध में प्रदेशभर के तहसीलदार सहित अन्य राजस्व कर्मचारी सामूहिक अवकाश व हड़ताल पर हैं। मारपीट के मामले में विधायक और समर्थकों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कनिष्ठ राजस्व अधिकारी संघ छत्तीसगढ़ ने सरगुजा रेंज के आईजी को भी ज्ञापन सौंपा है, और गिरफ्तारी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है। इन सबके बीच शुक्रवार को विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा कि वे सरगुजा आईजी के समक्ष गिरफ्तारी देना सुनिश्चित किए हैं। छत्तीसगढ़ में सुशासन की सरकार है, यहां उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने में भी कोई परेशानी नहीं हुई, इसलिए अब वे खुद गिरफ्तारी भी देंगे। साथ ही उन्होंने कहा था कि, कांग्रेस शासनकाल में ऐसा नहीं होता था। राजस्व अधिकारियों को उनकी गिरफ्तारी के लिए हड़ताल करने की जरूरत नहीं है। इसके बाद विधायक काफिले के साथ अंबिकापुर के लिए रवाना भी हुए, लेकिन मंगारी में उन्हें समर्थकों ने रोक लिया तो वे वापस सीतापुर लौट गए और देर रात तक रेस्ट हाउस में समर्थकों के साथ बैठे रहे। इस दौरान उन्होंने मीडिया के समक्ष स्पष्ट किया कि, उन्हें समर्थकों ने रोक लिया, इनका सम्मान करते हुए वे वापस लौट आए हैं।

मैं नहीं मानता कि विधायकजी ने बहुत बड़ी गलती की है

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री और अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल की प्रतिक्रिया उनकी जुबानी में कुछ इस प्रकार है-”जो भी घटना हुई, एक्चुअल में नहीं होनी थी। विधायकजी ने बहुत अच्छा संदेश दिया कि मैं कानून का पालन करते हुए अपनी गिरफ्तारी देने जा रहा हूं, और कोई भी हड़ताल करने की आवश्यकता नहीं है। मेरे ख्याल से उनके इस कदम को देखते हुए जो भी हमारे कर्मचारी-अधिकारी हड़ताल पर हैं, उनको हड़ताल वापस ले लेना चाहिए। सत्ता पक्ष में रहते हुए भी हमारे विधायकजी ने बहुत अच्छी सोच रखी, अगर मेरे ऊपर एफआइआर दर्ज है तो मैं गिरफ्तारी देने के लिए तैयार हूं। समर्थकों के दबाव में वापस चले गए, ये अलग मैटर है। हड़ताली कर्मचारियों को इतने में ही हड़ताल खत्म कर देना चाहिए था। विष्णु देव साय की सरकार है, सुशासन की सरकार है। आपने देखा कुसमी में एक एसडीएम गलती किया, तो उसके ऊपर भी कड़ी कार्रवाई की गई है। हमारे विधायक जी को मैं नहीं मानता कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। उनके समर्थकों ने नायब तहसीलदार के साथ अभद्रता की, कहीं न कहीं वे पीड़ित रहे होंगे। इसके बावजूद शासन अगर एफआईआर किया तो विधायकजी ने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया, कि ठीक है। अंत में उन्होंने कहा कि, विष्णु देव साय की सुशासन की सरकार है, एफआइआर हो गया विधायक के ऊपर।

सुशासन में हो रहे बड़े-बड़े ड्रामे

पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि विष्णुदेव साय के सुशासन में बड़े-बड़े ड्रामे हो रहे हैं। मामला दर्ज हुआ है, आपको सरेंडर करना है, तो थाना बगल में है। आपको ड्रामा करने की क्या जरूरत है। अभी तक तो हम नहीं सुने हैं कि कोई आईजी के यहां सरेंडर करने आता हो, सब ड्रामेबाजी है। इन्हें नियम, कानून और प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी देना है तो थाना में दें, आईजी कार्यालय रैली निकाल कर आने की क्या जरूरत है। पुलिस के सामने जिस पर अपराध दर्ज है, वह रैली निकाल रहा है।

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